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	<title>बड़ी खबर &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
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	<title>बड़ी खबर &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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		<title>असम में अंबुबाची मेला की तैयारी तेज, कामाख्या मंदिर में 22 जून से शुरू होगा चार दिवसीय उत्सव</title>
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		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 10:38:44 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[कामाख्या मंदिर]]></category>
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<p>पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक अंबुबाची मेला 2026 के लिए असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुवाहाटी की ऐतिहासिक नीलाचल पहाड़ी पर स्थित माँ कामाख्या मंदिर में इस वर्ष देश-विदेश से 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं, साधु-संतों और तांत्रिक साधकों के जुटने की &#8230;</p>
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<p>पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक अंबुबाची मेला 2026 के लिए असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुवाहाटी की ऐतिहासिक नीलाचल पहाड़ी पर स्थित माँ कामाख्या मंदिर में इस वर्ष देश-विदेश से 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं, साधु-संतों और तांत्रिक साधकों के जुटने की उम्मीद है।</p>



<p>देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र और स्त्री शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय उत्सव 22 जून को &#8216;प्रवृत्ति&#8217; के साथ शुरू होगा और 26 जून को &#8216;निवृत्ति&#8217; के साथ समाप्त होगा। इस दौरान तीन दिनों तक मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रहेंगे और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य और भोजन के विशेष प्रबंध किए गए हैं।</p>



<p>असम की पर्यटन मंत्री अजंता नियोग ने मेले की व्यवस्था को लेकर कहा, &#8220;यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक अंबुबाची मेला है। भारत और विदेश से लाखों लोग यहां आते हैं। हम श्रद्धालुओं को पीने का पानी, भोजन, चिकित्सा सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर तरह से तैयार हैं। हमने निचले स्थानों पर शिविर और भोजन की व्यवस्था की है।</p>



<p>लगभग 8 लाख लोगों के आने की उम्मीद है, इसलिए इस आयोजन का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। हम श्रद्धालुओं से अनुरोध करते हैं कि वे मेले के दौरान सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक कामाख्या मंदिर अवश्य आएं।&#8221;</p>



<p><strong>असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की<br /></strong>मेले के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा, परिवहन और आवास सुविधाओं के लिए 24 विभागों में 4.55 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। मंदिर अधिकारियों ने सभी ऑफलाइन विशेष दर्शन काउंटरों को भी बंद कर दिया है। विशेष दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पास बुक करना होगा, जबकि सामान्य दर्शन नि:शुल्क रहेंगे।</p>



<p><strong>अंबुबाची मेले का महत्व<br /></strong>मां कामाख्या मंदिर में साल में एक बार अंबुबाची मेला लगता है। । इस मेले से बहुत ही प्राचीन और गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि इस वार्षिक मेले के दौरान मां कामाख्या अपने मासिक धर्म यानी रजस्वला से गुजरती हैं। यही कारण है कि इस दौरान देवी मां को पूरा आराम दिया जाता है और मंदिर के मुख्य कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं।</p>



<p>इन तीन दिनों में मंदिर परिसर में किसी तरह की कोई पूजा-अर्चना, आरती या अन्य कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते। चौथे दिन, खास शुद्धिकरण अनुष्ठान करने के बादमंदिर के पट भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस साल अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून 2026 से हो रही है, जो 26 जून तक चलेगा।</p>
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		<title>ईरान के साथ शांति समझौते पर रिपब्लिकन पार्टी में दरार, ट्रंप समर्थकों ने भी खोला मोर्चा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:15:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[रिपब्लिकन पार्टी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1049" height="618" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-45.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-45.jpg 1049w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-45-768x452.jpg 768w" sizes="(max-width: 1049px) 100vw, 1049px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%88%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%aa/">ईरान के साथ शांति समझौते पर रिपब्लिकन पार्टी में दरार, ट्रंप समर्थकों ने भी खोला मोर्चा</a></p>
<p>ईरान के साथ हुए समझौते को आलोचकों द्वारा कमजोर और आत्मसमर्पण करार दिए जाने के बाद चौतरफा घिरे राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि वह तेहरान के सामने झुक गए हैं या उसे भारी वित्तीय राहत सौंपने जा रहे हैं। &#8230;</p>
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<p>ईरान के साथ हुए समझौते को आलोचकों द्वारा कमजोर और आत्मसमर्पण करार दिए जाने के बाद चौतरफा घिरे राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया कि वह तेहरान के सामने झुक गए हैं या उसे भारी वित्तीय राहत सौंपने जा रहे हैं।</p>



