दिल्ली की सियासत में बिहार और यूपी की धमक, पुरबिया वोटरों के बीच पैठ बढ़ाएगी भाजपा

नई दिल्ली। दिल्ली की सियासत में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों की बढ़ रही धमक को कोई भी पार्टी नजरअंदाज नहीं कर सकती है। भाजपा को भी लगता है कि इनके समर्थन के बिना दिल्ली की सत्ता हासिल नहीं हो सकती है। इसलिए पार्टी इन्हें अपने साथ जोड़ने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। इनके बीच नेताओं की सक्रियता बढ़ाई गई है। वहीं, अब इन्हें लेकर शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी है। इसके लिए रामलीला मैदान में दिल्ली सरकार के खिलाफ बड़ी रैली की जाएगी जिसकी जिम्मेदारी प्रदेश भाजपा पूर्वांचल मोर्चा को दी गई है।दिल्ली की सियासत में बिहार और यूपी की धमक, पुरबिया वोटरों के बीच पैठ बढ़ाएगी भाजपा

चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता

दिल्ली में लगभग 35 फीसद मतदाता बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं जो कि दिल्ली की सियासत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। संख्या बल के आधार पर किसी भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए प्रत्येक सियासी पार्टी इन्हें अपने साथ जोड़ना चाहती है। परंपरागत रूप से ये कांग्रेस के समर्थक माने जाते रहे हैं जो कि आम आदमी पार्टी (आप) के उदय के बाद उसके साथ चले गए। इनका समर्थन हासिल करना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है।

भाजपा ने मनोज तिवारी को बनाया चेहरा 

भाजपा ने इन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए मनोज तिवारी को दिल्ली में अपना चेहरा बनाया है। निगम चुनाव में इसका फायदा भी मिला। संवेदनात्मक रूप से भी पूर्व के लोगों को अपने साथ जोड़ने की कवायद की जा रही है। छठ पर्व व मकर संक्रांति पर कार्यक्रम आयोजित करने के साथ ही पिछले महीने वीर कुंवर सिंह की जयंती पर भी कार्यक्रम किया गया था।

पूर्वांचल के लोगों की अच्छी खासी आबादी है

मकर संक्रांति में पहली बार दिल्ली प्रदेश भाजपा पूर्वांचल मोर्चा की ओर से तालकटोरा स्टेडियम में बड़े स्तर पर कार्यक्रम हुआ था। वहीं, अब झुग्गी बस्तियों और अनधिकृत कॉलोनियों में पूर्वांचल के लोगों की अच्छी खासी आबादी है जहां पार्टी ने अपनी गतिविधि बढ़ाई है। उनकी समस्याओं के लिए पूर्व की कांग्रेस और वर्तमान की आम आदमी पार्टी (आप) को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

रैली में एक लाख से ज्यादा लोग शामिल होंगे

पूर्वांचल मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष सिंह का कहना है कि कांग्रेस व ‘आप’ ने पूर्वांचलवासियों को गुमराह किया है। केजरीवाल ने इन्हें गुमराह कर सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन इनकी समस्याएं दूर नहीं कीं। इसलिए पूर्वांचल के लोग रामलीला मैदान में इकट्ठे होकर दिल्ली सरकार के प्रति अपना रोष व्यक्त करेंगे। सितंबर महीने में प्रस्तावित इस रैली में एक लाख से ज्यादा लोग शामिल होंगे। पार्टी के कई बड़े नेता रैली को संबोधित करेंगे। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। मंडल स्तर पर बैठकें की जा रही हैं।

चुनाव में मिलेगा लाभ 

इस रैली के माध्यम से भाजपा विपक्षी पार्टियों को यह दिखाने की भी कोशिश करेगी कि पूर्वांचल के लोग अब उसके साथ हैैं। इसका लाभ पार्टी को अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव में भी मिलेगा। 

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