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अमित शाह पहुंचे चंडीगढ़ में बादल के घर, मिशन 2019 के तहत बैठक शुरू

चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चंडीगढ़ के दौरे पर पहुंच गए हैं। उनका पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की कोठी पर पूर्व उपमुख्‍यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने स्‍वागत किया। वह 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शिरोमणि अकाली दल के सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल के साथ बैठक कर रहे हैं। बैठक शुरू हो गए हैं और इसमें सुखबीर सिंह बादल भी मौजूद हैं। बैठक में भाजपा के प्रदेश प्रधान श्‍वेत मलिक और अन्‍य नेता भी मौजूद हैं।

अमित शाह पहुंचे चंडीगढ़ में बादल के घर, मिशन 2019 के तहत बैठक शुरू

वह पंजाब में भाजपा के विस्तार का रास्ता भी तलाशेंगे। दोनों नेता 2019 लोकसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करेंगे। यह पहला बड़ा मौका है, जब दोनों दलों के नेताओं की आमने-सामने इस तरह मुलाकात हो रही है। इसके साथ अमित शाह अपने समर्थन के लिए संपर्क के तहत मशहूर खिलाडी मिल्‍खा सिंह और बलबीर सिंह से भी मुलाकात करेंगे।

अमित शाह के आगमन के मद्देनजर सुरक्षा के कड़़े इंतजाम किए गए हैं। प्रकाश सिंह बादल की कोठी के पास पुलिस का घेरा मजबूत कर दिया गया है। अमित शाह की आगवानी के लिए पूरी तैयारी की गई है। उनको आज दिन में 12 बजे आना था, लेकिन अभी उनका इंतजार किया जा रहा है। बादल के निवास पर अमित शाह के पहुंचने से पहले  पंजाब भाजपा के प्रधान श्वेत मलिक भी पहुंचे हैं और उनका इंतजार कर रहे हैं।

सुरक्षाकर्मी किसी भी नेता की गाड़ी को बादल के निवास के परिसर में नहीं जाने दे रहे हैं। बादल की कोठी के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने पंजाब भाजपा के पूर्व प्रधान व केंद्रीय राज्‍य मंत्री विजय सांपला व पूर्व मंत्री मदन मोहन मित्तल गाड़ियों को भी अंदर नहीं जाने दिया। काफी बहस के बाद दोनों नेता उतर कर बादल के निवास के अंदर गए पैदल गए। सुरक्षाकर्मियों ने भाजपा के महासचिव राकेश राठौर को अंदर नहीं जाने दिया। काफी बहसबाजी के बाद राठौर को बादल की कोठी से वापस जाना पड़ा।

यह बैठक एडीएन के घटक दलों से संपर्क के अमित शाह के अभियान का हिस्‍सा है। माना जा रहा है कि अमित श्‍ााह इस बैठक के जरिये पंजाब में गठबंधन के पेंच कसने के साथ भाजपा को मजबूत करने की दिशा में भी कदम बढ़ाएंगे। शिरोमणि अकाली दल एनडीए का सबसे पुराना साथी है। 1998 में जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार बनाने को लेकर दूसरी पार्टियों का समर्थन जुटा रहे थे, तो प्रकाश सिंह बादल ने सबसे पहले बिना शर्त भाजपा को समर्थन दिया था।

यही नहीं अकाली-भाजपा गठबंधन में कभी कोई खटास नहीं देखने को मिली। पंजाब में दोनों दलों ने मिलकर अभी तक तीन कार्यकाल पूरे किए हैं। 2014 में भी अकाली दल के पास सीटें कम होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरसिमरत कौर बादल को कैबिनेट में लेकर अपने गठजोड़ साथी पर विश्वास जताया।

यह अलग बात है कि दोनों पार्टियों के प्रदेश स्तरीय नेतृत्व में खटपट लगी रहती है। इस दौरान अकाली दल और भाजपा के गठबंधन के खत्‍म होने की चर्चाएं भी चलीं। बताया जाता है कि अकाली दल पिछले चार साल से शीर्ष भाजपा नेतृत्व और केंद्र सरकार से सहयोग में कमी महसूस कर रहा था।

अब कर्नाटक में सरकार बनाने में नाकाम रहने के बाद जिस तरह से अमित शाह पुराने सहयोगियों को मनाने की राह पर चल पड़े हैं, उससे अकाली दल खुश है। पंजाब कांग्रेस की सरकार बनने और राज्‍य में हुए एक लाेकसभा सीट व एक विधानसभा सीट पर हार के बाद भाजपा-श्‍ािअद गठबंधन के लिए चिंता पैदा हुई है। बैठक में इस पर भी चर्चा होने की संभावना है।

भाजपा लाेकसभा चुनाव के लिए तीन की जगह पांच सीटों की कर सकती है मांग

प्रकाश सिंह बादल के साथ बैठक के बाद अमित शाह भाजपा के सभी लोकसभा प्रभारियों व कोर ग्रुप के साथ बैठक करेंगे। इसमें पार्टी का प्रदेश नेतृत्व तीन की बजाय पांच सीटों की अकाली दल से मांग कर सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी श्री आनंदपुर साहिब और लुधियाना सीटें अकाली दल से लेना चाहिए। पंजाब भाजपा के नेताआें का कहना है कि दोनों ही सीटें हिंदू प्रभाव वाली हैं। लुधियाना सीट वैसे भी अकाली दल पिछले दो बार से लगातार हार रहा है, ऐसे में यह सीट भाजपा को देकर एक बार नया प्रयोग किया जा सकता है।

संपर्क फॉर समर्थन

इस अभियान को अमित शाह चंडीगढ़ में भी बढ़ाएंगे। इस अभियान के तहत वह देशभर में बड़ी हस्तियों से मिल रहे हैं। चंडीगढ़ में वह पूर्व एथलीट मिल्‍खा सिंह और पूर्व ओलंपियन बलबीर सिंह से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों के माध्यम से पार्टी नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाना चाहती है। इसके अलावा वह शहर के व्यापारियों व अन्य प्रतिष्ठित लोगों से मिलेंगे।

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