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हरियाणा: CM निवास की किचन में लगा राजनीति का तड़का

चंडीगढ़ । हरियाणा में विभिन्न मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में चलने वाली रसोई (किचन) इन दिनों चर्चा में है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा अपनी रसोई और दवाओं का खर्च खुद उठाने का बयान देने के बाद सियासत गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला ने मुख्यमंत्री के बयान को अपने-अपने ढंग से लेते हुए कई सवाल खड़े किए हैैं।हरियाणा: CM निवास की किचन में लगा राजनीति का तड़का

मनोहर के आरोप पर हुड्डा ने कहा- इनके घर कोई आता ही नहीं तो चाय पानी का खर्चा कहां से होगा

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा अपनी रसोई और दवाओं का खर्च खुद उठाना कौन सी नई बात है। मैैं भी अपनी रसोई का खर्च खुद उठाता था। उन्होंने कहा कि जनता अपने काम के लिए मुख्यमंत्री के पास पहुंचती है। राज्य भर के आने वाले लोगों की सेवा पानी करना, उन्हें चाय पिलाना मुख्यमंत्री का धर्म होता है। हमारे कार्यकाल में यह धर्म अच्छी तरह से निभाया जाता रहा है, लेकिन मनोहर लाल के पास लोग आते ही नहीं, क्योंकि उन्हें पता है कि यहां आकर काम तो होंगे नहीं, इसलिए रसोई का खर्च भी 20 से 25 हजार रुपये रह गया है।

मुख्यमंत्री ने अपनी किचन को लेकर यह दिया था बयान

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि पहले अनाप शनाप बिल बनाए जाते थे। अब 20 से 25 हजार रुपये मासिक ही बिल बनता है। उन्‍होंने कहा, अपना दवाई और रसोई का खर्च मैैं खुद उठाता हूं। मेरे वेतन से यह राशि कटती है। एक अच्छी व्यवस्था के माध्यम से हम जनता पर पैसे का बोझ नहीं डालेंगे। यह जनता का पैसा हैं और मुझे क्या अधिकार है कि इस पैसे को मैं अपने ऊपर खर्च करूं। पहले पांच से सात लाख रुपये मासिक बिल बनते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होता।

सीएम मनोहरलाल के बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, मुझे पता चला है कि मुख्यमंत्री कह रहे कि पहले किचन में पांच से सात लाख रुपये का खर्च बिल आता था। भला उनसे पूछो, इतने पैसे के सारे बिस्कुट क्या मैैं अकेला खा जाता था। मेरे पास पब्लिक आती थी। उनका मान-सम्मान करना हमारी ड्यूटी है। उन्हें चाय भी पिलाई जाती है और बिस्कुट भी खिलाए जाते हैैं। इसमें हर्ज क्या है।

हुड्डा ने कहा, इनके पास तो कोई आता ही नहीं, फिर कहां से खर्च करेंगे। करेंगे बड़े-बड़े भ्रष्टाचार और रोना रोएंगे किचन के बिलों का। इनके यहां तो टोस्ट नहीं मिलने पर भी ओएसडी वेटर को पीट देते हैैं। मैैं तो अपने समय में गाय भी अपनी रखता था दूध के लिए।

आरएसएस की शाखाओं में बांटा जा रहा किचन का पैसा

नेता विपक्ष अभय सिंह चौटाला के अनुसार, मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अगर लगता है कि किचन में फिजूलखर्ची हो रही थी तो उसकी वसूली का प्रावधान किया जाना चाहिए। फिजूलखर्ची करने वालों के नाम बताकर और कमीशन लेने वालों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

चौटाला ने कहा कि मुख्यमंत्री यह भी बताएं कि ओमप्रकाश चौटाला जब सीएम थे, तब किसी मंत्री को कितनी ग्रांट मिलती थी और अब कितनी मिलती है। चौटाला सरकार में यह राशि सिर्फ दो करोड़ रुपये थे, जो अब मनोहर लाल ने 132 करोड़ रुपये कर दी है। इस सारी राशि का इस्तेमाल आरएसएस की शाखाओं में किया जा रहा है। इस राशि पर भी मुख्यमंत्री को श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

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