हिंद महासागर में अब नहीं चलेगी चीन की दादागिरी, भारत ने भी उतारे अपने 8 वॉरशिप

पिछले हफ्ते ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में कहा गया था कि भारत को मालदीव में दखल देना बंद करना चाहिए.

इसमें कहा गया कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना के तीन पोत पूर्वी, दक्षिण और पश्चिम हिंद महासागर में तीन मुख्य इलाकों में हैं. क्षेत्र में चीन के 11 युद्धपोत हैं.

चीनी नौसेना ने देश की एक माइक्रोब्लॉग साइट पर कहा है कि दस दिन पहले चीन की नौसेना के पांच मुख्य युद्धपोत पूर्वी हिंद महासागर में गए थे.

उधर, राष्ट्रपति अब्दुल्लाह यामीन जिन्हें चीन का करीबी माना जाता है, उन्होंने इस महीने की शुरुआत में राष्ट्र में आपातकाल लगा दिया था और विपक्ष के नेताओं तथा सुप्रीम कोर्ट के जज को गिरफ्तार करवा दिया था. तब से चीन मालदीव में विदेशी दखल का जोरदार विरोध कर रहा है. 

कुछ दिन पहले मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से राष्ट्र में राजनीतिक संकट के समाधान की खातिर सैन्य दखल की अपील की थी.  

हालांकि, यह सामने नहीं आया है कि हिन्द महासागर में कब चीनी जहाजों ने प्रवेश किया या फिर कितने दिनों तक चीन की ये एक्टिविटी जारी रहेगी. मालदीव में अपना प्रभाव छोड़ने के लिए भारत और चीन के बीच होड़ रही है. 

Sina.com.cn की रिपोर्ट के मुताबिक, तबाह करने वाले जहाज सपोर्ट टैंकर्स के साथ हिन्द महासागर में प्रवेश किए. रिपोर्ट में कहा गया कि चीन के नौसेना पोतों में एक ऐसा पोत भी शामिल है जिस पर विमान, हेलिकॉप्टर उतर सकते हैं. हालांकि, चीनी वेबसाइट ने रिपोर्ट में इसकी वजहों का जिक्र नहीं किया और न ही मालदीव संकट के बारे में लिखा. 

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का 11 युद्धक जहाज पूर्वी हिन्द महासागर में इस महीने प्रवेश किया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने चीनी वेबसाइट के हवाले से ये खबर दी है. इस दौरान भारतीय नौसेना और चीनी नौसेना के बीच की दूरी काफी कम रह गई थी. यह एक्टिविटी ऐसे वक्त में सामने आई है जब मालदीव राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है और देश में इमरजेंसी लगी हुई है. इसके जवाब में भारत ने अपने 8 युद्धक जहाज हिन्द महासागर में भेजे हैं जो चीनी गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे. सरकारी सूत्रों ने ये जानकारी दी है.  आइए जानते हैं पूरा मामला…

 
 
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