हनुमान जयंती 2019: यहां हीरों की आंखों से ऐसे अपने भक्तों को निहारते है हनुमानजी, देखें पूरा वीडियो…

शहर के पश्चिम क्षेत्र स्थित वीर बगीची के वीर आलीजा सरकार को हनुमान जयंती पर शुक्रवार को हीरे की आंखें लगाई गईं। 600 साल पुरानी दोनों हाथों में गदा लिए भगवान हनुमान के वीर स्वरूप वाली पांच फीट की मूर्ति पर तीन इंच लंबे और एक इंच चौड़े नेत्र लगाए गए। चार लाख रुपए के इन नेत्रों में साढ़े तीन लाख की अस्सी सीटी के टेस्टेड डीप फाइन डायमंड लगाए गए हैं। इसके साथ डेढ़ तोले सोना और मीना से भी कारीगरी की गई है। नेत्रों का निर्माण पंचकुइया स्थित वीर बगीची की व्यवस्था समिति ने कराया है। नेत्रों में लगाने के लिए हीरे को मुंबई से लाया गया है।

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आभूषणों की कमी नहीं

पश्चिममुखी प्राचीन मूर्ति के पास यूं भी सोने-चांदी के आभूषणों की कमी नहीं है। डेढ़ किलो सोने और 10 किलो चांदी के जेवरात हैं। इनमें सोने के तीन कंठे, हार, गले की चेन शामिल है। कंठे की कीमत 15-15 लाख रुपए है।

400 साल से जल रही धूनी, सनातन धर्म का मंदिर

वीर आलीजा भक्त मंडल के अनुसार मंदिर में चार सौ साल से धूनी जल रही है। यह सनातन धर्म की परंपरानुसार पूजा-अर्चना होती है। हनुमान जयंती पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान को हीरे के नेत्र भगवान को लगाए गए। इस अवसर पर मंदिर को फूलों से सजाया गया।

मंदिर अग्नि अखाड़े से संबद्ध

वीर बगीची एक एकड़ में फैली है। इसका संबंध अग्नि अखाड़े से है। कैलाशानंद महाराज ने नेपाल से आकर यहां तप किया था। वे अग्नि अखाड़े से दीक्षित थे। यहां बद्री विशाल का मंदिर है। हनुमानजी के सामने बद्री विशाल का मंदिर उत्तराखंड के बाद इंदौर में है। लक्ष्मीजी व संतानेश्वर महादेव का मंदिर भी बना है।

अंजनीपुत्र का एकमात्र मंदिर जहां हर दिन भांग का भोग

ब्रह्माचारी पवनानंद बताते हैं कि यह दुनिया का एकमात्र हनुमानजी का ऐसा मंदिर है, जहां भगवान को हर दिन भांग का भोग लगाया जाता है। हर दिन करीब 500 ग्राम और वर्षभर में 182 किलो से अधिक भांग चढ़ाई जाती है। यह मूर्ति खजूर के पेड़ से निकली थी, जिसे बाद में मंदिर में लाकर स्थापित किया गया।


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