रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिये भारत-रूस-चीन के बीच करार

नई दिल्ली: भारत देश के लिए भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिये “नॉन-क्रिटिकल” श्रेणी में निर्माण और स्थापना कार्य में भाग ले सकती हैं. रूस की परमाणु ऊर्जा एजेंसी रॉसएटम ने गुरुवार को यह जानकारी दी. तीसरे देश में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिये भारत-रूस के बीच हुये सौदे के तहत रूपपुर परियोजना पहली पहल है.रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिये भारत-रूस-चीन के बीच करार

इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को धमकी देते हुए गुरुवार को हथियारों को लेकर एक बड़ा खुलासा भी किया. लॉ मेकर्स की सालाना बैठक में पुतिन चेताते हुए कहा कि रूस या उसके साझीदार देश पर हमला हुआ तो रूस किसी भी किस्म के परमाणु हमले को अंजाम देने से नहीं चूकेगा. उन्होंने कहा कि रूस कोल्ड वॉर स्टाइल में युद्ध करेगा.

यह पहली बार है कि जब भारतीय कंपनियां पहली बार विदेश में परमाणु ऊर्जा परियोजना में भाग लेंगी. भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य नहीं है, इसलिए सीधे तौर पर किसी भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण में शामिल नहीं हो सकता है. रूसी एजेंसी के मुताबिक, भारतीय कंपनियों को रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिये “नॉन-क्रिटिकल” श्रेणी में निर्माण और स्थापना कार्य की अनुमति देने के लिये भारत, बांग्लादेश और रूस से गुरुवार को करार किया.

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