उपचुनाव में कैप्टन की ‘लोकप्रियता और सुखबीर का ‘मैनेजमेंट दांव पर

चंडीगढ़: 2019 के लोक सभा चुनाव से पूर्व पंजाब के अंतिम विधान सभा उप चुनाव के परिणाम भविष्य की राजनीति की नई इबादत लिखने को तैयार है। बेशक 2017 के विस चुनाव में में कैप्टन अमरिंदर सिंह की लोकप्रियता के आगे सुखबीर सिंह बादल का चुनावी मैनेजमेंट पूरी तरह से विफल हो गया था, लेकिन 14 माह बाद होने वाले शाहकोट उप चुनाव में दोनों ही नेता एक बार फिर आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन को जहां अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है वहीं सुखबीर अपने मैनेजमेंट पर यकीन रखते हैं, लेकिन साख दोनों नेताओं की दांव पर है।उपचुनाव में कैप्टन की 'लोकप्रियता और सुखबीर का 'मैनेजमेंट दांव पर

कांग्रेस भी इस उप चुनाव के असर को भली भांति जानती है। क्योंकि कांग्रेस के लिए पटियाला तो अकाली दल के लिए लंबी के बाद शाहकोट ही ऐसी सीट है जोकि अभेद है। जिस प्रकार अकाली दल पटियाला में कांग्र्रेस का किला नहीं भेद पाती है उसी प्रकार कांग्रेस शाहकोट में अकाली दल की दीवार नहीं गिरा पा रही है। उप चुनाव से बेशक भले ही विधान सभा में कांग्र्रेस के सेहत पर कोई असर न पड़ा हो, लेकिन कैप्टन को यह पता है कि 10 साल बाद 77 विधायकों के साथ पंजाब में सरकार बनाने के बाद उप चुनाव का कितना महत्व है। क्योंकि अगर चुनाव परिणाम कांग्रेस के पक्ष में जाता है तो इससे कांग्रेस को भले ही कोई बड़ा फायदा न मिले लेकिन अकाली दल का एक अभेद दुर्ग ढह जाएगा। वहीं, अगर कांग्र्रेस के सरकार में अकाली दल अपना दुर्ग बचा पाने में कामयाब होती है तो वह इस बात का सूचक होगा कि मात्र 14 माह में ही कैप्टन की लोकप्रियता कम होनी शुरू हो गई है। यहीं से 2019 लोकसभा चुनाव का भी आंकलन शुरू हो जाएगा।

अकाली दल के पूर्व मंत्री व इसी सीट से पांच बार रहे विधायक अजीत सिंह कोहाड़ के 4 फरवरी के निधन होने के बाद होने वाला यह उप चुनाव शुरू हो से विवादों में घिरा हुआ है। विवाद की शुरुआत चुनाव के घोषणा के साथ ही हो गई थी। जब कांग्रेस के नेता व अब प्रत्याशी हरदेव सिंह लाडी का एक वीडियो, जिसमें वह रेत स्कैम में सेटलमेंट करवाते हुए दिखाई दिए, को लेकर वायरल हुआ। इसके बावजूद कांग्र्रेस ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया।

असली विवाद तो तब हुआ जब महितपुर के एसएचओ परमिंदर सिंह बाजवा ने कांग्र्रेस के प्रत्याशी हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया के विरुद्ध रेत खनन मामले में एफआइआर दर्ज कर दिया। देश में यह अपने आप में पहला केस होगा जब किसी सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी के खिलाफ पर्चा दर्ज हुआ हो। इस पूरे प्रकरण में कांग्र्रेस की खासी फजीहत हुई और मुख्यमंत्री कैप्टन अमङ्क्षरदर सिंह को भी मैदान में उतरना पड़ा है।

इतिहास की किताब पर ‘बैकफुट’ पर सरकार

शाहकोट उप चुनाव की गर्मी में इन दिनों 11वीं और 12वीं के इतिहास की किताब में गुरुओं की शिक्षा मामला तूल पकड़े हुए है। अकाली दल ने मुद्दे पर कांग्रेस को बैकफुट पर जाने को मजबूर कर दिया है। पहले तो सरकार ने अकाली दल का मुकाबला किया लेकिन बाद में एक कमेटी बनाकर मामले को कमेटी के हवाले कर दिया। क्योंकि सरकार यह मान रही है कि उप चुनाव के दौरान गुरुओं के इतिहास को लेकर अगर मामला और अधिक तूल पकड़ता है तो इसका सीधा असर चुनाव पर पड़ेगा। 

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