Home > Mainslide > आखिर क्यों तेल की बढ़ती कीमतों पर सरकार ने साधी चुप्पी

आखिर क्यों तेल की बढ़ती कीमतों पर सरकार ने साधी चुप्पी

दो दिवसीय समीक्षा बैठक में सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी के आंकड़ों से संतुष्ट नजर आई, लेकिन पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत पर कोई चर्चा नहीं हुई। बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि पेट्रोल-डीजल के दामों पर चर्चा हुई भी या नहीं। आखिर क्यों तेल की बढ़ती कीमतों पर सरकार ने साधी चुप्पी

वित्त मंत्री ने इतना ही कहा कि आज की बैठक वित्त मंत्रालय के विभिन्न विभागों की आंतरिक समीक्षा को लेकर थी। समीक्षा बैठक से उम्मीद की जा रही थी कि सरकार उपभोक्ताओं को राहत दिलाने के लिए पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करने का एलान करेगी लेकिन प्रति लीटर एक रुपये उत्पाद शुल्क कटौती से सरकार 14,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान नहीं कराना चाहती। सरकार के इस रुख से समझा जा रहा है कि वह एक साथ दो-दो मोर्चे पर सरकारी खजाने पर बोझ नहीं बढ़ाना चाहती है। रुपये का अवमूल्यन और कच्चे तेल के मूल्य में वृद्धि से वैसे ही खजाने पर बोझ बढ़ रहा है।

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर संग्रह और वृहद आर्थिक सूचकों की स्थिति का जायजा लिया। बैठक के बाद वित्त मंत्री ने विश्वास जताया कि विकास दर अनुमान से अधिक रहेगा जबकि पूंजीगत व्यय का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की हिस्सेदारी बेचकर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाया जाएगा। 

3.3 फीसदी बना रहेगा वित्तीय घाटे का लक्ष्य

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार कर संग्रह में जबर्दस्त वृद्धि और लक्ष्य से अधिक विनिवेश को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है इसलिए वित्तीय घाटे को जीडीपी के 3.3 फीसदी तक ही सीमित रखने का मन बना चुकी है। दो दिवसीय  सरकार को पूरा भरोसा है कि 2018-19 के बजट के लिए अनुमानित 7.2 से 7.5 फीसदी विकास दर भी अधिक रहेगी।

तीन घंटे की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आयकर संग्रह में जबर्दस्त वृद्धि हुई है और उम्मीद है कि यह वृद्धि बजटीय लक्ष्य से अधिक रहेगी। उन्होंने कहा कि महंगाई बहुत हद तक नियंत्रण में है। चालू वित्त वर्ष के लिए बजट खर्च का 44 फीसदी खर्च किया जा चुका है और सरकार इसमें कटौती किए बिना 31 मार्च 2019 तक पूरी राशि खर्च करेगी। उच्च विकास दर के लिए बजट आवंटन की 100 फीसदी राशि को खर्च करना जरूरी है। 

कालेधन विरोधी मुहिम, नोटबंदी व जीएसटी से बढ़ा कर संग्रह

राजस्व संग्रह के बारे में उन्होंने कहा कि कालेधन के खिलाफ मुहिम, नोटबंदी और जीएसटी का प्रभाव अब कर संग्रह में वृद्धि के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को पूरा भरोसा है कि इस वर्ष कर संग्रह बजटीय लक्ष्य से कहीं ज्यादा होगा। अप्रत्यक्ष कर के बारे में उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भी व्यवस्थित हो चुका है और आने वाले महीनों में जीएसटी संग्रह भी रफ्तार पकड़ने लगेगा।

अर्थव्यवस्था और वृहद आर्थिक आंकड़ों से पीएम संतुष्ट 
शनिवार की बैठक में आर्थिक मामलों, राजस्व, व्यय एवं विनिवेश विभागों ने विस्तृत ब्योरा पेश किया। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था और वृहद आर्थिक आंकड़ों से संतुष्टि जताई। राजस्व विभाग ने बताया कि सरकार ने बजट में चालू वित्त वर्ष के दौरान प्रत्यक्ष कर संग्रह 11.5 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा था, जबकि अभी से हम इस लक्ष्य को पार कर चुके हैं। आगामी माह में जीएसटी संग्रह से हमारा अप्रत्यक्ष कर संग्रह भी बढ़ेगा। 

Loading...

Check Also

फेस्टिव सीजन के बाद ग्राहक के लिए आई बुरी खबर, इन कंपनियां बढ़ाये अपने उत्पादों के दाम

फेस्टिव सीजन के बाद ग्राहक के लिए आई बुरी खबर, इन कंपनियां बढ़ाये अपने उत्पादों के दाम

फेस्टिव सीजन के समय अगर आपने टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे बढ़े उत्पाद नहीं …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com