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	<title>बड़ी खबर &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
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	<title>बड़ी खबर &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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		<title>तमिलनाडु में मिला 3200 साल पुराना कटोरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 11:12:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[कटोरा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="753" height="501" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/10/1-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-3200-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0/">तमिलनाडु में मिला 3200 साल पुराना कटोरा</a></p>
<p>तमिलनाडु में सेलम के पास मेट्टूर बांध के जलमग्न क्षेत्र तेलुंगनूर में खुदाई के दौरान काले और लाल रंग की एक साबुत प्राचीन कटोरा मिला है। इसके साथ ही लोहे के हथियार, तांबे की वस्तुएं और एक संभावित स्टील की तलवार भी निकला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज 3200 साल से भी &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="753" height="501" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/10/1-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-3200-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0/">तमिलनाडु में मिला 3200 साल पुराना कटोरा</a></p>
<p>तमिलनाडु में सेलम के पास मेट्टूर बांध के जलमग्न क्षेत्र तेलुंगनूर में खुदाई के दौरान काले और लाल रंग की एक साबुत प्राचीन कटोरा मिला है। इसके साथ ही लोहे के हथियार, तांबे की वस्तुएं और एक संभावित स्टील की तलवार भी निकला है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज 3200 साल से भी अधिक पुरानी लेखन प्रणाली या लिपि से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग दे सकती है। तमिलनाडु पुरातत्व विभाग द्वारा खोजी गई इस कटोरी पर बाएं से दाएं पांच ग्राफिती अंकित हैं। राज्य में अब तक मिली कलाकृतियों पर दर्ज निशानों में यह सबसे लंबी श्रृंखला है।</p>
<p>पुरातत्वविदों का मानना है कि यह लिपि का कोई शुरुआती रूप हो सकता है, क्योंकि एक अन्य कटोरी पर भी यही पांचों चिह्न अलग क्रम में मिले हैं। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह छठी शताब्दी ईसा पूर्व की तमिल-ब्राह्मी लिपि का शुरुआती रूप हो सकता है।</p>
<p><strong>सिंधु घाटी सभ्यता से गहरा संबंध</strong><br />
सेलम के पास स्थित तेलुंगनूर और मांगाडू लौह युग के दो जुड़वां स्थल हैं, जिनका समय 1600 ईसा पूर्व से 1200 ईसा पूर्व के बीच का माना गया है। यह कालखंड सिंधु घाटी सभ्यता का अंतिम दौर था।</p>
<p>तमिलनाडु पुरातत्व विभाग के सलाहकार के. राजन ने बताया कि 1960 के दशक में भारतीय पुरातत्व विभाग को चेंगलपट्टू के पास सानूर में अलग-अलग क्रम में तीन ग्राफिती चिह्न मिले थे। अब दो अलग-अलग क्रमों में पांच-पांच चिह्न मिले हैं, जिनका अर्थ समझना अभी बाकी है।</p>
<p>तमिलनाडु में अब तक कई स्थलों से करीब 16000 ग्राफिती वाले मिट्टी के बर्तन के टुकड़े मिल चुके हैं। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, कोडुमनाल, कीलाडी, थुलुक्कड़पट्टी और किलनामंडी जैसे तमिलनाडु के स्थलों और सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों पर मिले चिह्नों में 90 प्रतिशत तक समानता है।</p>
<p>सिंधु घाटी सभ्यता का अस्तित्व 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है। इसके अलावा, तमिल-ब्राह्मी शिलालेखों और बर्तनों पर अक्षरों के अंत में बने चिह्न भी प्राचीन संचार व्यवस्था की ओर इशारा करते हैं।</p>
<p><strong>कई दुर्लभ और प्राचीन हथियार भी मिली</strong><br />
इस स्थान से केवल मिट्टी के बर्तन ही नहीं, बल्कि कई दुर्लभ और प्राचीन हथियार भी मिली हैं। उत्खनन निदेशक एस. परनथामन के अनुसार, यहां से 1.9 मीटर लंबा लोहे का भाला मिला है।</p>
<p>इसके अलावा तीर के अग्रभाग, कुल्हाड़ियां, तलवारें, कटार, चाकू और लोहे की कीलें भी मिली हैं। विशेषज्ञों को यहां एक बेहद प्राचीन स्टील की तलवार मिलने का भी संदेह है।</p>
<p>यह स्थल पहले भी काफी चर्चा में रहा है, जब यहां से मिली एक स्टील की तलवार की कार्बन डेटिंग 1200 ईसा पूर्व तय की गई थी। इसे दुनिया की सबसे पुरानी स्टील की तलवारों में से एक माना जाता है।</p>
