इन महीने के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बिहार बोर्ड के मैट्रिक और इंटरमीडिएट के रिजल्ट आने की संभावना है. इस साल के रिजल्ट पिछले साल से बेहतर रहने की उम्मीद है. पिछले साल आए खराब रिजल्ट के कारण बिहार बोर्ड की खूब आलोचना हुई थी. इसके बाद से बोर्ड ने परीक्षा के पैटर्न और कॉपी जांच करने के तरीकों में व्यापक बदलाव किया है. इस संबंध में बिहार बोर्ड ने पिछले साल अक्टूबर में दिशानिर्देश जारी किए थे. उस वक्त बोर्ड ने कहा था कि बोर्ड ने 2018 में होने वाली मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा के पैटर्न में बदलाव करने का फैसला किया है. इसके तहत इस साल सभी थ्योरी पेपर में 50 फीसदी नंबर के सवाल ऑब्जेक्टिव थे.

दरअसल, बिहार बोर्ड परीक्षा कॉपी की लापरवाह तरीके से जांच को लेकर हमेशा से सवालों में घिरता रहा है. छात्र और अभिभावक हमेशा यह आरोप लगाते हैं कि बिहार बोर्ड की परीक्षा में पेपर कितना भी अच्छा क्यों न गया हो, बेहतर रिजल्ट की कोई गारंटी नहीं दे सकता. यह भी कहा जाता है कि कॉपी की जांच करने वाले टीचर अक्सर औसत मार्किंग करते हैं. इन्हीं आरोपों के बाद बोर्ड ने परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया है.

सीबीएसई की तर्ज पर पेपर की जांच 

बिहार बोर्ड ने मैट्रिक और इंटरमीडिएटके परीक्षा पैटर्न में बदलाव किया है. ऐसा इसलिए किया गया सीबीएसई की तर्ज पर बोर्ड के छात्रों को भी अच्छे अंक मिल सके. पिछले साल इसके लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी. इसके बाद इस साल की परीक्षा में इस पैटर्न को लागू किया गया.

बेहद खराब था पिछले साल का रिजल्ट

पिछले साल इंटरमीडिएट का रिजल्ट बहुत खराब था. 65 फीसदी छात्र फेल हो गए थे. मैट्रिक में भी ग्रेस देने के बाद 50 फीसदी छात्र ही पास हो सके थे. इसके बाद स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जाने लगे थे. बिहार बोर्ड की मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा में करीब 30 लाख छात्र हुए थे.

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50 फीसदी ऑब्जेक्टिव सवाल
इस साल की मैट्रिक और इंटरमीडिएटकी परीक्षा में 50 फीसदी ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे गए थे. इसके तहत 100 नंबर वाले पेपर के साथ 70 अंक वाले प्रैक्टिकल सब्जेक्ट भी शामिल थे. मैट्रिक में ऑब्जेक्टिव सवालों के उत्तर ओएमआर पर देने थे. पिछले साल 40 फीसदी ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे गए थे. इसे बढ़ाकर इस साल 50 फीसदी कर दिया गया. इसके अलावा दो-दो नंबर के लघु और पांच-पांच नंबर के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे गए थे. बोर्ड ने इस साल मैट्रिक और इंटरमीडिएट के छात्रों को एक और राहत दी थी. हर सब्जेक्ट में ‘अथवा’ वाले प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी गई थी. इससे छात्रों के जवाब देने में आसानी होती है.

पास परसेंटेज बढ़ाने के लिए हुआ बदलाव 

मैट्रिक और इंटर के परीक्षा पैटर्न में बदलाव के पीछे समिति का मकसद पास परसेंटेज बढ़ाना और हाई मार्क्स देना था. अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया था कि ऑब्जेक्टिव प्रश्नों की संख्या अधिक रहेगी तो पास परसेंटेज बढ़ेगा. इसके अलावा छात्रों को मार्क्स भी अधिक मिलेंगे.

सबडिविजन स्तर पर प्रैक्टिकल केंद्र 

समिति ने इसी साल से इंटर और मैट्रिक दोनों में ही प्रैक्टिकल परीक्षा का होम सेंटर समाप्त कर दिया है. अब प्रैक्टिकल के लिए अनुमंडल स्तर पर ऐसे स्कूलों का चयन किया गया जहां साइंस लैब की व्यवस्था थी.

ये है परीक्षा के पैटर्न

100 नंबर वाले सब्जेक्ट का पेपर
– 50 प्रश्न एक-एक नंबर के
– 15 प्रश्न दो-दो नंबर के
– 04 प्रश्न पांच-पांच नंबर के

70 नंबर वाले सब्जेक का पेपर
– 35 प्रश्न एक-एक नंबर के
– 10 प्रश्न दो-दो नंबर के
– 03 प्रश्न पांच-पांच नंबर के