आम्रपाली ने फ्लैट बायर्स को यूं दिया धोखा, 2700 करोड़ दूसरी कंपनियों किये ट्रांसफर

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देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी रही आम्रपाली ने अपनी लंबित परियोजनाएं पूरा करने के बजाय 2700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसी दूसरी कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दिए थे. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी से पांच दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है. शीर्ष अदालत ने कहा कि आम्रपाली यह बताए कि आखिर क्यों और किस परिस्थिति में इतनी बड़ी रकम दूसरे के खाते में ट्रांसफर की गई. सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया है कि कंपनी ने उसके समक्ष दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि 2766 करोड़ रुपये दो अन्य कंपनियों को हस्तांतरित किए गए थे.

कोर्ट ने कहा है कि कंपनी ने स्थिति को जटिल बना दिया है और इसका हल करने की जरूरत है ताकि परेशान 43 हजार से अधिक घर खरीदारों को राहत मिल सके. कर्ज का भुगतान नहीं करने के कारण कंपनी कर्जदाता बैंकों द्वारा शुरू की दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रही है. न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने कहा कि कंपनी को स्पष्ट करना होगा कि किन प्रावधानों के तहत एक परियोजना के पैसे दूसरी कंपनियों को हस्तांतरित किए गए.

सुलझ जाती समस्याएं

पीठ ने कहा, ‘आपको हर एक मामले के बारे में बताना होगा जब पैसा कंपनी से अन्य परियोजनाओं में हस्तांतरित किया गया. लेनदेन की प्रकृति क्या थी? क्या वह उधार था या लोन या भुगतान था, हम हर जानकारी चाहते हैं.’ घर खरीदारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजीत सिन्हा ने कंपनी द्वारा दायर हलफनामे से जिक्र किया कि 2766 करोड़ रूपए दो कंपनियों को हस्तांतरित किए गए. उन्होंने कहा कि कंपनी के पास कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि क्यों यह राशि स्थानांतरित की गई. उन्होंने कहा कि अगर यह राशि उपलब्ध होती तो घर खरीदारों की कई समस्याएं सुलझ जातीं.

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जवाब नहीं दे पाई कंपनी

इससे पहले फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजीत सिन्हा ने कहा कि आम्रपाली के हलफनामे में 2766 करोड़ रुपये दो कंपनियों के खाते में ट्रांसफर करने की बात थी. उन्होंने कहा कि आम्रपाली के पास इस बात का कोई जवाब नहीं कि आखिर फंड ट्रांसफर क्यों किए गए. उन्होंने कहा कि अगर यह धन उपलब्ध हो जाए तो फ्लैट खरीदारों की दिक्कतें दूर हो जाएंगी. उन्होंने अदालत से अपील की कि जेपी, यूनिटेक की तर्ज पर आम्रपाली को भी 500 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया जाए. इस पर पीठ ने आम्रपाली की ओर से पेश वकील ने इसको लेकर सवाल किए. लेकिन वह संतोषजनक नहीं दे पाए. पीठ ने आम्रपाली से कहा कि आप चीजों को कैसे ठीक करते हैं यह आपको तय करना है.

 
 
 

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