<p><strong>लौह युग के कंकाल और चार प्रकार की दफनाने की प्रथाएं</strong></p>
<p>उत्खनन के दौरान पुरातत्वविदों को यहां लौह युग के दो इंसानों के पूरे कंकाल भी मिले हैं। इसके अलावा, इस एक ही स्थल पर दफनाने की चार अलग-अलग पद्धतियां गड्ढा/पिट, पाषाण पेटिका/सिट, अस्थि कलश/अर्न और शव-मंजूषा/सरकोफैगस देखने को मिली हैं।</p>
<p>निदेशक परनथामन का कहना है कि एक ही जगह पर चार प्रकार की दफन प्रणालियों का मिलना यह दर्शाता है कि यहां एक विविधतापूर्ण समाज निवास करता था। यह इस बात का भी प्रमाण है कि यह स्थान शुरुआती लौह युग से विकसित होकर उत्तर लौह युग तक निरंतर समृद्ध रहा।</p>
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		<title>308 चक्के वाला ट्रक, 200 टन की मशीन और 2 करोड़ का डीजल&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 11:32:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1060" height="597" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/5-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/5-20.jpg 1060w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/5-20-768x433.jpg 768w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/5-20-390x220.jpg 390w" sizes="(max-width: 1060px) 100vw, 1060px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/308-%e0%a4%9a%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95-200-%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a5%80/">308 चक्के वाला ट्रक, 200 टन की मशीन और 2 करोड़ का डीजल&#8230;</a></p>
<p>जिस देश में सड़क किनारे जेसीबी (JCB) की साधारण सी खुदाई देखने के लिए भी सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो जाती है, जरा सोचिए।।। अगर वहां की सड़कों पर अचानक 308 पहियों वाला एक &#8216;दैत्यरूपी&#8217; मेगा ट्रक और उस पर लदी 200 टन की भारी-भरकम मशीन सामने आ जाए, तो नजारा कैसा होगा? जी &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">जिस देश में सड़क किनारे जेसीबी (JCB) की साधारण सी खुदाई देखने के लिए भी सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो जाती है, जरा सोचिए।।। अगर वहां की सड़कों पर अचानक 308 पहियों वाला एक &#8216;दैत्यरूपी&#8217; मेगा ट्रक और उस पर लदी 200 टन की भारी-भरकम मशीन सामने आ जाए, तो नजारा कैसा होगा?</p>



<p class="wp-block-paragraph">जी हां, इस वक्त उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में कुछ ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है! इस मेगा ट्रक को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। फिलहाल यह ट्रक चंदौली में रुका हुआ है और आगे के रूट क्लेरेंस का इंतजार कर रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेकिन सवाल यह है कि आखिर 308 पहियों वाला यह मेगा ट्रक आ कहां से रहा है? इसे जाना कहां है? यह कौन-कौन से रास्तों से होकर गुजरा, अब तक इसमें कितना डीजल फूंक दिया गया और सबसे जरूरी बात इस भारी-भरकम मशीन का असली काम क्या है? आइए, इस मेगा ट्रक की पूरी सफरनामा और इससे जुड़े हर एक दिलचस्प फैक्ट के बारे में विस्तार से जानते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कहां से आई है 200 टन वजनी मशीन?<br /></strong>200 टन वजनी यह औद्योगिक वेसल यूरोपीय देश बेल्जियम से समुद्री रास्ते से भारत आया है। यह वेसल बेल्जियम के एंटवर्प बंदरगाह से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा। इसके बाद इसे विशेष हाइड्रोलिक ट्रक के जरिये सड़क मार्ग से बलरामपुर स्थित चीनी मिल लाया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोमवार तक ये यह ट्रक बनारस पहुंचा था। मंगलवार सुबह राजातालाब से रिंग रोड चढ़ाते हुए हरहुआ, संदहा होते हुए गाजीपुर के लिए निकाला जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>रूट क्लेरेंस सबसे बड़ी समस्या<br /></strong>308 पहिए वाले, 100 फीट लंबे और लगभग सात मीटर चौड़े ट्रेलर को निकालने के लिए सड़कें बाधा बनी हुई है। कहीं सड़क की चौड़ाई कम है तो कहीं फूटओवर ब्रिज तो कहीं बिजली के खंभे और होर्डिंग्स समस्या बनी हुई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रास्ता साफ करने के लिए लगातार काम चल रहा है यहीं वजह है कि ट्रक अपनी औसत स्पीड से (20 किमी/प्रतिदिन) से कम रस्तार से चल पा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>किन राज्यों से होकर गुजरा ट्रक?