स्कूलों की मरम्मत के नाम पर घोटाला, कई स्कूलों में नहीं बनी बाउंड्रीवाल, निकाल लिए लाखों रुपये

शिव प्रकाश मिश्रसीतापुर। परिषदीय विद्यालयों में मरम्मत के नाम पर खैराबाद ब्लाॅक में बड़ा घोटाला सामने आया है। 14वें वित्त से बाउंड्रीवाल निर्माण, शौचालय निर्माण, इंटरलाॅकिंग व रंगाई-पुताई के नाम पर प्रधान ने लाखों रुपये निकाल लिए, लेकिन हकीकत में कार्य हुआ ही नहीं है। इसकी सबसे बड़ी नजीर है प्राथमिक विद्यालय दसईखेड़ा। इस विद्यालय में चालू वित्तीय वर्ष में इंटरलाॅकिंग निर्माण दिखाकर दो लाख 48 हजार 900 रुपये निकाले गए, जबकि विद्यालय में इंटरलाॅकिंग लगाई ही नहीं गई। यह खुलासा मिशन प्रेरणा खैराबाद ग्रुप में बीईओ खैराबाद द्वारा डाली गई कायाकल्प पीडीएफ के आंकड़ों से हुआ। इस ग्रुप के एडमिन बीएसए भी हैं।

प्राथमिक विद्यालय अशरफपुर में वित्तीय वर्ष 2018-19 में बाउंड्रीवाल निर्माण के नाम पर तीन लाख 41 हजार 992 रुपये खर्च होना अभिलेखों में दिखा दिया, लेकिन विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मृदुला पांडेय ने बताया कि बाउंड्रीवाल काफी पहले से बनी हुई है। प्राथमिक विद्यालय अकबरगंज में बाउंड्रीवाल निर्माण एक लाख 48 हजार 890 व उच्च प्राथमिक विद्यालय में बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए 36 हजार 395 रुपये निकाले गए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक राकेश मिश्र ने बताया कि हमारे विद्यालय में बाउंड्रीवाल निर्माण सर्व शिक्षा के मद से आठ वर्ष पूर्व हो चुका है। बाउंड्रीवाल का कुछ प्लास्टर उखड़ा हुआ था, उसे ठीक कराकर उसकी पुताई कराई गई है।

इसी तरह प्राथमिक विद्यालय मिश्रापुर में वित्तीय वर्ष 2019-20 में बाउंड्रीवाल निर्माण पर दो लाख 82 हजार रुपये व 20 हजार रुपये दो किश्तों में निकाले गए और शौचालय निर्माण दो लाख 5000 रुपये निकाले गए। मजे की बात तो यह है कि बाउंड्रीवाल का निर्माण सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2010 में कराया गया था। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नीलम वर्मा ने बताया कि बाउंड्रीवाल को महज डेढ़ फिट उंचाई बढ़ाई गई, गेट का निर्माण व बाउंड्रीवाल की रंगाई-पंताई ग्राम पंचायत द्वारा कराई गई है।

इसी तरह प्राथमिक विद्यालय दीवानपुरवा में बाउंड्रीवाल निर्माण के नाम पर वित्तीय वर्ष 2018-19 में एक लाख 31 हजार 450 रुपये व इसी भवन की रंगाई-पुताई के नाम पर 64 हजार 860 रुपये निकाल लिए गए। हैरानी तो इस बात की है कि दीवानपुरवा नाम से प्राथमिक विद्यालय की जगह उच्च प्राथमिक विद्यालय है। उसकी बाउंड्रीवाल पहले से बनी है उसे महज थोड़ा ऊंचा किया गया, जिसमें इतनी बड़ी धनराशि लगा देना भी सवालों के घेरे में है।

यह चंद विद्यालय तो महज बानगी भर हैं, स्कूलों की मरम्मत के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है। डीएम अखिलेश तिवारी ने पूरे मामले की जांच के निर्देश सीडीओ संदीप कुमार को दिए हैं। सीडीओ ने कहा जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

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