दिल्ली में भाजपा नेताओं की आपसी में ही हो रही खींचतान, नसीहत भी हुई बेअसर

नई दिल्ली। दिल्ली में भाजपा नेताओं के बीच खींचतान इतनी बढ़ गई है कि उनके लिए केंद्रीय नेतृत्व की नसीहत व निर्देश के भी कोई मायने नहीं हैं। यही वजह है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश के बावजूद संगठन में खाली पड़े पद भरे नहीं जा सके हैं।अमित शाह ने लोकसभा चुनाव की तैयारी को धार देने के लिए 25 जुलाई तक दिल्ली में संगठन में खाली पड़े सभी पदों को भरने का निर्देश दिया था, लेकिन इस तारीख के बीतने के बाद भी न तो खाली पड़े पद भरे गए और न ही संगठन में कोई फेरबदल नजर आया।दिल्ली में भाजपा नेताओं की आपसी में ही हो रही खींचतान, नसीहत भी हुई बेअसर

भाजपा अध्यक्ष ने पिछले वर्ष जुलाई में भी दिल्ली प्रवास के दौरान एक महीने में संगठन में खाली पड़े पदों को भरने का निर्देश दिया था। एक वर्ष बाद जब उन्होंने पिछले महीने समीक्षा बैठक की तो बूथ से लेकर प्रदेश तक कई पद खाली थे। इसपर नाराजगी जताते हुए उन्होंने 25 जुलाई तक यह काम पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन यह समयसीमा भी निकल गई।

प्रदेश उपाध्यक्ष रहे कुलवंत सिंह बाठ के पार्टी छोड़कर शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने के कई माह बाद भी अबतक यह पद खाली है। इसी तरह से जिलों व मंडलों में भी कई पद रिक्त हैं। भाजपा के जो पदाधिकारी पार्षद बन चुके हैं, उनकी जगह संगठन में नए लोगों को लाया जाना है, लेकिन यह काम आसान नहीं है। पार्षद बने नेता संगठन में पद का मोह नहीं त्याग सके हैं और उनके दबाव के आगे प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व असहाय दिख रहा है।

इसी तरह से प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा और महिला मोर्चा के मुखिया को भी बदला नहीं जा सका है। प्रदेश के नेता तो दावा कर रहे हैं कि अब मात्र दस फीसद पद ही भरे जाने हैं, लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश में खाली पद भी अबतक नहीं भरे गए हैं। इसी तरह से एक व्यक्ति एक पद के नियम को लागू करने के नाम पर नई दिल्ली जिले से तीन नेताओं को हटाने की अनुमति प्रदेश नेतृत्व से मांगी गई थी, लेकिन इनकी जगह अबतक नए लोगों के नाम फाइनल नहीं हुए हैं।

दिल्ली में गुटबाजी खत्म करने की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी व प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन के साथ ही प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू की है, लेकिन वे असहाय नजर आते हैं। प्रदेश के नेता भी कहते हैं कि जाजू को नेताओं की गुटबाजी दूर कर सभी को एक साथ चलाने की भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन वह खुद इस लड़ाई में शामिल हो गए हैं। सतीश उपाध्याय के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान भी उनका प्रदेश संगठन के साथ तालमेल नहीं बैठ रहा था। अध्यक्ष बदलने के बाद भी यही स्थिति है। इसका सीधा असर संगठन के कामकाज पर पड़ रहा है।

राजेश भाटिया (महामंत्री, दिल्ली प्रदेश भाजपा) ने बताया कि संगठन में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। लगभग 90 फीसद पदों पर नियुक्तियां हो गई हैं। शेष दस फीसद पद भी आने वाले कुछ दिनों में भर दिए जाएंगे। पदों को लेकर पार्टी में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है।

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