सावन का आखिरी सप्ताह: इन तीनों रूपों की कर लें पूजा, आपकी भी नैय्या हो जाएगी पार

जैसे कि सबको पता है कि सावन का पावन माह अपने अंतिम चरण पर पहुंच चुका है। इस पूरे माह में भगवान शिव की पूजा का बहुत महत्व होता है। मान्यता के अनुसार इस महीने में की गई पूजा से शिव शंकर अधिक प्रसन्न होते हैं। लेकिन कई लोग अपने जीवन में अधिक व्यस्त होने के कारण इस पावन माह में भी भोलेनाथ की पूजा-अर्चना नहीं कर पाते। तो अगर आप भी उनमें से एक हैं जिस ने शिव की पूजा का यह सुनहरा मौका खो दिया है तो घबराईए मत। हम आपको इस सावन के आखिरी दिनों में भगवान के 3 एेसे रूपों की पूजा के बारे में बताएंगे जिनकी पूजा से आपकी भी नैय्या हो जाएगी पार।

मान्यता है कि शिव के नीलकंठ, मृत्युंजय और नटराज रूप की पूजा करने से जीवन की अलग-अलग समस्याओं का समाधान निकलता है। शिव जी के इन रूपों को परम कल्याणी बताया गया है।

भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप की पूजा को ग्रहों को नियंत्रित करती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव जी ने मानवता की रक्षा के लिए समुद्र मंथन से निकले विष का पान कर लिया था जिससे उनका कंठ नीला हो गया। इसके बाद से उनका नाम नीलकंठ पड़ गया। मान्यता है कि शिव के नीलकंठ स्वरूप की उपासना करने से शत्रु बाधा, षड़यंत्र और तंत्र-मंत्र का असर नहीं होता और व्यक्ति एक सुखमय जीवन जीता है। आपको बता दें कि नीलकंठ स्वरूप पर गन्ने के रस का जलाभिषेक करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि शिव जी के नटराज रूप की पूजा करने से जीवन की समस्त परेशानियों का हल निकल जाता है। कहते हैं भगवान शिव के नटराज स्वरूप को ज्ञान, विद्या, संगीत और कला का वरदान देता है। माना जाता है कि शिव जी ने ही नृत्य, संगीत और कला का आविष्कार किया था।

इसके अलावा शिव के महामृत्युंजय स्वरूप की सावन में उपासना करना भी बहुत शुभ माना गया है। कहते हैं कि महामृत्युंजय स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।

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