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ताकत दिखाने के लिए दुश्मनों से खूनी जंग को तैयार चीन, जिनपिंग ने लोगों को भड़काया

चीन के एक बयान ने खलबली मचा दी है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 13वीं नेशनल पीपल्स कांग्रेस को संबोधित करते हुए ऐसा कह दिया जिसे सुनने के बाद कई देशों की चिंता बढ़ गई है। इस संबोधन में शी जिनपिंग ने काफी आक्रामक भाषण दिया है। उन्होंने कहा कि चीन दुनिया में अपनी जगह पाने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है और इसके लिए वो किसी भी युद्ध के लिए तैयार है।

ताकत दिखाने के लिए दुश्मनों से खूनी जंग को तैयार चीन, जिनपिंग ने लोगों को भड़कायाचीन ने ताइवान को चेताया

ना सिर्फ ताइवान बल्कि हॉन्ग कॉन्ग की आजादी का समर्थन करने वालों को भी चीन ने कड़ी चेतावनी दी है। शी ने कहा कि चीन से कोई एक इंच भी जमीन नहीं ले सकता है। शी के इस बयान का वहां मौजदू सैकड़ों प्रतिनिधियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।

शी ने कहा, ”हमलोग अपने दुश्मनों के खिलाफ खूनी लड़ाई लड़ने के लिए कृतसंकल्प हैं। हम लोग पूरी मजबूती के साथ दुनिया में अपनी जगह पाने के लिए संकल्पबद्ध हैं।”

शी के इस भाषण का टीवी पर प्रसारण देख लोगों में कई प्रकार की बातें शुरू हो गईं। शी ने चीनी इतिहास पर कई बातें कीं। शी ने ऐतिहासिक उपलब्धियों की भी चर्चा की। शी ने कहा कि चीन ने दुनिया को अखबार, कफ्युशियसवाद और चीनी दीवार जैसी चीजें दीं। उन्होंने कहा कि चीन ने अतीत में बाहरी आक्रांताओं का मजबूती से सामना किया है।

बता दें कि 1949 में चीन में गृहयुद्ध खत्म होने के बाद से ताइवान में स्वतंत्र सरकार है। इस दौरान ताइवान में हार के बाद राष्ट्रवादी सरकार को वहां से भागना पड़ा था। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसका कहना है कि जरूरत पड़ने पर उसे अपने नियंत्रण में ले लेगा।

शी ने जनता को बताया हीरो

शी ने चीन को बताया कि अब उनकी क्या प्राथमिकताएं हैं। शी ने अपने नियंत्रण में चीनी संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता पर जोर दिया है। शी ने कहा कि हमें हर हाल में मातृभूमि की एकता सुनिश्चित करनी है।” ताइवान और हॉन्ग कॉन्ग को लेकर चीन का यह सबसे आक्रामक बयान माना जा रहा है। शी ने कहा कि इतिहास में यह साबित हो चुका है कि समाजवाद के जरिए ही चीन अपने मुकाम पर पहुंच सकता है। शी ने चीनी लोगों को हीरो कहा और सभी राजनेताओं को जनता के हित में कड़ी मेहनत की सीख दी।

अमेरिका को लिया आड़े हाथ

चीनी राष्ट्रपति का यह बयान अमेरिका को जवाब के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने एक कानून पास किया था जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान में और सीनियर अधिकारियों को भेजने को प्रोत्साहित करेगा। हालांकि अमेरिका का ताइवान के साथ कोई औपचारिक संबंध नहीं है। ताइवान को स्वतंत्र देश का दर्जा देने की कोशिश का चीन कड़ा विरोध करता रहा है।

चीन में राष्ट्रपति बनने के कार्यकाल की सीमा को भी खत्म कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि ऐसा शी जिनपिंग के आजीवन राष्ट्रपति बने रहने के लिए किया गया है। शी जिनपिंग को माओत्से तुंग के बाद सबसे ताकतवर नेता माना जा रहा है। माओत्से तुंग के बाद वहां के संविधान में ‘शी जिनपिंग थॉट’ भी शामिल किया गया है। हालांकि चीन के बाहर इस कदम की आलोचना भी हो रही है।

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