<br /></strong>308 पहियों वाला यह ट्रक ओडिशा के पारादीप पोर्ट से लंबी सड़क यात्रा पर निकला है। ओडिशा के बाद इसने झारखंड,होते हुए बिहार की सीमा में कदम रखा। बिहार के औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर जिलों से होकर गुजरते हुए, इसने नौबतपुर के रास्ते उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एंट्री ली।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब चंदौली से आगे बढ़ते हुए यह वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़ और लखीमपुर खीरी समेत यूपी के कई बड़े जिलों को पार करेगा। इसके सफर का आखिरी पड़ाव बलरामपुर शुगर मिल है, जहां इस मशीन को डिलीवर किया जाना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>किस काम आएगा 200 टन वजनी वेसल?<br /></strong>बेल्जियम से मंगाया गया यह 200 टन वजनी वेसल बलरामपुर चीनी मिल से जुड़े एथनॉल प्लांट में स्थापित किया जाएगा। इस वेसल के अंदर &#8216;वैक्यूम बॉयलर&#8217; जैसे भारी औद्योगिक उपकरण लगे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) इस वेसल का इस्तेमाल केवल चीनी उत्पादन तक सीमित न रखकर, गन्ने से एथनॉल जैसे सह-उत्पाद तैयार करने के लिए करेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब तक इसमें कितना डीजल फूंका गया?<br /></strong>ट्रक चालक के अनुसार अब तक 2 करोड़ का डीजल की खपत हो चुकी है। ट्रक के ड्राइवर ने बताया कि रोजाना 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है। संभावना है कि आने वाले नवरात्र तक यह ट्रक लखीमपुर प्लांट तक पहुंच जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>308 पहिए वाले ट्रक की खासियत<br /></strong>200 टन वजनी, 100 फीट लंबे और 7 मीटर चौड़े विशाल वेसल को सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी स्थित बलरामपुर चीनी मिल तक पहुंचाने के लिए 308 पहियों वाले एक विशेष हैवी-ड्यूटी ट्रक का इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जेएम बक्शी ग्रुप द्वारा संचालित इस परिवहन कार्य में स्वीडिश ऑटोमोबाइल दिग्गज वोल्वो का Volvo FH16 ट्रक मॉडल लगाया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">100 टन से अधिक भार सहने के लिए डिजाइन किया गया यह ट्रक 600 से 780 HP की जबरदस्त इंजन क्षमता और लगभग 3800 Nm का प्रचंड टॉर्क पैदा करता है, जो सैकड़ों टन वजन के सिंगल-यूनिट वेसल का भार 308 पहियों में समान रूप से विभाजित करके बिना किसी रुकावट के खींचने में सक्षम है।</p>
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		<title>नेपाल में एक और त्रासदी: हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में अचानक हिमस्खलन, 10 लोग लापता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Sep 2026 10:03:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[हिमलुंग हिमाल बेस कैंप]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="570" height="343" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/9-6.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf/">नेपाल में एक और त्रासदी: हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में अचानक हिमस्खलन, 10 लोग लापता</a></p>
<p>नेपाल के पश्चिमी हिस्से में तिब्बत की सीमा के पास स्थित हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में रविवार सुबह भीषण हिमस्खलन हुआ। इस हादसे के बाद कम से कम 10 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में अलग-अलग पर्वतारोहण अभियानों से जुड़े लोग शामिल हैं। अभियान आयोजकों के मुताबिक, दो &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="570" height="343" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/9-6.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%bf/">नेपाल में एक और त्रासदी: हिमलुंग हिमाल बेस कैंप में अचानक हिमस्खलन, 10 लोग लापता</a></p>

