सूर्यग्रहण के वजह से बढ़ा शनि अमावस्या का महत्व, जानिए पूजा विधि और मुहूर्त…

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हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पूजा-पाठ, दान-पुण्य आदि करना बेहद शुभ माना जाता है। जब शनिवार को अमावस्या पड़ती है तो उसे शनैश्चरी अमावस्या कहा जाता है। आज शनैश्चरी अमावस्या के साथ ही सूर्यग्रहण भी है, इससे अमावस्या का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है लेकिन इन्हें कर्म का देवता भी माना जाता है। आज विशेष पूजन, अर्चन और स्तवन करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनिदोष है, वो लोग इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं और विधि विधान के अनुसार पूजन करके शनि दोष से मुक्ति पा सकते हैं…सूर्यग्रहण के वजह से बढ़ा शनि अमावस्या का महत्व, जानिए पूजा विधि और मुहूर्त...

शनि अमावस्या का महत्व

शास्त्रों में कहा गया है शनिदेव अच्छे कर्म करने पर हमेशा अपने भक्तों को अच्छा फल देते हैं और जो गलत काम करता है, उसे वह सीख भी देते हैं। उनकी कृपा मात्र से जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती। एक बार जिस व्यक्ति पर शनिदेव प्रसन्न हो जाते हैं उसे रंक से राजा बना देते हैं और नाराज हो जाएं तो राजा से रंक बना देते हैं। जिस व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती या फिर ढैय्या चल रही हो तो कुछ उपाय करके आप इसके प्रभाव को कम कर सकते हैं। साथ ही शनि महाराज की पूजा करने से मनचाहा फल भी प्राप्त कर सकते हैं।

इस तरह करें अमावस्या पर शनि महाराज की पूजा

आज सुबह से ही ग्रहण का सूतक लगा हुआ है, इसलिए ग्रहण के शनिदेव और पीपल की पूजा करें। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नानादि से निवृत्त होकर पीपल के पेड़ और शनिदेव की प्रतिमा पर काला तिल और तेल चढ़ाना चाहिए। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर उनकी प्रतिमा के आगे नहीं बल्कि मंदिर में उनकी शिला के समाने रखें। इसके बाद शनि महाराज की आरती करें। ग्रहण के बाद गरीबों को खाना खिलाएं और जरूरतमंदों का दान करें। साथ ही शनिदेव को काले तिल, काली उड़द या फिर कोई काली वस्तु भी भेंट कर सकते हैं।

शनि चालीसा का पाठ है बेहद शुभ

शनि पूजा के दौरान शनि चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ रहेगा। शनि मंत्र का जप करें। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, शनि स्त्रोत की रचना राजा दशरथ ने शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए की थी। शनि महाराज ने राजा दशरथ को आशीर्वाद दिया था कि भविष्य में जो भी सच्चे मन से शनि स्त्रोत का पाठ करेगा, मैं उसपर प्रसन्न होऊंगा। साथ ही हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी अवश्य करें। शनि महाराज को तेल चढ़ाने से पहले इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि इस तेल में अपना चेहरा जरूर देख लें। इससे आपके ग्रह दोष कम होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

शनि अमावस्या व्रत तिथि व मुहूर्त

अमावस्या तिथि– 11 अगस्त 2018, शनिवार
अमावस्या तिथि आरंभ– 19:08 बजे (10 अगस्त 2018)
अमावस्या तिथि समाप्त– 15:27 बजे (11 अगस्त 2018)

इस तरह पितरों को करें खुश

ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव हैं। ग्रहण के साथ ऐसे में इस दिन अपने पितरों को भी प्रसन्न करने का सही समय है। माना जाता है कि शनैश्चरी अमावस्या के दिन किए गए शांति उपाय तुरंत फलकारी होते हैं। इस दिन पितरों के लिए किए गए पूजन-तर्पण से कई गुना फल मिलता है। इस दिन पवित्र नदियों में पितरों के नाम का स्नान करें, साथ ही उनके नाम का दान करें। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और उनका आशीर्वाद भी मिलता है। जिससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

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