<p>ट्रंप ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, &#8220;हम किसी बेबसी में नहीं मिले थे, बल्कि ईरान हताश था। वे पूरी तरह खत्म हो चुके हैं! हम 60 दिनों की इस अवधि को देखेंगे। उन्हें कोई पैसा नहीं मिल रहा, 10 सेंट भी नहीं!&#8221;</p>



<p>जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद वर्साय में ट्रंप द्वारा दूरस्थ रूप से हस्ताक्षरित इस प्रारंभिक समझौते का उद्देश्य एक व्यापक शांति की दिशा में 60 दिनों की तेज गति से काम शुरू करना था। इसके विपरीत, इस कदम ने देश के भीतर एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।</p>



<p><strong>रिपब्लिकन खेमे में दरार<br /></strong>रिपब्लिकन सीनेटर बिल कैसिडी उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अपनी पार्टी के रुख से अलग हटकर इस समझौते की तीखी आलोचना की है। उन्होंने इसे दशकों की सबसे खराब विदेश नीति की भूल करार दिया है।</p>



<p>दूसरी ओर, लेट-नाइट कॉमेडियन्स और सोशल मीडिया ट्रोल्स के लिए यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जो इस समझौते की तुलना युद्ध जीतने और उसकी रसीद खो देने से कर रहे हैं। हालांकि इस उपहास का बड़ा हिस्सा राजनीतिक है, लेकिन व्हाइट हाउस के लिए सबसे गंभीर समस्या यह है कि अब आलोचना सिर्फ डेमोक्रेट्स तक ही सीमित नहीं रह गई है।</p>



<p>ट्रंप ने खुद भी ऐसे बयान देकर अपनी मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिसने अमेरिका के इजरायल-समर्थक गुटों को हैरान कर दिया है। उन्होंने ईरान के कुछ बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता रखने के अधिकार का समर्थन किया और ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार के महत्व को कम करके आंका।</p>



<p>अमेरिकी राष्ट्रपति अब अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के नागरिक परमाणु कार्यक्रम के अधिकार को भी स्वीकार कर रहे हैं, जो उनके पुराने वादे से बिल्कुल उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका यूरेनियम के किसी भी संवर्धन की अनुमति नहीं देगा। हालांकि, वह अब भी इस बात पर अड़े हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।</p>



<p><strong>ओबामा बनाम ट्रंप नीति पर विशेषज्ञों ने घेरा<br /></strong>हालांकि, ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह समझौता एक मास्टरस्ट्रोक है और बराक ओबामा के 2015 के जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन(JCPOA) से कहीं बेहतर है, लेकिन नीति विशेषज्ञ इस दावे को चुनौती दे रहे हैं।</p>



<p>विशेषज्ञों का कहना है कि जहां ओबामा का समझौता कई सौ पन्नों का एक बेहद विस्तृत और तकनीकी दस्तावेज था, वहीं ट्रंप का यह महज डेढ़ पन्ने का अधूरा मसौदा केवल एक हाथ मिलाने के बदले तेहरान को सब कुछ सौंप देता है।</p>



