पंजाब में नेताओं के इस्‍तीफों के भंवर में फंसी AAP पार्टी

चंडीगढ़। पंजाब में छह जिला प्रधानों सहित 16 नेताओं के इस्‍तीफा देने से आम आदमी पार्टी की ट्रेन डिरेल होती दिख रही है। आम आदमी पार्टी के नेता इस बात से भले ही लाख इन्कार करते रहें कि पार्टी में अंतर्कलह नहीं है, लेकिन हालात अलग ही नजर आ रही है। पार्टी में कलह चरम की ओर जाती दिख रही है।पंजाब में नेताओं के इस्‍तीफों के भंवर में फंसी AAP पार्टी

अंतर्कलह के चलते पार्टी में जारी रहेगा उठापटक का दौर

2014 के लोकसभा चुनाव में चार सीटें जीतने के बाद आप ने 2017 कि विधानसभा चुनाव में 100 से ज्यादा सीटें जीतने और सरकार बनाने का दावा किया था, लेकिन चुनाव नतीजों से उसे तगड़ा झटका लगा। विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी नेताओं का अंतर्कलह लगातार सामने आ रहा है और पार्टी को लगातार झटक लग रहे हैं। आज आप फिर से पंजाब में सियासी जमीन खोजने की जद्दोजहद में लगी है।

भगवंत मान की निष्क्रियता व सह प्रभारी के खिलाफ नाराजगी से बढ़ी परेशानी

आप के चार सांसदों में से दो इस समय पार्टी के साथ नहीं हैं। पटियाला के सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी और फतेहगढ़ साहिब के सांसद हरिंदर सिंह खालसा से पार्टी काफी पहले किनारा कर चुकी है। संगरूर के सांसद भगवंत मान ने भी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की ओर से पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से माफी मांगने के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, हालांकि पार्टी ने इसे स्वीकार नहीं किया। यानी चार सांसदों में से फरीदकोट के सांसद प्रोफेसर साधु सिंह ही हैं, जिन्होंने अभी कोई नाराजगी जाहिर नहीं की है।

वहीं, भगवंत मान के पंजाब की राजनीति से गायब होने के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई थी कि वह पार्टी छोड़ने वाले हैं। हालांकि, उन्होंने इससे साफ इन्कार किया। विधानसभा चुनाव के बाद से ही आम आदमी पार्टी का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। पार्टी के नए पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया भी हालात को सुधार करने में अब तक कामयाब होते नहीं नजर आ रहे हैं।

आप विधायक दल के नेता सुखपाल खैहरा के बगावती सुर

पंजाब विधानसभा चुनाव में नेता विपक्ष व आप के वरिष्ठ नेता सुखपाल सिंह खैहरा पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से भिड़ते रहते हैं। वह कई मामलों में केजरीवाल से अलग राय जाहिर कर चुके हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से बिना शर्त माफी मांगी, तो आधी पार्टी केजरीवाल के खिलाफ हो गई। नेता विपक्ष सुखपाल सिंह खैहरा ने खुल कर केजरीवाल के इस फैसले का विरोध किया। पार्टी पर छाए संकट के कारण केजरीवाल ने खैहरा पर कोई कार्रवाई तो नहीं की, लेकिन पंजाब आप एक बार फिर परेशानी में घिरती नजर आ रही है।

पार्टी के सह प्रभारी से नाराजगी

इस्तीफा देने वाले नेताओं के निशाने पर पार्टी के सह प्रभारी डॉ. बलबीर सिंह हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस्तीफा देने वालों में सबसे अधिक मालवा क्षेत्र से हैं। मालवा ही ऐसा क्षेत्र है, जहां आम आदमी पार्टी सबसे मजबूत मानी जाती है। आप के 20 विधायकों में से सबसे अधिक मालवा से ही हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आप में उठापटक का दौर अभी आगे तक चलता रहेगा। बड़े नेताओं में आपसी खींचतान लगातार बढ़ती जा रही है और केजरीवाल दिल्ली में ही उलझे हुए हैं।

पहले भी होते रहे हैं विवाद

पंजाब में आप का इतिहास विवादित ही रहा है। जिस समय आप राज्य में एक लहर बनकर उभर रही थी, तो तत्‍कालीन संयोजक छोटेपुर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। विधानसभा चुनाव में 100 सीटें जीतने का दावा करने वाली आप 20 सीटों पर सिमट कर रह गई। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष गुरप्रीत घुग्गी ने भी इस्तीफा दे दिया। भगवंत मान को प्रदेश की कमान सौंपी गई, तो वह भी पंजाब की राजनीति से गायब हो गए। इसके चलते पार्टी ने डॉ. बलबीर सिंह को सह प्रभारी बनाया।

” कुछ लोग पार्टी द्वारा ड्रग्स माफिया, रेत माफिया, लैंड माफिया के खिलाफ उठाए जा रहे मुद्दों को प्रभावित करना चाहते हैं। इस्तीफा देने से पहले मुझसे या पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया से बात करनी चाहिए थी। अगर उनकी कोई दिक्कत होती, तो उसे दूर किया जाता। इस तरह के कदम उठाना विशुद्ध अनुशासनहीनता है।

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