स्वच्छ्ता अभियान में जूट के बैग बांट रहे डॉ.भरतराज सिंह

- in उत्तरप्रदेश, लखनऊ

एसएमएस, लखनऊ के वैज्ञानिक की सराहनीय पहल

लखनऊ : पर्यावरण सुरक्षा में घातक साबित हो रही पालीथीन के इस्तेमाल को रोकने के लिए डॉ.भरत राज सिंह ने सराहनीय पहल की है। इसके तहत वह राजधानी लखनऊ में लोगों को पालीथीन का उपयोग बंद करने और कपड़े, जूट और कागज के थैले का इस्तेमाल करने के लिये प्रोत्साहित कर रहे हैं। वह घर-घर जाकर लोगों को जूट के बैग बांट रहे हैं और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का पुनीत कार्य रहे हैं। विरामखड, गोमतीनगर निवासी डॉ. भरत राज सिंह, स्कूल आॅफ मैंनेजमेंट साइंसेज, लखनऊ के महानिदेशक हैं और पिछले 10 वर्षों से पर्यावरण के प्रति जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

डा. भरत राज सिह ने उत्तर-प्रदेश राजकीय निर्माण निगम से वर्ष 2004 मे प्रबंध-निदेशक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने का संकल्प लिया तथा जूट के बैग के उपयोग को बढावा देना शुरू किया। इसके तहत वह गोमती नगर के विराम खंड-5 में घर-घर जाकर जूट व कपड़े के बैग बांटने लगे। कुछ दिनों में उनके साथ कालोनी के दूसरे बुजुर्ग भी इस अभियान में शामिल हो गये। डा0 भरत सिंह कहते हैं कि लखनऊ की आबादी लगभग 43 लाख है और करीब 25-30 करोड़ बैग का इस्तेमाल प्रतिमाह किया जा रहा है। इससे जमीन, पानी और हवा सब प्रदूषित होती है। इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ी को उठाना पडेगा।

डा. सिह का कहना है कि पालीथीन सड़को से नालों से जाता है, जो शहर का ड्रैनेज सिस्टेम चौपट करता है। जानवर भी पालीथीन खा जाते हैं। इन सबको रोकने के लिये ही उन्होंने लोगों को घर-घर जाकर जूट व कपडे के थैले के फायदे बताने शुरू किये। वह लोगों को अपनी गाड़ी या स्कूटर में हमेशा एक जूट या कपडे के बैग रखने और खाने–पीने की चीजों को कागज या पत्ते की प्लेटों में लेने के लिये जागृत करते हैं। साथ ही वह लोगों को पालीथीन के उपयोग के खतरों के बारे में जानकारी देते हैं। दुकानों पर जूट से बने बैग की संख्या बढ़ाने के लिये इसके उत्पादन में नई-नई डिजाइन की सलाह देते हैं और अपना पैसा भी लगाते हैं। कालोनी के लोग इनकी इस मुहिम में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

आज जब भारत सरकार ने स्वच्छता पखवारा मना रहा है तो डा0 सिह ने कपास या जूट बैग के इस्तेमाल जो बायोडिग्रेडेबल (स्वाभाविक तरीके से नष्ट होने वाला है, को बढावा दे रहे हैं और विराम-5, गोमतीनगर के वरिष्ठ नागरिकों को खादी-आश्रम के थैले जिस पर राष्ट्रपिता गांघी जी का संदेश लिखा है, ‘खादी वस्त्र नही, संदेश है’ को बांटा। डॉ.सिंह का यह मानना है कि लोगों द्वारा यदि इसे अपना लिया जाय तो शहर में आधे से ज्यादा कूड़े का संकट समाप्त हो जायेगा। 17 सितम्बर को एस.एम.एस. लखनऊ में एक तरफ जहाँ विश्वकर्मा जी की जयंती जहां धूमधाम से मनाई गई, वही छात्र-छात्राओं में स्वच्छता अभियान के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों से बने थैले का उपयोग करने की सलाह भी दी गयी।

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