<p class="wp-block-paragraph">नेपाल के पश्चिमी हिस्से में तिब्बत की सीमा के पास स्थित हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में रविवार सुबह भीषण हिमस्खलन हुआ। इस हादसे के बाद कम से कम 10 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में अलग-अलग पर्वतारोहण अभियानों से जुड़े लोग शामिल हैं। अभियान आयोजकों के मुताबिक, दो लापता लोग रसोई में काम करने वाले कर्मचारी हैं। इलाके में पिछले कई दिनों से भारी बर्फबारी हो रही थी और खराब मौसम के कारण पर्वतारोहण अभियान पहले ही मुश्किल हो गए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>हिमलुंग हिमाल में आखिर क्या हुआ?<br /></strong>अभियान आयोजक मिंगमा ग्यालजे शेरपा के मुताबिक, हिमस्खलन रविवार सुबह आया। उन्होंने बताया कि उनके रसोई कर्मचारियों में से दो लोग भी लापता हैं। पिछले सप्ताह मौसम को लेकर चेतावनी जारी होने के बाद पर्वतारोहण दल और रस्सी लगाने वाली टीमें पहाड़ की ढलानों से नीचे लौट आई थीं। हालांकि, कुछ लोग वहां रुक गए थे। रविवार को आए हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद कम से कम 10 लोगों के लापता होने की जानकारी मिली है। ये सभी लोग अलग-अलग अभियान कंपनियों से जुड़े हुए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्या कई दिनों से लगातार हो रही थी बर्फबारी?<br /></strong>हिमलुंग हिमाल क्षेत्र में पिछले कई दिनों से भारी बर्फबारी हो रही थी। खराब मौसम के कारण पर्वतारोहियों को शरद ऋतु में होने वाली चढ़ाई से पीछे हटना पड़ा था। लगातार बारिश और बर्फबारी ने नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हालात और मुश्किल कर दिए हैं। मौसम बिगड़ने के बाद पर्यटन अधिकारियों ने ट्रेकिंग और पर्वतारोहण गतिविधियों को रोकने की सलाह दी है। पर्यटन विभाग ने भी लोगों को मौसम साफ होने तक पर्यटन गतिविधियां स्थगित रखने को कहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कितने मीटर ऊंचा है हिमलुंग हिमाल?<br /></strong>हिमलुंग हिमाल की ऊंचाई 7,126 मीटर है और यह नेपाल के मनांग जिले में स्थित है। ऊंचाई पर पर्वतारोहण का अनुभव हासिल करने वाले पर्वतारोहियों के बीच यह चोटी काफी लोकप्रिय है। हालांकि, यहां पहुंचना आसान नहीं है। हिमलुंग हिमाल क्षेत्र में हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए अतिरिक्त अनुमति की जरूरत होती है। ऐसे में किसी हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लापता लोगों की तलाश के बीच खराब मौसम इस चुनौती को और बढ़ा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नेपाल में क्यों बिगड़े हैं मौसम के हालात?<br /></strong>बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने मौसम तंत्र का असर नेपाल के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है। पहाड़ों में भारी बर्फबारी हो रही है, जबकि पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार बारिश हो रही है। शुक्रवार से खराब मौसम के कारण नेपाल में कई जगह सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। स्थानीय प्रशासन ने कुछ सड़कों को यातायात के लिए बंद भी किया है। लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण कई ट्रेकिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं और मनास्लू तथा धौलागिरी जैसे पहाड़ों पर प्रमुख पर्वतारोहण अभियानों को रद्द या स्थगित करना पड़ा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पिछले महीने आई बाढ़ के बाद अब हिमस्खलन की मार?<br /></strong>नेपाल अभी पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ के असर से भी जूझ रहा है। रसुवा में आई बाढ़ में 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और 5000 से अधिक लोग लापता बताए गए थे। त्रिशूली नदी के किनारे बसे कई इलाकों को बाढ़ ने तबाह कर दिया था। इस आपदा का असर नेपाल के पर्यटन क्षेत्र पर भी पड़ा। अब लगातार बारिश और बर्फबारी ने ट्रेकिंग मार्गों और पर्वतारोहण गतिविधियों को प्रभावित कर दिया है। ऐसे में हिमलुंग हिमाल में हुआ हिमस्खलन नेपाल के लिए एक और गंभीर चुनौती बन गया है।</p>
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		<title>भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना इतना आसान नहीं&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Sep 2026 09:51:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1009" height="579" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/22-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/22-4.jpg 1009w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/22-4-768x441.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1009px) 100vw, 1009px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%95/">भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना इतना आसान नहीं&#8230;</a></p>
