नई दिल्ली । सीसीटीवी कैमरे के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का अपने मंत्रियों और आम आदमी पार्टी के विधायकों के साथ राजनिवास तक किए गए मार्च का भाजपा ने विरोध किया है। उसका कहना है कि आप सरकार सीसीटीवी कैमरे लगाने में भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान हटाने के लिए केंद्र और उपराज्यपाल को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।नई दिल्ली । सीसीटीवी कैमरे के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का अपने मंत्रियों और आम आदमी पार्टी के विधायकों के साथ राजनिवास तक किए गए मार्च का भाजपा ने विरोध किया है। उसका कहना है कि आप सरकार सीसीटीवी कैमरे लगाने में भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान हटाने के लिए केंद्र और उपराज्यपाल को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।  उपराज्यपाल को इसकी जांच करानी चाहिए जिससे कि भ्रष्टाचार के दोषियों को सजा मिल सके। दिल्ली विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सवा तीन साल बाद भी आप सरकार दस लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने का वादा पूरा नहीं कर सकी है।  कैमरे लगाने के टेंडर में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। इससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों व विधायकों के साथ राजनिवास तक मार्च निकाला। उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री व उनके मंत्रियों से बातचीत का प्रस्ताव दिया जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इससे साबित होता है कि वह सीसीटीवी कैमरे के मुद्दे का हल निकालने के बजाय इस पर राजनीति कर रहे हैं।  उन्होंने कहा कि इस योजना पर अक्टूबर 2015 में 130 करोड़ रुपये व्यय होने थे जो नवंबर 2018 में बढ़ाकर 571.4 करोड़ हो गया है। उपराज्यपाल को इसकी जांच करानी चाहिए। कैबिनेट अनुमोदन से पहले ही टेंडर कैसे मंजूर किया गया इसकी भी जांच होनी चाहिए।  सरकार को भी यह बताना चाहिए कि उसने इस मामले में उपराज्यपाल को विश्वास में क्यों नहीं लिया। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल द्वारा सीसीटीवी कैमरों के लिए बनाई गई कमेटी नागरिकों की सुरक्षा, निजता, कानून व व्यवस्था बनाए रखने हेतु निगरानी को ध्यान में रखेगी।   

उपराज्यपाल को इसकी जांच करानी चाहिए जिससे कि भ्रष्टाचार के दोषियों को सजा मिल सके। दिल्ली विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सवा तीन साल बाद भी आप सरकार दस लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने का वादा पूरा नहीं कर सकी है।

कैमरे लगाने के टेंडर में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। इससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों व विधायकों के साथ राजनिवास तक मार्च निकाला। उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री व उनके मंत्रियों से बातचीत का प्रस्ताव दिया जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। इससे साबित होता है कि वह सीसीटीवी कैमरे के मुद्दे का हल निकालने के बजाय इस पर राजनीति कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस योजना पर अक्टूबर 2015 में 130 करोड़ रुपये व्यय होने थे जो नवंबर 2018 में बढ़ाकर 571.4 करोड़ हो गया है। उपराज्यपाल को इसकी जांच करानी चाहिए। कैबिनेट अनुमोदन से पहले ही टेंडर कैसे मंजूर किया गया इसकी भी जांच होनी चाहिए।

सरकार को भी यह बताना चाहिए कि उसने इस मामले में उपराज्यपाल को विश्वास में क्यों नहीं लिया। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल द्वारा सीसीटीवी कैमरों के लिए बनाई गई कमेटी नागरिकों की सुरक्षा, निजता, कानून व व्यवस्था बनाए रखने हेतु निगरानी को ध्यान में रखेगी।