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बलरामजी दास टंडन का हुआ निधन, राजकीय सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार

चंडीगढ़। पंजाब में भाजपा का हिंदू चेहरा रहे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन को आज हजारों लाेगों ने अश्रुपूरित नेत्रों से अंतिम विदाई दी। उनके पार्थिव शरीर का चंडीगढ़ के सेक्‍टर 25 स्थित श्‍मशान में राजकीय सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार किया गया। अंतिम संस्‍कार के समय केंद्रीय गृ‍हमंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। मुखाग्नि उनके पुत्र संजय टंडन ने दिया।बलरामजी दास टंडन का हुआ निधन, राजकीय सम्‍मान के साथ अंतिम संस्‍कार

राजनाथ सिंह ने कहा कि बलरामजी दास टंडन मेरे बड़े भाई के समान थे। भाजपा ने एक बहुत बढ़िया सिपाही खोया है। उनका निधन पंजाब के लिए भी बड़ी क्षति है। बलरामजी दास टंडन का अंतिम संस्‍कार पूरे राजकीय सम्‍मान के साथ किया गया। अंतिम संस्‍कार के समय भाजपा के पंजाब के सभी वरिष्‍ठ नेता व अन्‍य दलों के नेता भी मौजूद थे। विभिन्‍न दलों के कार्यकर्ता भी भारी संख्‍या में मौजूद थे।

इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को चंडीगढ़ के सेक्‍टर 18 स्थिति आवास से सुबह पंजाब भाजपा कार्यालय में ले जाया गया। वहां विभिन्‍न दलाें के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। हिमाचल प्रदेश के राज्‍यपाल आचार्य देवव्रत, हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर, भाजपा के वरिष्‍ठ नेता शांता कुमार, भाजपा के पूर्व पंजाब प्रधान कमल शर्मा सहित पंजाब के कई नेताओं ने बलराम जी टंडन के पार्थिव शरीर पर पुष्‍पांजलि अर्पित की।

बलरामजी दास टंडन का निधन 14 अगस्‍त को निधन हो गया था। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर चंडीगढ़ उनके आवास पर लाया गया था। बलरामजी दास टंडन के पुत्र संजय टंडन चंडीगढ़ भाजपा के अध्‍यक्ष हैं। उनका पार्थिव शरीर मंगलवार देर रात छत्तीसगढ़ से चंडीगढ़ सेक्टर 18 में कोठी नंबर 1636 में लाया गया। पंजाब और हरियाणा सरकार ने शोक स्वरूप राजभवन में होने वाले एट होम प्रोग्राम को रद कर दिया।

उनके निधन के शोके में बुधवार को स्वाधीनता दिवस प्रोग्राम के दौरान होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रशासन ने रद कर दिए। टंडन को श्रद्धांजलि देने के लिए भाजपा कार्यालय में लोगों का तांता लगा हुआ है। बलरामजी दास टंडन का पार्थिव शरीर जब उनके निवास स्थान पर पहुंचा तो पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर एवं हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी वहां मौजूद थे।

टंडन का पार्थिव शरीर छत्तीसगढ़ से विशेष विमान के जरिए पहले अंबाला लाया गया। अंबाला में हरियाणा के मंत्री राव नरबीर सिंह तथा मनीष ग्रोवर अंबाला एयरपोर्ट पर मौजूद थे। अंबाला से सड़क मार्ग के द्वारा पार्थिव शरीर को चंडीगढ़ लाया गया।वीरवार को सुबह करीब साढ़े 10 बजे टंडन का पार्थिव शरीर सेक्‍टर 37 स्थित पंजाब भाजपा के कार्यालय लाया गया। पंजाब भाजपा के नेताओं के साथ अन्‍य दलों के नेता और कार्यकर्ता श्रद्धांजलि देने पहुंचे। भाजपा कार्यालय के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

छह बार विधायक रहे, बादल सरकार में भाजपा के कोटे से बने थे उपमुख्यमंत्री

 बलरामजी दास टंडन का पंजाब की राजनीति में अहम योगदान था। वह राज्‍य में पार्टी का हिंदू चेहरा थे। 1  नवंबर, 1927 को अमृतसर में जन्मे बलरामजी दास टंडन ने लाहौर से पढ़ाई की थी। वह जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे। वह पंजाब में छह बार विधायक भी रहे और प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्‍व वाली गठबंधन सरकार में भाजपा के कोटे से उप मुख्यमंत्री भी रहे। इमरजेंसी के दौरान साल 1975 से 1977 तक उन्होंने जेल भी काटी। पटियाला की राजपुरा सीट से जीतने के बाद पंजाब सरकार में मंत्री बने। साल 2014 में उन्होंने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल का ओहदा संभाला।

वारंट अफसर को जेल से लौटा दिया था

25 जून को जैसे ही इमरजेंसी का एलान हुआ तो पूरे देश में विरोधी पक्ष के नेताओं को गिरफ्तार किया जाने लगा। अमृतसर से बलरामजी दास टंडन और हरबंस लाल खन्ना समेत कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। टंडन को पटियाला जेल में रखा गया था। वहां अमृतसर से एक अफसर बेदी आए।

जेल अधिकारी ने बलरामजी दास टंडन समेत कुछ लोगों को अपने कमरे में बुलाया। जेल अधिकारी ने कहा कि आप सबके नजरबंदी के वारंट आए हैं, अपने-अपने वारंट पर हस्ताक्षर कर दो। सभी हस्ताक्षर करने को तैयार हो गए, लेकिन अचानक बलरामजी दास टंडन ने अफसर से कहा, ‘आप हमें कहां मिल रहे हो?

सवाल सुन कर अफसर हैरान हुआ और कहा, ‘मैं समझा नहीं, तो बलरामजी दास ने कहा, ‘बेदी साहब यह वारंट लेकर आप हमें घर पर मिल रहे हो या अमृतसर के माल रोड पर या गोल बाग में मिल रहे हो।’ पुलिस अफ़सर ने कहा, ‘जेल में मिल रहा हूं।’

इस पर बलरामजी टंडन ने कहा, ‘यह वारंट ठीक नहीं है, क्योंकि इस वारंट पर लिखा है कि इस व्यक्ति की गतिविधियां कानून की नजर में ठीक नहीं हैं इसलिए इसको गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए, लेकिन हम तो पहले से ही गिरफ्तार हैं और जेल में हैं। यह वारंट गलत है हम इस पर दस्तखत नहीं कर सकते।’ जेल अफसर ने भी बात जायज ठहराई और अफसर वारंट लेकर वापस लौट गया।

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