हिंदू धर्म में बीमारी के अनुसार पहनें रुद्राक्ष, मिलेगा अद्भुत फायदा

हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को पवित्र माना गया है। रुद्राक्ष का संबंध भगवान शिव से होने के कारण यह हमारी आस्था और विश्वास का प्रतीक भी है। रुद्राक्ष धारण करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और सारे संकटों से रक्षा होती है, वहीं अल्टरनेटिव थैरेपी में भी इन दिनों रुद्राक्ष थैरेपी बहुत लोकप्रिय हो रही है। कारण इसका तीव्र असरकारक होना। शरीर की ऐसी कोई बीमारी नहीं जिसका उपचार रुद्राक्ष के जरिए ना किया जा सके। रुद्राक्ष थैरेपी दो तरह से की जाती है, आंतरिक और बाह्य। बाह्य थैरपी के तहत रुद्राक्ष की माला, बेसलेट, पेंडेंट आदि पहनने की सलाह दी जाती है, जबकि आंतरिक थैरेपी में रुद्राक्ष को दूध में उबालकर पिलाया जाता है.

रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक प्रमुख होते हैं। इनके अलावा भी कई तरह के विशेष रुद्राक्ष पाए जाते हैं। अलग-अलग बीमारियों पर अलग-अलग मुखीरुद्राक्ष का प्रयोग किया जाता हैआइए जानते हैं किस रुद्राक्ष से कौन-सी बामारी ठीक होती है .. एक मुखी रुद्राक्ष दुर्लभ होता है। यह बहुत कम पाया जाता है और इसकी कीमत भी अधिक होती है। इसीलिए कई लोग नकली एक मुखी रुद्राक्ष बनाकर ऊंचे दामों पर बेचते हैं। एक मुखी रुद्राक्ष खरीदते समय असली-नकली का पता लगाने के बाद ही खरीदें। एक मुखी रुद्राक्ष मुख्यत: हृदय संबंधी रोगों पर असर करता है। यह शरीर में रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से करने की व्यवस्था करता है। दो मुखी रुद्राक्ष का संबंध पेट के रोगों से है। गैस प्रॉब्लम, एसिडिटी में दोमुखी रुद्राक्ष असरकारक है। साथ ही यह तनाव और अवसाद दूर करने में चमत्कारिक रूप से असर करता है। हिस्टीरिया की बीमारी को कंट्रोल करने में भी यह रुद्राक्ष प्रभावी है। 

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तीन मुखी रुद्राक्ष जिन बच्चों को बार-बार बुखार आता हो उन्हें तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है। लिवर और गाल ब्लेडर की समस्या, तनाव-अवसाद दूर करने में भी तीन मुखी रुद्राक्ष असरकारक है। इस रुद्राक्ष से ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है। चार मुखी रुद्राक्ष किडनी की समस्या वालों को जरूर धारण करना चाहिए। थायराइड, मस्तिष्क से संबंधित रोग, मानसिक बीमारी, मनोरोग, कमजोर याददाश्त और हकलाकर बोलने जैसी समस्याओं में चार मुखी रुद्राक्ष काफी फायदा पहुंचाता है।

लिवर और गाल ब्लेडर की बड़ी समस्याओं के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करवाया जाता है। यह ब्लड प्रेशर को भी बहुत अच्छे तरीके से कंट्रोल करता है। गला, गर्दन, किडनी, यौन रोग, जलोदर, यूरिन इंफेक्शन, आंखों की समस्या और अपच की समस्या में छह मुखी रुद्राक्ष असरकारक है। सात मुखी रुद्राक्ष धारण तनाव और अवसाद हो तो सात मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। खासकर प्रोफेशनल और वे युवा जो कॉरपोरेट जगत में अपना नाम करना चाहते हैं, लेकिन अत्यधिक तनाव और प्रेशर में काम करने के कारण अपना आउटपुट नहीं दे पाते तो उन्हें सात मुखी रुद्राक्ष से काफी लाभ होता है।

अनिद्रा की समस्या होना, देर रात तक नींद न आती हो, मन में घबराहट हो और नींद की कमी के कारण अन्य समस्या होने लगे तो ऐसे लोगों को आठ मुखी रुद्राक्ष पहनने की सलाह दी जाती है। शरीर में दर्द रहता हो। जोड़ों में अक्सर दर्द होता हो। पीठ में, कमर में लगातार दर्द बना हुआ है तो नौ मुखी रुद्राक्ष दर्द निवारक का काम करता है। इससे पहनने से और इसका पानी पीने से दर्द में आराम मिलता है। वैसे तो सभी तरह के रूद्राक्ष की तासीर गर्म होती है, लेकिन दस मुखी रूद्राक्ष में कुछ ज्यादा ही गर्माहट होती है। इसलिए इसे उन लोगों को धारण करने को कहा जाता है जो लंबे समय से सर्दी-खांसी से परेशान हैं।

शरीर दर्द, पीठ दर्द के अलावा प्री मैच्योर डिलेवरी से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को 11 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। अत्यधिक शराब पीने की लत छुड़ाने के लिए भी 11 मुखी रुद्राक्ष का प्रयोग किया जाता है। 12 मुखी रुद्राक्ष हृदय और रक्त संबंधी रोगों के उपचार में 12 मुखी रुद्राक्ष काफी कारगर है। सूखा रोग और ऑस्टियोपोरोसिस के रोगियों को भी 12 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। मांसपेशियों से संबंधित कोई रोग हो तो 13 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। तनाव और अवसाद दूर करने के लिए 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। इससे अनिद्रा की समस्या भी दूर होती है। 

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