लखनऊ: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दलितों के आरक्षण को लेकर एससी/एसटी कमीशन के अध्यक्ष व बीजेपी सांसद रामशंकर कठेरिया ने नया बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को मुस्लिमों ने नहीं बनवाया और न ही कभी मुस्लिमों द्वारा कभी संचालित किया गया. उन्होंने कहा कि यह 1967 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है. इसके साथ ही कोर्ट यह भी कह चुके हैं कि एएमयू अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी नहीं है. कुछ ही दिनों में यह दूसरा मौका है जब एएमयू को लेकर विवादों हो रहा है. इससे पहले जिन्ना की तस्वीर को लेकर जमकर हंगामा हुआ था.

गैर मुस्लिमों ने दिए रुपए तब बनी यूनिवर्सिटी

लखनऊ में आज प्रेस कांफ्रेंस करने वाले एससी/एसटी कमीशन के अध्यक्ष व बीजेपी सांसद राम शंकर कठेरिया ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में संवैधानिक निर्णयों को नहीं माना जा रहा है. उन्होंने एएमयू का इतिहास बताते हुए कहा कि 1877 में सर सैयद अहमद द्वारा मोहम्मदन एंग्लो ओरियंटल कॉलेज के रूप में शैक्षणिक संस्था का प्रारम्भ किया. इसके बड़ा यूनिवर्सिटी को शुरू करने के लिए फाउंडेशन कमेटी बनी. इसी फाउंडेशन ने रुपए एकत्रित किए. रुपए महाराजा विजयनगरम, गुरु प्रसाद सिंह, जगजीत सिंह, राजा हरी किशन सिंह, महाराजा दरभंगा, राय शंकर दास, महाराजा पटियाला आदि ने दान दिए. इस कमेटी को अनुदान मुस्लिम और गैर मुस्लिम लोगों द्वारा दिया गया, इसके बाद एएमयू को 1920 अधिनियम के माध्यम से स्थापित किया गया.

संघीय कानून लागू होगा

उन्होंने कहा कि एएमयू को संविधान की 7वीं अनुसूची में संघीय सूची में रखा गया, तो उस पर संघीय कानून लागू होगा. उन्होंने पूर्व के बड़े मुस्लिम नेताओं के नाम गिनाए और कहा कि इन नेताओं ने भी कहा था कि एएमयू मुस्लिम संस्थान नहीं है.

रिजर्वेशन नहीं तो आर्थिक मदद नहीं

बता दें कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर वह अपने यहां साढ़े 22 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने की आयोग की सिफारिश का अनुपालन नहीं करता है तो वह इस संस्थान को मिलने वाली सरकारी मदद रुकवा देंगे. अगर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अधिकारी एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान साबित करने के आयोग के लिखित सवाल का एक महीने के अंदर समुचित जवाब नहीं देते हैं, तो वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से एएमयू को मिलने वाले सभी अनुदान रोकने को कहेंगे.