DU का 96वां स्थापना दिवस आज, लिखा जाएगा विश्वविद्यालय का इतिहास

- in दिल्ली

दिल्ली विश्वविद्यालय 2022 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इसके लिए विशेष आयोजन की रूपरेखा अभी से बनने लगी है। इसी क्रम में डीयू ने विश्वविद्यालय के इतिहास लेखन कराने के लिए विगत वर्ष जुलाई में विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत एक दर्जन से अधिक प्रस्ताव आए हैं। डीयू इन पर विचार कर रहा है और इनमें से चयनित लोगों को डीयू का इतिहास लिखने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

डीयू के एक  वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि डीयू का गौरवशाली अतीत और बेहतरीन वर्तमान है। जब विश्वविद्यालय 100 साल का हो जाएगा, तब इसके बारे में जानने के लिए लोगों में बहुत जिज्ञासा होगी। न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी इसकी प्रतिष्ठा है। इसलिए हमने डीयू के इतिहास लेखन के लिए इच्छुक लोगों के आवेदन मंगाए हैं।  डीयू प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अवशेषों और स्मृतियों के साथ स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को भी समेटे हुए है। आजादी के दीवानों में इस कॉलेज के कई पूर्व छात्र रहे हैं। यही नहीं, रामजस कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के सदस्य तो संविधान विशेषज्ञ डॉ. भीमराव आंबेडकर थे।  चंद्रशेखर आजाद और शहीद भगत सिंह का भी दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंध रहा है। इस विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों का भी गौरवशाली अतीत है और देश की आजादी में उनके योगदान का अपना इतिहास है। डीयू के निर्माण से पहले दिल्ली में सेंट स्टीफंस कॉलेज, रामजस कॉलेज और ङ्क्षहदू कॉलेज ने सौ साल पूरा कर लिया है। ये कॉलेज बाद में डीयू का हिस्सा बने।

इसी क्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय 96वां स्थापना दिवस 1 मई को मना रहा है। इस अवसर पर वाइस रीगल लॉज के कन्वेंशन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश दीपक गुप्ता, प्रधानमंत्री के अतिरिक्त सचिव पीके मिश्रा तथा पूर्व एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी तथा सीबीआइ के निदेशक आलोक कुमार वर्मा को भी आमंत्रित किया गया है। पिछले सालों की तरह इस बार भी सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही पहली बार बेहतर वेबसाइट के लिए कॉलेज तथा विभागों को सम्मानित किया जाएगा।

डीयू के एक  वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि डीयू का गौरवशाली अतीत और बेहतरीन वर्तमान है। जब विश्वविद्यालय 100 साल का हो जाएगा, तब इसके बारे में जानने के लिए लोगों में बहुत जिज्ञासा होगी। न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी इसकी प्रतिष्ठा है। इसलिए हमने डीयू के इतिहास लेखन के लिए इच्छुक लोगों के आवेदन मंगाए हैं।

डीयू प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अवशेषों और स्मृतियों के साथ स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को भी समेटे हुए है। आजादी के दीवानों में इस कॉलेज के कई पूर्व छात्र रहे हैं। यही नहीं, रामजस कॉलेज की गवर्निंग बॉडी के सदस्य तो संविधान विशेषज्ञ डॉ. भीमराव आंबेडकर थे।

चंद्रशेखर आजाद और शहीद भगत सिंह का भी दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंध रहा है। इस विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों का भी गौरवशाली अतीत है और देश की आजादी में उनके योगदान का अपना इतिहास है। डीयू के निर्माण से पहले दिल्ली में सेंट स्टीफंस कॉलेज, रामजस कॉलेज और ङ्क्षहदू कॉलेज ने सौ साल पूरा कर लिया है। ये कॉलेज बाद में डीयू का हिस्सा बने।

 
 

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