BJP का यूपी में 74 सीटें और 50 प्रतिशत वोट का लक्ष्य

लखनऊ। भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए संगठन में तेजी से बदलाव हो रहा है। सभी जिलों में नए प्रभारी बनाये जाने के बाद पार्टी अब सभी 80 लोकसभा क्षेत्रों में प्रभारी नियुक्त करेगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने प्रभारियों की तैनाती के लिए होमवर्क शुरू कर दिया है। इसके लिए संगठन से लेकर राज्यसभा, विधान परिषद और विधानसभा सदस्यों को भी जिम्मेदारी सौंपने की योजना है।BJP का यूपी में 74 सीटें और 50 प्रतिशत वोट का लक्ष्य

भाजपा के लिए 2014 के चुनाव में दिल्ली में सरकार बनाने में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा सहयोगी बना। यहां 80 सीटों में 71 भाजपा और दो सीटें सहयोगी अपना दल को मिली थीं। पिछली चार और पांच जुलाई को काशी से लेकर ब्रज क्षेत्र तक चुनावी मुहिम शुरू कर गए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं के लिए 74 सीटें और हर बूथ पर 50 फीसद से ज्यादा वोट हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री संगठन इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी सेना सजा रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों की शुरुआत हो गयी है।

प्रदेश के सभी जिलों में नए प्रभारी घोषित करने के बाद अब सांगठनिक लिहाज से लोकसभावार प्रभारियों की तैनाती होगी। प्रभारियों की तैनाती के पीछे मंशा यह है कि हर लोकसभा में समन्वय बना रहे। इन प्रभारियों पर बूथ स्तर तक 50 फीसद से ज्यादा वोट हासिल करने के लिए सांगठनिक सक्रियता की जिम्मेदारी होगी। जिलों में लगाये गए पूर्णकालिक विस्तारकों के अनुभवों को साझा करते हुए ये लोग एक्शन प्लान तैयार करेंगे और संगठन के साथ मिलकर क्रियान्वयन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

नए उम्मीदवारों का आकलन करेंगे प्रभारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा संगठन और सरकार की समन्वय बैठकों में मंथन के बाद इस वर्ष जनवरी माह में ही दो दर्जन से ज्यादा सांसद चिह्नित किये गए जिन्हें टिकट नहीं मिलना है। नेतृत्व की इस मंशा की भनक लगते ही कुछ सांसदों ने तो अपनी सक्रियता बढ़ा दी लेकिन, कई दूसरे दलों में भी ठिकाना ढूंढऩे में जुट गए। पार्टी नए उम्मीदवारों की जमीनी हकीकत जानने और उनके प्रभाव के आकलन के लिए भी प्रभारियों को जिम्मेदारी देगी। यह प्रक्रिया दो माह में पूरी कर लेंगे। ध्यान रहे कि पार्टी बुजुर्ग और बीमार सांसदों को भी इस बार चुनाव मैदान में लाने की पक्षधर नहीं है। उन्हें कहीं अन्यत्र समायोजित किया जाएगा।

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