<p>इस स्थिति के कारण अब कैपिटल हिल के सांसद खुलकर बगावत पर उतर आए हैं, जिनमें कई ऐसे रिपब्लिकन वफादार भी शामिल हैं जो आमतौर पर ट्रंप की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं।</p>



<p><strong>पाकिस्तान को पछाड़ कतर बना नया बिचौलिया<br /></strong>इस बीच, वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा स्थगित होने से मध्यस्थता करने वाले देशों का क्षेत्रीय समीकरण पूरी तरह बदल गया है। पाकिस्तान, जिसने खुद को मुख्य राजनयिक मध्यस्थ के रूप में स्थापित किया था और अप्रैल में आमने-सामने की वार्ताओं की गर्व से मेजबानी की थी, अचानक खुद को इस रेस से बाहर पा रहा है।</p>



<p>इस्लामाबाद के अधिकारी इस उम्मीद में थे कि वे अमेरिका और ईरान के बीच इस ऐतिहासिक समझौते को अमली जामा पहनाकर एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक जीत हासिल करेंगे। लेकिन कतर के अचानक एक अमीर और पसंदीदा मध्यस्थ के रूप में उभरने से पाकिस्तान की स्थिति बेहद असहज हो गई है। वह अब उस शादी के मेहमान जैसा दिख रहा है जिसे ऐन वक्त पर पता चला कि शादी का वेन्यू ही बदल गया है।</p>



<p><strong>मागा गठबंधन में फूट<br /></strong>इस समझौते का असली नुकसान मागा गठबंधन की आंतरिक शांति को हुआ है। एक तीखे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वेंस ने कूटनीतिक शालीनता को छोड़ सीधे यरुशलम पर हमला बोला। उन्होंने इजरायली अधिकारियों को दोटूक शब्दों में कहा कि वे जागें और जमीनी हकीकत को समझें। इसके साथ ही उन्होंने इजरायली कैबिनेट को याद दिलाया कि उनके दो-तिहाई रक्षा हथियारों का खर्च अमेरिकी टैक्सपेयर्स उठाते हैं।</p>



<p>वेंस ने गुस्से में कहा कि अगर मैं इजरायल सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं पूरी दुनिया में बचे अपने इकलौते शक्तिशाली सहयोगी पर इस तरह हमला नहीं कर रहा होता।</p>



<p>यह सार्वजनिक टकराव मागा व्हाइट हाउस और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संबंधों में आई अचानक गिरावट को उजागर करता है। देश में आगामी चुनावों का सामना कर रहे इजरायली पीएम ने दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना को हटाने से साफ इनकार कर दिया है, जो एक तरह से ट्रंप के युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज करना है। इस अभूतपूर्व दरार ने अमेरिका-इजरायल संबंधों को एक बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण मोड़ पर खड़ा कर दिया है।</p>
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		<title>भारत में मिला सोने का नया भंडार, 4 ठिकानों से निकलेगा हजारों करोड़ का गोल्ड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 10:09:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[भारतीय बाजार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1088" height="624" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-44.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-44.jpg 1088w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-44-768x440.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1088px) 100vw, 1088px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad/">भारत में मिला सोने का नया भंडार, 4 ठिकानों से निकलेगा हजारों करोड़ का गोल्ड</a></p>
<p>भारत में सोने के प्रति लोगों की दीवानगी जगजाहिर है, लेकिन अब इस दीवानगी को घरेलू स्तर पर एक बहुत बड़ी मजबूती मिलने वाली है। देश के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है, जहां के कुरनूल जिले में करीब 50 टन सोने के विशाल भंडार का पता चला है। &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1088" height="624" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-44.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-44.jpg 1088w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/4-44-768x440.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1088px) 100vw, 1088px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad/">भारत में मिला सोने का नया भंडार, 4 ठिकानों से निकलेगा हजारों करोड़ का गोल्ड</a></p>

