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साढ़े 9 साल पुराने पासपोर्ट घोटाले में 25 को कैद और जुर्माना

साढ़े 9 साल पुराने देश के बहुचर्चित पासपोर्ट घोटाले में चंडीगढ़ की महिला एजेंट समेत 25 लोगों को कैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई।
एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट दीप्ति गुप्ता की अदालत ने साढ़े 9 साल पुराने चर्चित पासपोर्ट घोटाले में चंडीगढ़ की महिला एजेंट समेत 14 ट्रेवल एजेंसी संचालकों, 5 एजेंटों, घोटाले में बर्खास्त 3 पुलिस कर्मियों, चंडीगढ़ क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर के सुपरिंटेंडेंट के अलावा जन्म मृत्यु शाखा क्लर्क व पोस्टमैन समेत 25 को दोषी करार देते हुए 3 साल की कैद और 11 हजार रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है।

साढ़े 9 साल पुराने पासपोर्ट घोटाले में 25 को कैद और जुर्मानाअदालत ने फर्जी दस्तावेजों ओर फर्जी नाम पर पासपोर्ट जारी करवाने के आरोप में गिरफ्तार 44 कर्मियों को सबूतों के अभाव कारण बरी कर दिया है। इस मौके एक महिला ट्रेवल एजेंसी संचालक समेत दोषियों की ओर से जुर्माने की रकम मौके पर जमा करा देने के कारण अदालत ने जमानत मंजूर कर ली। सरकारी वकील संदीप कुमार व अमनदीप परिंजा ने बताया कि थाना सिटी में 13 जुलाई 2008 को तैनात पुलिस मुलाजिम सतपाल सिंह की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया था।

उन्होंने बताया कि अदालत ने इस घोटाले के लिए आरोपियों को दो कैटेगरी में बांटा था। कैटेगरी ए में तीन पुलिस कर्मी, क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर के सुपरिंटेंडेंट, पोस्टमैन और जन्म मृत्यु क्लर्क और ‘बी ’ कैटेगरी में ट्रेवल एजेंसियों के संचालक थे। लेकिन कैद और जुर्माना दोनों कैटेगरी दोषियों की बराबर है।

मामले में सीनियर अधिकारियों की निगरानी में विशेष जांच टीम ने चंडीगढ़ के पासपोर्ट दफ्तर से इस जिले की 2002 से 2008 तक 795 पासपोर्ट अर्जियों की जांच में करीब 395 लोगों के पासपोर्ट जाली नाम-पते पर जारी होने की पुष्टि हुई थी। इस केस की जांच से जुड़े एएसआई तेजिंदर सिंह ने बताया कि पासपोर्ट घोटाले में तकरीबन 825 सरकारी गवाह थे।

इस केस की सुनवाई के दौरान कई आरोपियों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में 90 याचिकाएं भी दायर हुईं जो रद्द हो गईं। कई आरोपियों ने अपना जुर्म भी कबूला, लेकिन अदालत ने केस की सुनवाई पूरी होने पर यह फैसला दिया। इस केस में तकरीबन 97 आरोपी अदालती कार्रवाई का सामना कर रहे थे।

इस दौरान फर्जी दस्तावेजों और जाली नाम पते पर पासपोर्ट जारी कराने के आरोप में गिरफ्तार कुछ आरोपी भगोड़े घोषित किए गए। कई पर पुलिस अफसरों की मेहरबानी हुई और उन्हें निर्दोष करार दे दिया गया। इसके अलावा एलओसी जारी होने के कारण सैकड़ों आरोपी गिरफ्तारी के डर से वतन नहीं आ रहे।

घोटाले में 10 फरवरी 2018 को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली से जसविंदर कौर नामक की महिला को अमेरिका से लौटते वक्त काबू कर लिया गया था। इस महिला का मायका गांव महल जिला जालंधर और वह विवाहित गांव करीहा जिला नवा शहर में थी पर उसका पासपोर्ट स्थानीय एफसीआईरोड पते पर जारी हुआ था।

चंडीगढ़ की 14 एजेंसी संचालकों समेत जिन को कैद हुई उन में विभाग की ओर से इस घोटाले में बर्खास्त हवलदार रणजीत सिंह, हवलदार जसविंदर पाल सिंह और गुरदयाल सिंह, चंडीगढ़ क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर के सुपरिंटेंडेंट दीदार सिंह, पोस्टमैन रणजीत सिंह, स्थानीय सिविल सर्जन दफ्तर के जन्म मृत्यु शाखा के क्लर्क बलविंदर सिंह के अलावा डॉलर ट्रेवल एजेंसी संचालक हरबखस सिंह, पोरमपट ट्रेवल एजेंसी संचालक कमल बेदी और रमनजीत सिंह, ओरिएंटल ट्रेवल्स के सुभाष कटारिया, जौहल ट्रेवल्स संचालक बलजीत सिंह, हरगोबिंद ट्रेवल्स संचालक गुरदीप सिंह, संधर ट्रेवल्स संचालक मुकेश कुमार, स्वास्तिक ट्रेवल्स अशोक कुमार नायर, सघ्घड़ वर्ल्ड हौलीडेज संचालक रूपजीत सघ्घड़, चोपड़ा ट्रेवल्स संचालक महताब चोपड़ा, मुद्रा एसोसिएट्स संचालक राजीव पुरी, एवरग्रीन ट्रेवल्स संचालक राजीव बंसल, स्वास्तिक ट्रेवल्स मोगा संचालक पंकज गौतम, कंवर ट्रेवल्स संचालक बलराज सिंह, शाम ट्रेवल्स मोगा संचालक शाम सुंदर गोयल, बराड़ ट्रेवल्स धर्मकोट संचालक भूपिंदर सिंह, गोल्डन ट्रेवल्स, बाघापुराना संचालक मनजीत सिंह गांव गिल, मालवा ट्रेवल्स, बाघापुराना संचालक सुखदर्शन सिंह घोलिया और एजेंट कुलविंदर सिंह शामिल हैं।

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