अमरिंदर कांग्रेस के नाराज विधायकों को शीघ्र देंगे पद बनाएंगे निगम और बोर्डों के चेयरमैन

चंडीगढ़। मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह कैबिनेट विस्‍तार में जगह नहीं मिलने से नाराज कांग्रेस विधायकाें को मनाने में जुट गए हैं और जल्‍द ही उनकी नाराजगी दूर कर दी जाएगी। इन विधायकों को उनके कद के हिसाब से बोर्ड-कारपोरेशन में एडजस्ट किया जाएगा। विधायकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है, इसलिए सरकार अब इस मामले में ज्यादा देर नहीं करेगी।अमरिंदर कांग्रेस के नाराज विधायकों को शीघ्र देंगे पद बनाएंगे निगम और बोर्डों के चेयरमैन

कैबिनेट विस्तार के बाद से मुख्य रूप से कांग्रेस के सामने राजकुमार वेरका, संगत सिंह गिलजियां, सुरजीत धीमान जैसे विधायकों ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। हाल ही में छह बार के विधायक राकेश पांडे, अमरीक ढिल्लों व रणदीप नाभा ने विधानसभा की कमेटियों से इस्तीफा देकर सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।

अमरिंदर सरकार भी विधायकों की नाराजगी को समझ रही है लेकिन उसके पास बोर्ड-कारपोरेशन के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया है। कैबिनेट का पूरा विस्तार हो चुका है और वर्तमान स्थिति में इसमें फेरबदल की कोई संभावना भी नहीं है। जानकारी के अनुसार नाराज विधायकों की मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ मुलाकात भी हो चुकी है। कैबिनेट में वाल्मीकि बिरादरी को प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण राजकुमार वेरका को सीवरेज बोर्ड का चेयरमैन बनाना जा सकता है। बाकी विधायकों को भी बड़े बोर्ड व कारपोरेशन में एडजस्ट करने की योजना है।

मुख्यमंत्री के करीबी सूत्र बताते हैं कि शाहकोट सीट के उपचुनाव के बाद बोर्ड-कारपोरेशनमें इन नाराज विधायकों को एडजस्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चेयरमैन लगाने से पहले नाराज विधायकों को विश्वास में जरूर लिया जाएगा ताकि बाद में किसी प्रकार का विवाद न पैदा हो।

अपने फैसले से पीछे हटेंगे कैप्टन अमरिंदर

विधायकों को एडजस्ट करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को अपने ही फैसले से पीछे हटना होगा। कैप्टन ने चुनाव पूर्व कहा था कि बोर्ड-कारपोरेशन में किसी विधायक को एडजस्ट नहीं किया जाएगा। बोर्ड-कारपोरेशन की चेयरमैनशिप उन्हें ही दी जाएगी जो स्वेच्छा से पार्टी प्रत्याशी के हक में मैदान से हट जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने यह फैसला उस समय लिया था जब बड़ी संख्या में बागी चुनाव मैदान में अपने ही प्रत्याशियों के सामने अड़ गए थे। कैप्टन के इस फैसले के बाद कई बागी प्रत्याशी इसलिए चुनाव मैदान से हट गए थे कि उन्हें बाद में बोर्ड-कारपोरेशन में एडजस्ट किया जाएगा। अब स्थिति बदल गई है। सरकार के सामने सबसे बड़ी समस्या नाराज विधायकों को लेकर आ गई है और सबसे पहले उन्हें ही एडजस्ट किया जाएगा। उसके बाद ही अन्य नेताओं को वरिष्ठता के हिसाब से एडजस्ट किया जाएगा।

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