<p>भारत में सोने के प्रति लोगों की दीवानगी जगजाहिर है, लेकिन अब इस दीवानगी को घरेलू स्तर पर एक बहुत बड़ी मजबूती मिलने वाली है। देश के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश से एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है, जहां के कुरनूल जिले में करीब 50 टन सोने के विशाल भंडार का पता चला है।</p>



<p>अधिकारियों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक खोज के बाद आंध्र प्रदेश आने वाले कुछ ही सालों में देश के भीतर सोने का सबसे बड़ा उत्पादक और सप्लायर बनकर उभर सकता है। इस भंडार से न केवल घरेलू स्तर पर सोने के उत्पादन में भारी तेजी आएगी, बल्कि विदेशों से होने वाले महंगे गोल्ड इम्पोर्ट पर भारत की निर्भरता भी काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।</p>



<p><strong>खनन के लिए अन्य संभावित क्षेत्रों की भी हुई पहचान<br /></strong>आंध्र प्रदेश के माइंस विभाग के प्रधान सचिव मुकेश कुमार मीणा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बड़ी कामयाबी की आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने बताया कि विभाग ने केवल जोन्नागिरी ही नहीं, बल्कि राज्य में सोने के खनन के लिए चार और संभावित स्थलों को चिन्हित किया है। इन जगहों में रामागिरी, जव्वकुला और चिगुरुकुंटा बिस्नाटम जैसी साइट्स शामिल हैं।</p>



<p>हालांकि, इन सभी में जोन्नागिरी सबसे प्रमुख है, जहां अकेले ही 50 टन सोना मौजूद होने का मजबूत अनुमान जताया गया है। राज्य सरकार अब इन खनिज-समृद्ध इलाकों में आगे की खोज और उनके व्यापक विकास के लिए एक बड़ी कार्ययोजना तैयार कर रही है।</p>



<p><strong>जोन्नागिरी में खजाने की खोज का पूरा गणित<br /></strong>इस खजाने के कमर्शियल प्रोडक्शन की तैयारियों पर बात करते हुए अधिकारियों ने बताया कि कुरनूल के जोन्नागिरी गांव में लगभग एक दशक पहले ही सोने के खनन के लिए 1,500 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। हालांकि, शुरुआती दौर में केवल 500 एकड़ क्षेत्र में ही खोज कार्य किया जा सका था, जहां लगभग 13 टन सोना मिलने की संभावना जताई गई थी।</p>



<p>अब बची हुई 1,000 एकड़ जमीन पर भी जल्द ही नए सिरे से खोज का काम शुरू किया जाएगा। इस पूरे बेल्ट को मिलाकर कुल रिजर्व 50 टन के पार जाने की उम्मीद है। इस पूरी महत्वाकांक्षी परियोजना को गति देने के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इसी महीने के अंत में आधिकारिक रूप से जोन्नागिरी गोल्ड माइनिंग के काम की शुरुआत करेंगे।</p>



<p><strong>हजारों करोड़ रुपये आंकी गई इस सोने की कीमत<br /></strong>भारतीय बाजार के मौजूदा समीकरणों के लिहाज से देखें तो जोन्नागिरी में मिले इस 50 टन सोने के भंडार की अनुमानित कीमत करीब 7,500 करोड़ रुपये से लेकर 9,000 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है।</p>



<p>चूंकि सराफा बाजार में सोने के भाव रोजाना अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से बदलते रहते हैं, इसलिए इस खजाने की अंतिम वैल्यूएशन में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बहरहाल, इतनी बड़ी मात्रा में सोने की उपलब्धता देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार के परिदृश्य को बदलने की ताकत रखती है।</p>



<p><strong>एक टन मलबे से महज एक ग्राम सोना<br /></strong>धरती के सीने से सोना निकालना दिखने में जितना आकर्षक लगता है, हकीकत में यह प्रक्रिया उतनी ही जटिल और खर्चीली है। मुकेश कुमार मीणा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि गोल्ड माइनिंग के लिए भारी-भरकम पूंजी निवेश के साथ-साथ बेहद खास तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि सरकार ने पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के जरिए निजी कंपनियों को इस काम की कमान सौंपने का फैसला किया है।</p>