<p>भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाना इतना आसान नहीं है और सरकार भी चाहे तो सीधे तौर पर सीईसी को नहीं हटा सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। सीईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निर्वाचन आयोग (ECI) &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाना इतना आसान नहीं है और सरकार भी चाहे तो सीधे तौर पर सीईसी को नहीं हटा सकती। ऐसा इसलिए है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जजों की तरह ही विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीईसी को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज में सरकार के सीधे दखल को रोकने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। आजाद भारत के इतिहास में कभी भी किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से नहीं हटाया गया है। हालांकि, इसकी कोशिशें तो हुईं लेकिन ऐसा हो न सका। आइए पीछे के पन्नों को पलटकर देखते हैं…</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1992… टीएन शेषन के खिलाफ मांग<br /></strong>1992 में वामपंथी दलों ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। यह कोशिश किसी औपचारिक प्रस्ताव के रूप में आगे नहीं बढ़ सकी क्योंकि इसे पेश करने के लिए जरूरी संसदीय समर्थन नहीं मिल पाया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2006… चुनाव आयुक्त नवीन चावला के खिलाफ एनडीए की याचिका<br /></strong>मार्च 2006 में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने राष्ट्रपति को याचिका देकर चुनाव आयुर्त नवीन चावला को हटाने की मांग की।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2009… नवीन चावला के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश<br /></strong>2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने पक्षपातपूर्ण व्यवहार और राजनीतिक झुकाव के आरोपों का हवाला देते हुए चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की औपचारिक सिफारिश की। बाद में तत्कालीन यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सरकार ने इस सिफारिश को खारिज कर दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया<br /></strong>सीईसी को हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से उन संवैधानिक प्रावधानों के तहत होती है जो चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अनुच्छेद 324(5)</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">संविधान का अनुच्छेद 324(5) यह तय करता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से केवल उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अनुच्छेद 124(4)</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज को तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि राष्ट्रपति का आदेश न हो। यह आदेश संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद ही जारी किया जा सकता है। इस प्रस्ताव के लिए सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित तथा वोट देने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत का समर्थन जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">साथ ही, यह प्रस्ताव उसी सत्र में राष्ट्रपति को सौंपा जाना चाहिए और यह साबित होना चाहिए कि जज ने दुर्व्यवहार किया है या वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीईसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने और उसे पूरा करने के काम में पांच अलग-अलग चरण शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पहला चरण… नोटिस जमा करना</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राज्यसभा के चेयरमैन या लोकसभा के स्पीकर को एक औपचारिक नोटिस दिया जाता है। इस नोटिस को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सदस्य या राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्य का समर्थन जरूरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>दूसरा चरण… जांच समिति का गठन</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो पीठासीन अधिकारी हटाने के खास आधारों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक खास समिति बनाता है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज या चीफ जस्टिस, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और पीठासीन अधिकारी की राय में कानून के एक जाने-माने जानकार शामिल होने चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तीसरा चरण… जांच और रिपोर्टिंग</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">गठित समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी औपचारिक जांच रिपोर्ट चेयरमैन या स्पीकर को सौंपती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चौथा चरण… संसदीय वोटिंग</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को साबित हो चुके दुर्व्यवहार या अक्षमता का दोषी पाती है तो मामले को वोटिंग के लिए संसद में लाया जाता है। इस प्रस्ताव को पास करने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है-</p>



<p class="wp-block-paragraph">सदन के कुल सदस्यों के बहुमत का समर्थन और दोनों सदनों में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का बहुमत।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पांचवां चरण… राष्ट्रपति का आदेश</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर हटाने का बिल या प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों से सफलतापूर्वक पास हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति के सामने पेश किया जाता है। इसके बाद राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>संसद में मौजूदा संख्या-बल<br /></strong>मौजूदा संसदीय समीकरणों के तहत संसद के दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना किसी भी एक विपक्षी गुट के लिए एक ऐसी गणितीय बाधा है जिसे पार करना नामुमकिन है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्यों है असंभव?<br /></strong>लोकसभा में 360 का आंकड़ा छूने के लिए विपक्ष की मौजूदा कुल संख्या से कहीं ज्यादा सीटों की जरूरत है। अगर हम बीजेपी की 240 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 300 सदस्य ही बचते हैं। इसलिए 360 तक पहुंचना मुमकिन नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसी तरह राज्यसभा में 162 के आंकड़े तक पहुंचना गणितीय रूप से सीमित है। अगर हम बीजेपी की 116 सीटों को भी हटा दें तो सिर्फ 127 गैर-बीजेपी सदस्य बचते हैं। डीएमके (22 लोकसभा, 8 राज्यसभा) को विपक्षी गठबंधन इंडी के बजाय अन्य की श्रेणी में रखा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे में सवाल उठता है कि संख्याबल में कमी के बावजूद विपक्ष हटाने का प्रस्ताव क्यों ला रहा है?</p>
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		<title>यूक्रेन युद्ध में मृत राजकुमारों और संतों के अवशेष क्यों भेज रहा रूस?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2026 11:23:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[रूस]]></category>
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<p>जैसे-जैसे युद्ध एकै और सर्दी में प्रवेश कर रहा है, पूर्वी यूक्रेन में लड़ रही रूसी सेना को एक अनौखा समर्थन मिल रहा है। मध्ययुगीन रूसी शासकों और योद्धा संतों के अवशेषों को सैन्य ठिकानों और मोर्चों पर तैनात यूनिटों तक ले जाया जा रहा है। सितंबर की शुरूआत में, मॉस्को के राजकुमार दिमित्री डोंस्कोय &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="987" height="561" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/3-24.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/3-24.jpg 987w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/09/3-24-768x437.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 987px) 100vw, 987px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c/">यूक्रेन युद्ध में मृत राजकुमारों और संतों के अवशेष क्यों भेज रहा रूस?</a></p>

