स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा: 85 साल से ज्यादा जीते हैं ऐसी सोच वाले लोग लेकिन…

इंसान की सकारात्मक सोच न सिर्फ उसे प्रगतिशील बनाती है, बल्कि उम्र भी बढ़ाती है. ‘दि बॉस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन’ ने बताया कि आखिर कैसे हमारा पॉजिटिव मेंटल एटिट्यूट लंबी उम्र से जुड़ा हुआ है. एक्सपर्ट्स का दावा है कि सकारात्मक सोच के साथ जीने वाले लोगों की आयु 85 वर्ष से ज्यादा होती है.

डॉ. लेविना ने express.co.uk से कहा, ‘इस बात के साक्ष्य मौजूद हैं कि आशावादी सोच इंसान की जीवन रेखा को लंबा कर सकती है. ऐसी ही एक स्टडी में 69,744 महिलाओं और 1,429 पुरुषों को शामिल किया गया था, जिन्होंने अपनी पॉजिटिव सोच, ओवरऑल हेल्थ और आदतों के स्तर का आकलन करने के लिए सर्वेक्षण को पूरा किया था.’

इसमें महिलाओं की हेल्थ और सोचने के तरीकों को 10 साल तक मॉनिटर किया गया. जबकि पुरुषों की सेहत, आदत और सोचने के तरीकों को 30 साल तक फॉलो किया गया. आशावादी सोच के प्रारंभिक स्तर पर स्टडी में पाया गया कि खुशमिजाज़ लोगों की आयु सामान्य से औसतन 15 प्रतिशत ज्यादा होती है.

स्टडी के मुताबिक, बहुत ज्यादा पॉजिटिव एटिट्यूट के साथ जीवन जीने वाले 70 प्रतिशत लोगों के 85 साल से भी ज्यादा जीने की प्रबल संभावना होती है. उम्र, शैक्षणिक योग्यता, क्रॉनिक डिसीज, डिप्रेशन, एल्कोहल का सेवन, एक्सरसाइज, डाइट और प्राइमरी केयर विजिट को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं.

क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर ली ने इस विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘पहले भी कई स्टडीज ने समय से पहले मौत होने के जोखिम कारकों की पहचान की है.’ उन्होंने कहा कि ये काफी दिलचस्प है कि साधारण तकनीक और थैरेपी का इस्तेमाल करके इंसान की सोच को मोडीफाई किया जा सकता है.

स्टडी में बतौर सहायक शोधकर्ता के रूप में जुड़ीं डॉ. लौरा कुबजान्स्की ने बताया कि आखिर कैसे आशावादी लोग डेली अपनी लाइफ में भावनाओं और व्यवहार को रेगुलेट करने में सक्षम होते हैं. खुशमिजाज़ लोगों की सेहतमंद आदतों को भी इसमें जोड़ा गया है, जैसे नियमित रूप से एक्सरसाइज करना और कम धूम्रपान करना.

कैसे रहें खुश– नेशनल हेल्थ सर्वे (NHS) ने रोजमर्रा की जिंदगी में खुश रहने और खुद में पॉजिटिव एटिट्यूट पैदा करने के छह टिप्स साझा किए हैं. स्ट्रेस लेवल को कम कर आप अपनी डे-टू-डे लाइफ को ज्यादा बेहतर और खुशहाल बना सकते हैं. एक्सरसाइज के जरिए भी स्ट्रेस लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है.

इसके अलावा, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और टाइम मैनेजमेंट स्ट्रेटजी के सहारे भी आप तनावमुक्त रह सकते हैं. भावनात्मक रूप से खुश रहने के लिए वो सब करिए जो करने में आपको सबसे ज्यादा आनंद आता है.

दोस्तों से मिलिए, बारिश में नहाइए या कोई स्पोर्ट्स देखिए और खेलिए. हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करिए और अपने अंदर छिपी फीलिंग्स को किसी के साथ साझा करें. खान-पान का स्तर अच्छा रखिए और पर्याप्त नींद लेने का प्रयास करिए.

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