<p>उन्होंने एक तकनीकी पहलू साझा करते हुए बताया कि हाल के वर्षों में खनन के दौरान प्रति टन मलबे से सोना निकलने की दर (यील्ड) में काफी कमी आई है। आज के समय में एक टन माइनिंग मटेरियल की प्रोसेसिंग करने के बाद केवल एक ग्राम शुद्ध सोना हाथ आता है, जबकि पहले यह मात्रा प्रति टन तीन ग्राम हुआ करती थी। उन्होंने साफ किया कि यदि यह दर 0.8 ग्राम से कम हो जाए, तो खनन करना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन जाता है।</p>



<p><strong>भारत की सोने की भूख<br /></strong>भारत में हर साल लगभग 800 टन सोने की भारी-भरकम खपत होती है, लेकिन इसके मुकाबले हमारा घरेलू उत्पादन न के बराबर है। साल 2000 में कर्नाटक की मशहूर कोलार गोल्ड फील्ड्स के बंद होने के बाद से भारत का घरेलू उत्पादन लगातार गर्त में गया है।</p>



<p>वर्तमान समय में कर्नाटक की सरकारी हुट्टी गोल्ड माइन्स ही देश की एकमात्र बड़ी और सक्रिय सोने की खदान बची है, जिससे सालाना महज 1.5 टन सोने का उत्पादन हो पाता है।</p>



<p>ऐसे में अपनी बेहिसाब मांग को पूरा करने के लिए भारत को पूरी तरह विदेशी आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। आंध्र प्रदेश की यह नई खोज इस मोर्चे पर देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है।</p>
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		<title>पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मुर्मू को 68वें जन्मदिन पर दीं शुभकामनाएं</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 07:21:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
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<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जन्मदिन पर शनिवार को उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि साहस, सादगी, विनम्रता तथा जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से भरी उनकी जीवन यात्रा देशभर के लोगों को प्रेरित करती है। भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति मुर्मू शनिवार को 68 वर्ष की हो गईं। मोदी ने &#8230;</p>
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<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जन्मदिन पर शनिवार को उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि साहस, सादगी, विनम्रता तथा जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से भरी उनकी जीवन यात्रा देशभर के लोगों को प्रेरित करती है। भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति मुर्मू शनिवार को 68 वर्ष की हो गईं।</p>



<p>मोदी ने सोशल मीडिया मंच &#8216;एक्स&#8217; पर एक पोस्ट में कहा, &#8221;भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। साहस, सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से भरी उनकी जीवन यात्रा देशभर के लोगों को प्रेरित करती है।&#8221; प्रधानमंत्री ने कहा कि मुर्मू ने सार्वजनिक जीवन में अपने कई वर्षों के दौरान राष्ट्र की उत्कृष्ट तरीके से सेवा की है और वह वंचित एवं हाशिये पर रह रहे लोगों के कल्याण के लिए विशेष रूप से समर्पित रही हैं।</p>



<p>मोदी ने कहा कि भारत के विकास के प्रति मुर्मू का दृढ़ समर्पण बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा, &#8221;मैं कामना करता हूं कि राष्ट्र की सेवा के लिए उन्हें लंबा और स्वस्थ जीवन मिले। मैं आज ओडिशा में आयोजित कार्यक्रम में उनसे मिलने को लेकर उत्साहित हूं।&#8221;</p>
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		<title>भारत के बिमल पटेल संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल के जज चुने गए</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:54:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[बिमल पटेल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="1038" height="613" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/2-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/2-21.jpg 1038w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/2-21-768x454.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1038px) 100vw, 1038px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4/">भारत के बिमल पटेल संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल के जज चुने गए</a></p>
<p>भारत के जाने-माने कानून विशेषज्ञ बिमल पटेल को इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फर द ला आफ द सी का जज चुना गया है। वह वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग के सदस्य हैं। वह ‘स्टेट रिस्पांसिबिलिटी’ से संबंधित उत्तराधिकार पर कार्य समूह के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर &#8230;</p>
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<p>भारत के जाने-माने कानून विशेषज्ञ बिमल पटेल को इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फर द ला आफ द सी का जज चुना गया है। वह वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग के सदस्य हैं।</p>



