हमारी अपनी बात को सुनता कौन है अब…..

Mohd. Kaleem
हमारी अपनी बात को सुनता कौन है अब
जहां देखो लोग अपनी धुनी रमाये हैं अब
दुखों का देखो गर्म बाज़ार है अब
नफरत के बीच सहमा सौहार्द है अब
किसी को किसानों का दर्द दिखता है अब
किसी को युवाओं का मर्म दिखता है अब
नोटबंदी, जीएसटी ने कितनों को मारा
वादा फांसी का था जो जुमला हो गया है अब
कितने सरहद पर, कितने देश के अंदर शहीद हो रहें हैं अब
देखो राजनीति में इनकी भी मज़लिसे लगने लगी है अब
जहां देखो अपनी सनक है
महज ताकत व सत्ता पाना मकसद है अब
धर्म और जातिवाद की चाशनी फिर तैयार है अब
विकास तो अब भाषणों में भी लापता है जैसे अब
सामने से देखो रोज एक वादा करता है अब
और हम हीं हैं जो समझना नहीं चाहते हैं अब
वर्ना इनकी मजाल है क्या जो हमको चराते अब..
@ मो. कलीम

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