आधी आबादी को साधने में जुटी बीजेपी, ये है प्‍लान

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बिहार विधानसभा चुनाव में झटके खा चुकी भाजपा आम चुनाव से पहले हर मोर्चे संगठन को दुरुस्त कर लेना चाहती है। पार्टी का प्रदेश नेतृत्व मिशन-2019 की चुनौतियों को चिह्नित कर समाधान के प्रयासों में जुट गया है। चुनाव प्रक्रिया में भाजपा आधी आबादी को बड़ी जिम्मेदारी देने के मूड में है।

आधी आबादी को साधने में जुटी बीजेपी, ये है प्‍लान

बूथ अध्यक्षों, एजेंटों एवं बूथ प्रभारियों (त्रिबल) की बैठकों में भी मंडल एवं जिलास्तरीय नेताओं को सामाजिक समरसता के साथ-साथ आधी आबादी की भागीदारी बढ़ाने की घुट्टी भी पिलाई जा रही है। सामाजिक समीकरणों के आधार पर विस्तार की कवायद में जुटे राजद से मुकाबले के लिए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ऊपर से नीचे तक की सभी बैठकों में महिलाओं की एक तिहाई नुमाइंदगी सुनिश्चित करने के साथ-साथ सामाजिक भागीदारी को संतुलित करने पर जोर दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कई मंडलों की कार्यकारिणी पर अंगुलियां उठने लगी हैं। कार्यकारिणी में पार्टी संविधान की अनदेखी और महिलाओं को कम प्रतिनिधित्व देने की आवाज बुलंद हो रही हैं। पार्टी संविधान के अनुसार संगठन में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व देना अनिवार्य है, लेकिन मौजूदा समय में कई मंडलों की कार्यकारिणी में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। इसे पार्टी संविधान का उल्लंघन माना जा रहा है।

 बता दें कि पार्टी संगठन से लेकर सत्ता तक महिला सशक्तिकरण और सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित रही है। आधी आबादी को सशक्त एवं स्वावलंबी बनाने के लिए उनकी शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता एवं सशक्तिकरण पर जोर देने के चलते केंद्र व राज्य सरकारों की सराहना की जा रही है। ऐसे में भाजपा का प्रदेश नेतृत्व का भी मानना है कि महिलाओं के सशक्त हुए बिना कोई राष्ट्र व समाज विकास नहीं कर सकता है। इस दिशा में भाजपा की सरकार बेहतर काम कर रही है।

नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा उज्ज्वला योजना के जरिए बीपीएल परिवारों को मुफ्त में रसोई गैस कनेक्शन दिया जा रहा है। मुद्रा योजना के तहत सर्वाधिक जोर अनुसूचित समाज की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर है। बिहार में पहली बार राजग सरकार ने ही पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 फीसद आरक्षण देकर देश में इतिहास रचने का काम किया था। पार्टी नेतृत्व ने महिला कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि बूथों तक जाएं और जनता की समस्याओं से रू-ब-रू हों। उनकी अपेक्षाएं और परेशानियों को जानें। उस फीडबैक को सरकार तक पहुंचाएं और उनकी समस्याओं को दूर करने की दिशा में ठोस पहल करें।

 
 

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