<p>वह ‘स्टेट रिस्पांसिबिलिटी’ से संबंधित उत्तराधिकार पर कार्य समूह के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर भी हैं। वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय से भी जुड़े रहे हैं।</p>



<p><strong>अक्टूबर में संभालेंगे अपना पद<br /></strong>पटेल इस साल एक अक्टूबर को ट्रिब्यूनल में अपना पद संभालेंगे। यह ट्रिब्यूनल एक खास वैश्विक कोर्ट के तौर पर काम करता है, जो दुनिया के महासागरों, उनके इस्तेमाल और संसाधनों के शांतिपूर्ण और कानूनी नियमन को सुनिश्चित करता है।</p>



<p><strong>जयशंकर ने दी बधाई<br /></strong>इस मौके पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पद के लिए चुने जाने पर पटेल को बधाई दी है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने गुरुवार को कहा कि आज न्यूयार्क में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फार द ला आफ द सी का जज चुने जाने पर प्रो. डा. बिमल एन. पटेल को बधाई। उनका चुना जाना बहुपक्षवाद और ला आफ द सी के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है। मिशन ने सभी सदस्य देशों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।</p>



<p><strong>निभा चुके हैं कई सारी भूमिकाएं<br /></strong>बता दें कि अपने तीन दशक से अधिक के करियर में उन्होंने कई भूमिकाएं निभाई हैं, जैसे कि गुजरात नेशनल ला यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और भारत के 21वें ला कमीशन के सदस्य। उन्होंने कई भूमिकाएं निभाई हैं, जैसे कि गुजरात नेशनल ला यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और भारत के 21वें ला कमीशन के सदस्य। उन्होंने यूनाइटेड नेशंस आफ यूथ और हेग में आर्गनाइजेशन फार द प्रोहिबिशन आफ केमिकल वेपंस जैसे वैश्विक संगठनों के साथ 15 साल तक काम किया है।</p>



<p><strong>संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र : </strong>भारत के जाने-माने कानून विशेषज्ञ बिमल पटेल को इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फर द ला आफ द सी का जज चुना गया है। वह वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग के सदस्य हैं। वह ‘स्टेट रिस्पांसिबिलिटी’ से संबंधित उत्तराधिकार पर कार्य समूह के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति एवं सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर भी हैं। वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय से भी जुड़े रहे हैं। पटेल इस साल एक अक्टूबर को ट्रिब्यूनल में अपना पद संभालेंगे।</p>



<p>यह ट्रिब्यूनल एक खास वैश्विक कोर्ट के तौर पर काम करता है, जो दुनिया के महासागरों, उनके इस्तेमाल और संसाधनों के शांतिपूर्ण और कानूनी नियमन को सुनिश्चित करता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पद के लिए चुने जाने पर पटेल को बधाई दी है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने गुरुवार को कहा, &#8220;आज न्यूयार्क में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फार द ला आफ द सी का जज चुने जाने पर प्रो. डा. बिमल एन. पटेल को बधाई। उनका चुना जाना बहुपक्षवाद और ला आफ द सी के प्रति भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है।&#8221; मिशन ने सभी सदस्य देशों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।अपने तीन दशक से अधिक के करियर में उन्होंने कई भूमिकाएं निभाई हैं, जैसे कि गुजरात नेशनल ला यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और भारत के 21वें ला कमीशन के सदस्य।</p>
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