PWD scam में फेल हुई ACB, एक्सपर्ट रिपोर्ट में खुली ये बड़ी पोल

नई दिल्ली। दिल्ली में सड़क व नाले के निर्माण कार्य में करोड़ों रुपये के घोटाले की शिकायत पर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने रेनू कंस्ट्रक्शन के मालिक सुरेंद्र बंसल व विनय बंसल (पिता-पुत्र) से जब पूछताछ की थी तो दोनों ने गुमराह करने की कोशिश की थी। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि रेनू कंस्ट्रक्शन में पिता-पुत्र की 50-50 फीसद की साझेदारी है। लेकिन, पूछताछ में दोनों हमेशा कंपनी का मालिक होने से इन्कार करते रहे। दोनों यह बताते रहे कि वे कंपनी के एक्टिव (सक्रिय) पार्टनर नहीं हैं। लेकिन, जांच में वे मालिक पाए गए। रिकार्ड में कई बिलों पर विनय के हस्ताक्षर मिले।PWD scam में फेल हुई ACB, एक्सपर्ट रिपोर्ट में खुली ये बड़ी पोल

कंपनी के कई पत्राचार में भी उनके हस्ताक्षर मिले। यही नहीं, ठेका लेने के लिए विभाग में जमा कराए गए कागजात में भी कंपनी के पार्टनर के तौर पर उनके ही हस्ताक्षर थे। एसीबी के अनुसार, सुरेंद्र बंसल की मृत्यु के बाद भी उनके बेटे विनय से जब पूछताछ हुई तो उन्होंने सहयोग नहीं किया।

जांच में पता चला कि वह पीडब्ल्यूडी के नियमित ठेकेदार हैं। एसीबी को जांच में विनय द्वारा लिखा गया एक पत्र भी हाथ लगा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उक्त टेंडर उनकी कंपनी को दे दिया जाए। उक्त निर्माण कार्य का अनुमानित बजट 4. 90 करोड़ रुपये से ज्यादा था। रेनू कंस्ट्रक्शन कंपनी ने जानबूझकर कीमत कम बता 2. 64 करोड़ रुपये में ठेका ले लिया था।

रिकार्ड में निर्माण कार्य के लिए सरिया महादेव इंपेक्स, सोनीपत से खरीदने की बात कही गई थी, जबकि एसीबी को जांच में इस नाम से सोनीपत में कोई कंपनी नहीं मिली। पीडब्ल्यूडी के पास रेनू कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा माल प्राप्ति की रसीद भी नहीं मिली। कंपनी ने जिन वाहनों से माल मंगवाया व साइटों पर पहुंचाया, एसीबी को उक्त वाहनों के नंबर भी नहीं मिले।

एसीबी अधिकारियों ने बताया कि सीपीडब्ल्यूडी (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग) द्वारा जांच कराने पर भी फर्जीवाड़े की बात सामने आई। निर्माण कार्य में किस सिमेंट का उपयोग किया गया रिकार्ड में उसका भी नाम नहीं मिला। इसके अलावा अन्य मैटेरियल के बारे में भी कंपनी एसीबी को कोई जानकारी नहीं दे पाई।

श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल रिसर्च द्वारा जांच कराने पर निर्माण सामग्री की गुणवलता में फर्जीवाड़ा सामने आया। ठेके के अनुबंध के मुताबिक, रेनू कंस्ट्रक्शन को 17 मार्च 2015 को काम शुरू करना था और 14 जुलाई 2015 तक काम पूरा करना था।

निर्धारित समय तक काम न कर पाने पर महीने के हिसाब से 20 फीसद जुर्माना भरने की बात थी। मगर, 23 नवंबर 2015 को काम पूरा करने पर भी कंपनी पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया। अनुबंध के अनुरूप काम न करने पर पीडब्ल्यूडी की इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस टीम ने जांच भी नहीं की। बाद में एक्सपर्ट की रिपोर्ट में बताया गया कि निर्माण कार्य में कई खामियां पाई गई।

एसीबी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने जानबूझकर रेनू कंस्ट्रक्शन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। कंपनी ने पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य में 3 करोड़ 10 लाख 9533 रुपये खर्च होने के बिल दिए जिसका भुगतान तुरंत कर दिया गया। इसी तरह अन्य दो कंपनियों के सहारे कुल दस करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया।

इन पर फर्जीवाड़े में सहयोग करने का आरोप एसीबी के मुताबिक, जांच में यह सामने आया कि फर्जीवाड़ा करने में पीडब्ल्यूडी के पीके कथूरिया (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर), सुरेश पाल (असिस्टेंट इंजीनियर), बलजीत सिंह (जूनियर इंजीनियर), आशुतोष सिंह (जूनियर इंजीनियर) ने विनय बंसल का सहयोग किया था।

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