बड़ा खुलासा: दो अधिकारियों की मिलीभगत से 2011 से चल रहा था PNB में फर्जीवाड़ा

देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पीएनबी में 114 अरब रुपये का घोटाला सामने आया है। पीएनबी का आरोप है कि अरबपति ज्वेलरी डिजाइनर नीरव मोदी ने बैंक की मुंबई स्थित एक शाखा से फर्जी तरीके से शपथ पत्र हासिल कर अन्य भारतीय बैंकों से विदेशों में पैसा ले लिया।

बड़ा खुलासा: दो अधिकारियों की मिलीभगत से 2011 से चल रहा था PNB में फर्जीवाड़ादेश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला कहे जा रहे इस मामले में पीएनबी ने दस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और सीबीआई से शिकायत की है। खुलासे के बाद बुधवार को पीएनबी के शेयरों में करीब दस फीसदी की गिरावट आई, जिससे निवेशकों के 4000 करोड़ रुपये डूब गए।

2011 से चल रहा था फर्जीवाड़ा
सूत्रों के मुताबिक यह फर्जीवाड़ा 2011 से चल रहा था और इसमें बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता थी। पीएनबी ने एक बयान में कहा है कि मुंबई स्थित उसकी एक ब्रांच में फर्जी तरीके से ट्रांजेक्शन कर कुछ खाताधारकों को लाभ पहुंचाया गया।

नीरव मोदी के भाई निशाल, पत्नी एमी और मेहुल चीनभाई चोकसी की ओर से किए इन ट्रांजेक्शन के आधार पर आरोपियों ने विदेश में अन्य भारतीय बैंकों से लोन हासिल कर लिया। चोकसी ज्वेलरी चेन गीतांजलि के मालिक हैं।

मोदी पर 10 दिन पहले ही पीएनबी ने 280 करोड़ रुपये की घोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है। इसमें बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। सीबीआई इसकी जांच कर रही है। मोदी के अलावा इसमें उसके भाई निशाल, पत्नी और पार्टनर चोकसी को भी आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई अधिकारियों ने पीएनबी से मिली ताजा शिकायतों के आधार पर भावी कार्रवाई को लेकर कोई भी ब्यौरा नहीं दिया लेकिन इतना जरूर बताया कि शिकायतों की जांच के बाद नीरव मोदी एवं ज्वेलरी कंपनी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसे देश का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला कहा जा रहा है। इससे पहले सत्यम कंप्यूटर्स के मामले 9000 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था।
हांगकांग से मदद मांगेंगे आरबीआई और सेबी

रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सेबी पीएनबी में सामने आए 11400 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में हांगकांग के अपने समकक्ष से मदद मांगेंगे। आरबीआई हांगकांग मॉनेटरी अथॉरिटी और सेबी सिक्योरिटीज एंड फ्यूचर कमीशन से जल्द संपर्क साधेंगे।

इन पर भी नजर
सूत्रों ने बताया कि दक्षिण अफ्रीकी समूह के साथ कारोबार करने वाले बैंक शाखाएं भी जांच के दायरे में हैं।

आर्थिक मामलों के सचिव बोले, अन्य बैंकों पर नहीं पड़ेगा असर
आर्थिक मामलों के सचिव राजीव कुमार ने कहा कि पीएनबी का अलग मामला है और इसका अन्य बैंकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सक्रियता दिखाते हुए वित्त मंत्रालय ने इस मामले पर बैंकों को सीबीआई और ईडी को रिपोर्ट देने को कहा है ताकि तेजी से कार्रवाई की जा सके।

यह जांच क्लीन अप ड्राइव का हिस्सा है जिसे वर्ष 2015 में एसेट क्वालिटी रिव्यू के साथ शुरू किया गया था। इस मुहिम के जरिए बैंकों को हमेशा के लिए क्लीन जिम्मेदार और ईमानदार कर्जदाताओं के लिए परेशानी मुक्त बैंकिंग उपलब्ध कराना मकसद है।

क्या है लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग
लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग सुविधा पत्र है। इसे एक बैंक अन्य बैंकों की शाखाओं को जारी करता है। इस आधार पर विदेशी शाखाएं कर्जदाता को पैसा देती हैं। विदेशी बैंक शाखाएं भी जांच के घेरे में हैं।

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