BJP-कांग्रेस के चहेते रहे हैं एनएन वोहरा, फिर मिली जम्मू-कश्मीर की कमान

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जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद अब प्रदेश में राजनीतिक हालात उफान पर है. महबूबा मुफ्ती सरकार से बीजेपी का समर्थन वापस लेने के बाद राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया है और अब राज्य की कमान एनएन वोहरा के हाथ में है. आइए जानते हैं कौन हैं एनएन वोहरा…

एनएन वोहरा प्रदेश के राज्यपाल के रुप में करीब 10 साल से काम कर रहे हैं और माना जाता है कि उनकी सभी पक्षों में स्वीकार्यता भी है. अब केंद्र सरकार ने भी उनका कार्यकाल बढ़ा दिया है.

वोहरा ने पंजाब यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और वे साल 1959 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने आईएएस बनने से पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रवक्ता के तौर पर काम किया था.

2007 में पद्मविभूषण से सम्मानित वोहरा को प्रशासनिक सेवा का भी विस्तृत अनुभव है.

वे 1989 से 1990 तक केंद्र में रक्षा उत्पादन सचिव, 1990 से 1993 तक देश के रक्षा सचिव, 1993 से 1994 तक केंद्रीय गृह मंत्रालय में गृह सचिव रह चुके हैं.

सेवानिवृत्त होने के बाद भी वो देश सेवा के लिए काम कर रहे हैं. वे 1997 से 1998 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सचिव थे.

साल 2003 की बात है, जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें जम्मू-कश्मीर के विभिन्न पक्षकारों से बात करने के लिए अपना वार्ताकार नियुक्त किया था और उन्होंने इस दौरान काफी सराहनीय कार्य भी किया.

उस दौरान उन्होंने इस भूमिका में अलगाववादी संगठनों सहित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न पक्षकारों और चुने हुए प्रतिनिधियों को राज्य के विकास के लिए साझे मंच पर लाने की कोशिश की थी.

खास बात ये है कि उन पर दोनों पार्टियों ने विश्वास जताया है. इसका उदाहरण है कि साल 2004 में सरकार बदलने के बाद भी वे वार्ताकार बने रहे और 2008 में यूपीए सरकार ने ही उन्हें जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया.

इससे पहले भी वोहरा ने प्रदेश में 178 दिनों तक राज्यपाल शासन संभाला था. उस वक्त पीडीपी ने गुलाब नबी आजाद सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. उसके बाद 2015 में सरकार गठन ना होने पर भी उन्होंने 51 दिन तक प्रदेश की कमान संभाली थी.

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