…तो इस बड़े कारण से पंजाब में कांग्रेस को सता रही पंचायत चुनाव की चिंता

चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने सितंबर में जिला परिषद, पंचायत समिति व जिला पंचायतों के चुनाव करवाने की तैयारी कर ली है, लेकिन कांग्रेस विधायक सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि चुनाव कुछ माह के लिए टाल दिया जाए। इसका मुख्य कारण चुनावों के दौरान पैदा होने वाली धड़ेबंदी है। विधायकों की चिंता है कि यह धड़ेबंदी कहीं आगामी लोकसभा चुनाव में उनके रिपोर्ट कार्ड को खराब न कर दे।...तो इस बड़े कारण से कांग्रेस को सता रही पंचायत चुनाव की चिंता

कांग्रेस भवन में हुई बैठक के दौरान विधायकों ने इस मुद्दे को पूरी शिद्दत से उठाया है। विधायकों की चिंता यह है कि चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेताओं की संख्या काफी अधिक है, जबकि पार्टी एक को ही टिकट देगी। ऐसी स्थिति में बाकी नेता नाराज हो सकते हैैं। और गुटबंदी आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी का गणित बिगाड़ सकती है।

पार्टी भी इस बात को अच्छी तरह समझ रही है। यही कारण है कि प्रदेश प्रधान सांसद सुनील जाखड़ ने गुटबाजी को रोकने के लिए दस साल तक पार्टी के टिकट पर लड़ने वाले नेताओं को ही प्राथमिकता देने का फार्मूला निकाला है। बता दें, कांग्रेस ने जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव पार्टी के सिंबल पर और पंचायत चुनाव में प्रत्याशी को सपोर्ट करने का फैसला किया है। पार्टी के विधायक कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी को जितवाने की जिम्मेदारी विधायकों की होती है। पंचायत चुनाव होने से गांवों में गुटबंदी बढ़ जाएगी। ऐसे में अगर किसी विधानसभा क्षेत्र से लोकसभा प्रत्याशी की लीड घटती है तो इसका असर उन पर ही आता है।

सरकार की संंवैधानिक मजबूरी

विधायक एक तरफ जहां चुनावों को टालने का दबाव बना रहे हैं वहीं, संवैधानिक मजबूरी के कारण सरकार चुनाव को आगे नहीं बढ़ा सकती है। जिला परिषद व पंचायत चुनाव के कारण ही सरकार ने 24 अगस्त को विधानसभा का सत्र बुला लिया है। ग्रामीण विभाग ने दस सितंबर तक जिला परिषद व पंचायत समिति और 30 सितंबर तक पंचायत चुनाव करवाने को लेकर अधिसूचना जारी की हुई है।

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