बार काउंसिल ने की जस्टिस चेलमेश्वर के बयान की निंदा, कहा…

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने सेवानिवृत्त जस्टिस जे चेलमेश्वर के मीडिया को दिए गए उनके विवादास्पद और बेतुके बयानों को लेकर निंदा की। बीसीआई ने कहा कि ऐसे बयानों को वकीलों द्वारा बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। बार काउंसिल ने की जस्टिस चेलमेश्वर के बयान की निंदा, कहा...

जस्टिस चेलमेश्वर 22 जून को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति नहीं करने पर केंद्र सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई थी और इसे कहीं नहीं ठहरने वाली कार्रवाई बताया था। जस्टिस चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य वरिष्ठ जजों के साथ इस साल जनवरी में देश के चीफ जस्टिस के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केसों के आवंटन में भेदभाव का आरोप लगाया था। साथ ही जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि इससे सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता खतरे में पड़ गई है। 

बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने एक बयान में कहा कि महत्वपूर्ण पद पर रहे व्यक्ति से उम्मीद नहीं थी कि वह अपने पद की गरिमा के खिलाफ जाकर बात करें। बयान में कहा गया है कि लगता है, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा आत्मसंयम का सिद्धांत भुला दिया गया है। उन्हें ऐसे बयानों के नतीजों पर विचार किए बिना जारी करने से बचना चाहिए। जस्टिस चेलमेश्वर ने सेवानिवृत्त के बाद मीडिया में जैसे विवादास्पद और अप्रासंगिक बयान दिए हैं, उनसे इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बेंच फिक्सिंग जैसे विवादास्पद शब्द का प्रयोग किया है। कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जब कुछ वकीलों उनके और दूसरे न्यायाधीश के सामने दायर की और इसे सूचीबद्ध कराने की कोशिश की। 

बीसीआई ने आरोप लगाया कि जस्टिस चेलमेश्वर को उस वक्त ही आपत्ति उठानी चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। हकीकत में उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया और खुद मामले की सुनवाई के लिए सहमत हो गए जो एक गलत परंपरा की शुरुआत थी। बयान में कहा गया है कि जनवरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के तत्काल बाद सीपीआई नेता और राज्यसभा सांसद डी राजा से उनकी मुलाकात के रहस्य और उनके द्वारा दिए गए विवादास्पद बयानों के पीछे छिपी उनकी मंशा को जाहिर करता है। 

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