केरल में भारी बारिश और बाढ़ से मची तबाही के चलते रविवार को दो और लोगों की मौत के साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 370 हो गई है. बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित अलाप्पुझा, एर्नाकुलम और त्रिशूर में बचाव कार्य जारी है. अधिकारियों ने इन तीन जिलों में जारी किए गए रेड अलर्ट को वापस ले लिया है और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को अपने पूर्वानुमान में राज्य के कुछ जिलों में सामान्य बारिश होने की बात कही है. सर्वाधिक प्रभावित स्थानों जहां लोग पिछले तीन दिनों से भोजन या पानी के बिना फंसे हुए हैं, उनमें चेंगन्नूर, पांडलम, तिरुवल्ला और पथानामथिट्टा जिले के कई इलाके, एर्नाकुलम में अलुवा, अंगमाली और पारावुर में शामिल हैं.

मछुआरों और अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी

अलाप्पुझा में बचाव कार्य में मदद के लिए आए फंसे मछुआरों के एक समूह ने अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी होने की शिकायत की. समूह ने कहा, हमने कई लोगों को बचाया लेकिन अब हम जहां से अपनी नाव से आए थे, वहां लौटने में हमारी मदद करने के लिए कोई नहीं है. हमने बचाव कार्यो में अपने जीवन को खतरे में डाल दिया लेकिन अब हमारी मदद के लिए कोई नहीं है. पारावुर, एर्नाकुलम के कांग्रेस विधायक वी.डी. सतीशन ने राहत टीम को भेजने में नाकाम रहने को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय की निंदा की.

हरिद्वार के अलावा कई राज्यों की नदियों में प्रवाहित होंगी अटल जी की अस्थियां

मंत्री का जवाब

इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री के.के. शैलजा ने कहा कि हालांकि कई क्षेत्रों में जलस्तर कम हो गया है, लेकिन बड़े पैमाने पर संकटपूर्ण स्थितियों के कारण संभवत: चिकित्सा सुविधाएं कुछ क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाई हैं.मंत्री ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि डॉक्टरों ने प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल पाया और अब तक यह समस्या लगभग हल हो गई है. हमें बड़ी मात्रा में दवाएं चाहिए. संक्रमण संबंधी बीमारियों को रोकने के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य अभियान की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों की मेडिकल टीमें जल्द ही पहुंच जाएंगी.

केरल की मदद के लिए आगे आए राज्य

दूसरी ओर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बाढ़ प्रभावित केरल के लिए 10 करोड़ रुपये की सहायता राशि की घोषणा की. इसके साथ ही राजस्थान राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) के 27 सदस्यीय दल को भी राहत कार्य के लिए केरल रवाना किया गया. मध्य प्रदेश सरकार ने भी 10 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया. वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के.पलानीस्वामी ने राहत कार्यों के लिए पांच करोड़ रुपये की सहायता राशि और दूध, चावल समेत अन्य राहत सामग्रियां भेजने की घोषणा की. साथ ही मुख्यमंत्री ने जरूरी दवाइयों और डॉक्टरों की एक टीम को भी फौरन यहां भेजे जाने की घोषणा की.

रेलवे भी कर रहा मदद

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस आपदा पर चिंता जताते हुए राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस दमकल कर्मियों की एक विशेष टीम रवाना किया है. वहीं गोवा के पर्यटन मंत्री मनोहर अजगांवकर ने बचाव निधि में अपना एक महीने का वेतन दान करने की बात कही. कांग्रेस की पंजाब इकाई के सांसद एवं विधायक ने भी एक-एक महीने का वेतन दान देने की बात कही. रेलवे भी मदद के लिए आगे आया है. रेलवे ने सभी सरकारी और निजी इकाइयों को बाढ़ प्रभावित केरल तक राहत सामग्री नि:शुल्क पहुंचाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए .पश्चिम रेलवे ने बाढ़ प्रभावित केरल के लिए नौ लाख लीटर पेयजल के साथ विशेष ट्रेन को रवाना किया. इसके अलावा अन्य राज्यों ने भी केरल के लिए सहायता की घोषणा की है.