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डोकलाम में चीन कुछ इस तरह बढ़ा रहा है अपने कदम

अमेरिका के उच्च अधिकारियों की ओर से डोकलाम में चीन की गतिविधि से जुड़ा दावा करने के बाद कुछ उच्च पदस्थ सूत्रों से निर्माण कार्य की प्रकृति के बारे में जानने के लिए बात की. इस बातचीत में सामने आया है कि चीन वही प्रोजेक्ट दोबारा शुरू कर रहा है जिसका भारत ने बीते साल जून में विरोध किया था. इसके साथ ही दोनों देशों के सैनिक 73 दिनों तक आमने सामने खड़े थे.डोकलाम में चीन कुछ इस तरह बढ़ा रहा है अपने कदम

सूत्रों का कहना है कि उस इलाके में फिलहाल बड़ा निर्माण कार्य चल रहा है. सूत्रों के मुताबिक 23 मार्च को 12 किलोमीटर की सड़क पर चीन ने काम करना शुरु किया ताकि वह डोक ला को अपनी फॉरवर्ड मिलिट्री बेस यातुंग से जोड़ सके. यह निर्माण कार्य मेरुग ला में हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि इलाके में निर्माण से जुड़ी 8 से 10 गाड़ियां मौजूदा हैं. इसके साथ ही भारतीय सैटेलाइट से अपने निर्माण कार्य को छिपाने के लिए 5 अस्थायी शेड लगाए गए हैं. चीन की मिलिट्री और कामगारों के लिए 90 टेंट लगाए गए हैं. इसके साथ ही 30 भारी वाहन भी इलाके में देखे गए हैं.

इस रोड को बनाने के पीछे का मकसद यह है कि डोक ला को चीन के S-204 हाईवे से जोड़ना है जो नाथू ला पास के करीब फॉरवर्ड मिलिट्री बेस यातुंग में खत्म होती है. यातुंग से जाने वाली रोड असम की ओर आती है और वहां कुछ रास्ते हैं जो इसे डोक ला से जोड़ते हैं. चीन के लोग डोक ला क्षेत्र में काम कर रहे हैं. इस साल जनवरी में, विवादित पठार क्षेत्र के पास एक पूर्ण सैन्य परिसर के निर्माण कार्य की बात कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था. इन रिपोर्ट्स के अनुसार चीन खुद को एक और डोक ला स्टैंड ऑफ के लिए तैयार कर रहा है. उन रिपोर्ट्स पर टिप्पणी करते हुए चीन के अधिकारियों ने कहा था, ‘हम डोकलाम में इंफ्रास्ट्रक्चर बनाते रहेंगे और भारत को चीनी सीमा के भीतर हो रहे निर्माण कार्य पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है.’

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा था, ‘चीन क्षेत्र में अपनी संप्रभुता का प्रयोग कर रहा है.’ यह उचित और न्यायसंगत है. जैसे चीन, भारत के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के निर्माण के बारे में टिप्पणी नहीं करता, हम उम्मीद करते हैं कि अन्य देश चीन के बुनियादी ढांचे के निर्माण पर टिप्पणी नहीं करेंगे.’ उन्होंने यह भी कहा था, ‘डॉन्गलॉन्ग में चीन की स्थिति एकदम स्पष्ट है. डॉन्गलॉन्ग हमेशा से चीन का रहा है और हमेशा चीन के प्रभावी न्यायाधिकार में रहा है. इस मामले में कोई विवाद नहीं है.’

सांसद एन वेगनर ने सवाल किया था, ‘हालांकि दोनों देश पीछे हट गए थे लेकिन चीन ने डोकलाम में चुपचाप अपनी गतिविधियां फिर से शुरू कर दी और ना तो भूटान , ना ही भारत ने उसे ऐसा करने से रोका. हिमालय में चीन की गतिविधियां मुझे उसकी दक्षिण चीन सागर की नीति की याद दिलाती हैं.’ जिसके जवाब में जी वेल्स ने कहा, ‘मैं यह कहूंगी कि भारत  उत्तरी सीमाओं का जोरदार तरीके से बचाव कर रहा है और यह भारत के लिये चिंता का विषय है.’

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