<p class="wp-block-paragraph">जैसे-जैसे युद्ध एकै और सर्दी में प्रवेश कर रहा है, पूर्वी यूक्रेन में लड़ रही रूसी सेना को एक अनौखा समर्थन मिल रहा है। मध्ययुगीन रूसी शासकों और योद्धा संतों के अवशेषों को सैन्य ठिकानों और मोर्चों पर तैनात यूनिटों तक ले जाया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सितंबर की शुरूआत में, मॉस्को के राजकुमार दिमित्री डोंस्कोय के अनशेषों का एक टुकड़ी रूसी सैनिकों के पास भेजा गया था। अब इसे रूस के कब्जे वाले यूक्रेन में सैन्य ठिकानों पर ले जाया जा रहा है। यह अवशेष उनके दाहिने हाथ का एक टुकड़ा है, रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च का कहना है कि लड़ाई के दौरान उन्होंने इसी हाथ से तलवार चलाई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मॉस्को पैट्रियार्केट के सैन्य विभाग ने कहा कि संत कमांडर रूसी सैनिकों के साथ अदृश्य रूप से कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे। CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम उस बड़ी भूमिका का हिस्सा है जो रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च ने युद्ध के दौरान निभाई थी। इसमें रूस के सैन्य अभियान के बारे में सरकारी नैरेटिव के साथ-साथ धार्मिक प्रतीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रिपोर्ट में धार्मिक विद्वान और फोर्डहम यूनिवर्सिटी के ऑर्थोडॉक्स क्रश्चियन स्टडीज सेंटर में कम्युनिकशंस डायरेक्टर सर्गेई चौपनिन के हवाले से कहा गया है कि चर्चा व्यावहारिक रूप से राज्य के साथ इस हद तक मिल गया है कि उनमें अंतर करना मुश्किल हो गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>डोंस्कोय के अवशेष मोर्चे पर क्यों लाए गए?<br /></strong>ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म में सैनिकों के पास पवित्र अवशेष ले जाने की परंपरा नई नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि डोंस्कोय की मध्ययुगीन सैन्य विरासत यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में इन अवशेषों को एक खास महत्व देती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चैपनिन ने कहा कि डोंस्कोय को हमलावर के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि के रक्षक के तौर पर पेश किया जाता है। इससे इस ऐतिहासिक हस्ती को युद्ध के बारे में रूस के मौजूदा नैरेटिव से जोड़ा जा सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक विद्वान ने बताया कि वह खुद हमलावर नहीं थे, बल्कि मातृभूमि के रक्षक थे। सरकार के नज़रिए से यह दिखाना बहुत जरूरी है कि रूस हमलावर नहीं है, बल्कि हम अपने इलाके की रक्षा कर रहे हैं। चैपनिन ने रूस के मध्ययुगीन अतीत और मौजूदा युद्ध के बीच के इस संबंध को लोगों को एकजुट करने वाली एक कहानी बताया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>क्रेमलिन से चर्च तक: युद्ध के समय में नजदीकी रिश्ता<br /></strong>धार्मिक अवशेषों का यह इस्तेमाल ऐसे समय में हो रहा है जब 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े हमले के बाद से क्रेमलिन और रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च के बीच संबंध और गहरे हुए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चर्च ने रूस के सैन्य नजरिए का समर्थन करने के लिए बार-बार धार्मिक भाषा का इस्तेमाल किया है। अगस्त में डोंस्कोय के अवशेषों के मिलने को रूस के राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व ने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस खोज को बिल्कुल अनोखा और शानदार बताया, जबकि पैट्रियार्क किरिल ने इसे ईश्वर की इच्छा का एक खास संकेत कहा। इन अवशेषों को मॉस्को में भी दिखाया गया, जहां डोंस्कोय के अवशेषों से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सैनिक इस बारे में क्या सोचते हैं?<br /></strong>मोर्चे पर तैनात सैनिकों के लिए धार्मिक प्रतीकों का मतलब जरूरी नहीं कि वही हो। कुछ रूसी सैनिकों का कहना है कि जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ रहा है, आस्था और महत्वपूर्ण हो गई है। एक पूर्व रूसी सैनिक ने बताया कि मुश्किल पलों में सैनिक अक्सर ईश्वर की शरण लेते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि जब सब कुछ ठीक चल रहा होता है तो हममें से सभी ईश्वर से बात नहीं करते, लेकिन जब हालात बुरे होते हैं तो हर कोई ईश्वर से बात करता है। उन्होंने मोर्चे पर बने अस्थायी चर्चों, मिशन पर जाने से पहले सैनिकों की प्रार्थना और सैन्य इकाइयों व अस्पतालों में पादरियों के दौरे का जिक्र किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने एक लोकप्रिय रूसी कहावत का हवाला देते हुए कहा कि जैसे फील्ड किचन होता है, वैसे ही हर जगह एक पादरी होना चाहिए, हम रूसी हैं। ईश्वर हमारे साथ है।</p>
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