सावन की पूजा में इन पांच वस्तुआें के इस्तेमाल से शिव होते है अति प्रसन्न…

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शिव हैं भोले भंडारी 

वैसे तो शिव को भोलेनाथ कहा जाता है क्योंकि कोर्इ भी भक्त मन में श्रद्घा भाव लेकर उनकी पूजा करे तो वे प्रसन्न हो जाते हैं। समुद्र मंथन में सबको अमृत पीने का अवसर देकर स्वंय शिव ने गरल का पान करने का निर्णय लिया था। उनकी पूजा में भी लोग बस बम बम का निनाद कर के महज एक लोटा जल आैर विष्णुकांता का एक फूल भर चढ़ा दें तो भी वे उसे अपना आर्शिवाद प्रदान करते हैं। एेसे में भक्त भी बस बाबा के ध्यान में मग्न रह कर बिना किसी उलझन आरैर नियम टूटने के भय के सहज भाव से पूजा कर लेते हैं। फिर भी उत्सुकता तो रहती है कि आखिर शंकर जी को क्या चढृाया जाए कि वे खुश हो जायें। तो आज हम आपको बता रहे हैं शिव की प्रिय वस्तुआें में से पांच के बारे में। सावन की पूजा में इन पांच वस्तुआें के इस्तेमाल से शिव होते है अति प्रसन्न...

अकौड़ा: ये जंगली फूल अकौड़ा यानि मदार शिव जी को अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान जल, चंदन आैर अक्षत अर्पित करने के पश्चात शिव जी को यदि फूल चढृाया जाए तो अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं क्योंकि मदार श्री गणेश का प्रतीक है आैर कौन पिता होगा होगा जिसे पुत्र की निकटता मिले तो वो खुश नहीं होगा। 

बेलपत्र: ये बेल के वृक्ष की पत्तियां होती हैं जिन्हें बिल्व पत्र भी कहा जाता है। कहा जाता है कि सर्वोत्तम वो पत्तियां होती हैं जो एक साथ तीन के संगठन में होती हैं। ये तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु आैर महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। इसीलिए इससे तीनों ही देव प्रसन्न होते हैं। साथ ही तीनों देवों की अर्द्घांगनियों को भी ये पत्तियां प्रिय हैं। लक्ष्मी, पार्वती आैर सीता को राम नाम लिख कर बेलपत्र चढ़ाने से आर्थिक लाभ होता है।

शमी पत्र: शमि पत्र शनि का प्रतीक है। कहते हैं कि एक बार जब शनिदेव ने शिव को रुष्ट कर दिया आैर दोनों में युद्घ हुआ तो शिव के प्रहार से शमी ने ही उनकी रक्षा की थी। उसके बाद शनी ने शिव से क्षमा मांगी आैर इस तरह भगवान शिव को शमी अर्पित किया जाने लगा। सावन के महीने में भगवान शिव के श्रृंगार में इसकी पत्तियों का अत्यंत महत्व है।

धतूरा: शिव ने समुद्र मंथन से निकले जहर को पीकर भी जगत की रक्षा की थी, धतूरा चढ़ाना इसी बात का प्रतीक है कि जहर पीकर भी मानव मात्र की रक्षा के बारे में सोचता है वही वास्तव में शिव को प्रिय है।शिव पूजा में धतूरे जैसा जहरीला फल चढ़ाने के पीछे भी भाव यही है कि व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में बुरे व्यवहार से दूर रहे। शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाने से प्रसन्न होने वाले शिव वास्तव में चाहते हैं कि  उनके भक्त मन और विचारों की कड़वाहट निकाल कर मिठास अपनायें। धतूरा शरीर से विकार निकालने वाली आैषधि के रूप में भी काम करता है। 

भांग: भांग को आयुर्वेद में हितकारी औषधि माना जाता है। कहते हैं कि वैसे तो भांग एक विषैला पदार्थ है, लेकिन अगर शरीर में पहले से ही कोई विषाक्त पदार्थ हों तो फिर ये उसके प्रभाव को खत्‍म कर देता है। एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को भांग विशेष तौर पर प्रिय है क्योंकि ये गंगा की बहन है आैर दोनों ही भगवान शिव के सिर पर निवास करती हैं। भांग के पौधे को माता पार्वती का स्‍वरूप भी माना जाता है, इसलिए भी भोलेनाथ को प्रिय है। साथ ही भांग ऐसा भी माना जाता है हमेशा ध्‍यानमग्‍न रहने वाले शंकर जी को भांग का सेवन मग्‍न रखता है। 

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