सऊदी अरब से खाली हाथ लौटे बाजवा, नहीं मिला पदक

नई दिल्ली । पाकिस्तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा सऊदी अरब से देर शाम इस्लामाबाद लौट आए, लेकिन खाली हाथ। क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने जनरल बाजवा को मिलने का समय ही नहीं दिया। लिहाजा बाजवा और उनके छोटे भाई सऊदी में सुरक्षा मामलों के जिम्मेदार प्रिंस सलमान बिन अब्दुल्ला अजीज से मुलाकात कर लौट आए।

बता दें कि जनरल बाजवा पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बिगड़े ताल्लुकात को ठीक करने गए थे। ​पाकिस्तान के सेना प्रमुख को पदक से सम्मानित किया जाना था, लेकिन सऊदी ने ऐसा करने से मना कर दिया। पाकिस्तानी मीडिया का मानना है कि बाजवा भले ही सऊदी अरब से पाकिस्तान के लिए कोई बहुत अच्छी खबर नहीं लाए लेकिन उन्हें डैमेज कंट्रोल करने में कामयाबी मिली है। पाकिस्तान आर्मी के प्रवक्ता आईसीपीआर ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सुरक्षा, सहयोग और कुछ अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई।

जनरल बाजवा सोमवार को रियाद के दौरे पर गए थे। वहां उनका इस्तकबाल सऊदी अरब की मिलिट्री चीफ फयाद अल रूवाली ने किया। इसके अलावा लेफ्टिनेंट जनरल फहाद बिन तुर्की अल साउद ने भी मुलाकात की। बाजवा की इस दौरे की सबसे बड़ी विफलता यह रही कि उनसे ना तो सऊदी अरब के किंग मिले और न क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान। इस कारण बाजवा सऊदी अरब से पाकिस्तान को मिल रही सहायता को जारी रखने पर बातचीत नहीं कर सके। सेना प्रमुख की इस यात्रा में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के प्रमुख जनरल फैज हमीद भी साथ में थे।

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तीन अरब डॉलर की नकदी और 3.2 अरब डॉलर के उधार तेल की सुविधा दे रखी थी लेकिन पिछले दिनों कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी द्वारा सऊदी अरब को धमकी दिए जाने के कारण संबंधों में दुराव आ गया है। अब रियाद उधारी की मियाद नहीं बढ़ा रहा है, उल्टे पाकिस्तान को दिए उधार पैसे की वसूली में भी लग गया है। अगस्त के प्रारंभ में ही सऊदी अरब ने एक अरब डॉलर पाकिस्तान से वापस ले लिए और अब बाकी रकम के लिए भी दवाब बना रहा है। कंगाली के मुहाने पर खड़े पाकिस्तान को कर्ज लौटाने के लिए चीन से एक और नया कर्ज लेना पड़ा।

पाकिस्तान और सऊदी के बीच उधार तेल आपूर्ति का करार मई में ही समाप्त हो गया था। पेट्रोलियम मामले के प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सलाहकार नदीम बाबर ने इस्लामाबाद में 12 अगस्त को बताया था कि पाकिस्तान ने 3.2 अरब डॉलर के बाद भुगतान के आधार पर तेल देने की मियाद एक साल और बढ़ाने की अपील सऊदी अरब से की है, लेकिन हमें नहीं मालूम है कि यह मियाद कब बढ़ेगी। अब जब आर्मी चीफ का यह दौरा पूरी तरह विफल रहा है तो इमरान और पाकिस्तान का हाल और खराब होने वाला है। बेचारे कुरैशी को कहीं कुर्सी ना गंवानी पड़े।

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