कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के कारण शरीर के किसी हिस्से की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं. कैंसर जिस अंग से शुरू होता है, वहां से दूसरे अंगों में भी फैल सकता है. सबसे पहले शरीर के किसी अंग में होने वाला कैंसर प्राइमरी ट्यूमर कहलाता है. इसके बाद शरीर के दूसरे हिस्सों में होने वाला ट्यूमर मैटास्टेटिक या सेकेंडरी कैंसर कहलाता है. मैटास्टेटिक कैंसर की कोशिकाएं भी प्राइमरी कैंसर के जैसी ही होती हैं. मैटास्टेटिक कैंसर शब्द का इस्तेमाल सोलिड यानी ठोस ट्यूमर के लिए किया जाता है, जो शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया हो.

कैंसर की मुख्य रूप से चार अवस्थाएं होती हैं. पहली और दूसरी अवस्था में कैंसर का ट्यूमर छोटा होता है और आस-पास के टिश्यूज की गहराई में नहीं फैलता. तीसरी अवस्था में कैंसर विकसित हो चुका होता है.ट्यूमर बड़ा हो चुका होता है और इसके अन्य अंगों में फैलने की संभावना बढ़ जाती है. चौथी अवस्था कैंसर की आखिरी या सबसे विकसित अवस्था होती है. इसमें कैंसर अपने शुरुआती हिस्से से अन्य अंगों में फैल जाता है.इसे विकसित या मैटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है.

कैंसर के फैलने के तीन तरीके हैं. डायरेक्ट एक्सटेंशन या इंवेजन, जिसमें प्राइमरी ट्यूमर आस-पास के अंगों और टिश्यूज में फैल जाता है. उदाहरण के लिए प्रोस्टेट कैंसर ब्लैडर तक पहुंच जाता है. लिम्फेटिक सिस्टम में कैंसर की कोशिकाएं प्राइमरी ट्यूमर से टूट जाती हैं और इसके जरिए शरीर के दूसरे अंगों तक चली जाती हैं.लिम्फेटिक सिस्टम टिश्यूज और अंगों का ऐसा समूह है जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने के लिए कोशिकाएं बनाता और इन्हें स्टोर करके रखता है.

कैंसर खून से भी फैलता है. इसे हीमेटोजिनस स्प्रैड कहा जाता है, इसमें कैंसर की कोशिकाएं प्राइमरी ट्यूमर से टूट कर खून में आ जाती हैं और खून की धारा के साथ शरीर के अन्य हिस्सों तक चली जाती हैं. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आमतौर पर खून या लिम्फेटिक सिस्टम में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं पर हमला करती है और इन्हें नष्ट कर देती हैं. लेकिन कभी-कभी कैंसर की कोशिकाएं जीवित रह कर शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंच जाती हैं और नया ट्यूमर बन लेती हैं.

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जब कैंसर फैल रहा होता है, उस समय इस बात की पूरी संभावना होती है कि यह शरीर के अन्य अंगों पर असर डाले. रोग के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर कौन से हिस्से में हुआ है. कैंसर के आम लक्षण हैं वजन में कमी, बुखार, भूख में कमी, हड्डियों में दर्द, खांसी या खून आना. यहां इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि अगर किसी भी व्यक्ति को ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. हो सकता है कि यह कैंसर न हो लेकिन रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर होता है.