संपादकीय : वैक्सीन अभी दूर की कौडी

कोरोना का प्रकोप दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। आज देशभर में कोरोना के मामले 49 लाख के पार हो चुके है। यह अलग बात है कि हमारे देश मे रिकवरी रेट काफी अच्छा है। पहले यह रेट ५० से 60 फीसदी थी, लेकिन अब बढकर 78 फीसदी तक हो गई है। 92 हजार से ज्यादा केस देशभर मे हर रोज आ रहे हैं। छह राज्यों मे इसका प्रकोप कुछ ज्यादा ही है। इसमे यूपी के अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध प्रदेश और तमिलनाडु से 62 फीसदी से ज्यादा केस आ रहे हैं। उतर प्रदेश में शुरुवात काफी धीमी थी, लेकिन दिसंबर आते-आते इसकी संख्या मे खासी वृद्धि हुई है। हमारे केदीय स्वास्थ्य मंत्री का मानना है कि देश मे लॉकडाउन लगाने और सही समय पर सरकार के फैसलो से सकंमण को तेजी से बढने से रोकने मे खासी सफलता मिली है।

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लखनऊ शहर की बात करें तो यहां के हालात बेहद खतरनाक हैं। अनलॉक-3 के बाद तो संकमण बेहद तेजी से फैला है और उसने राजधानी के लगभग सभी मोहल्लों को अपनी चपेट मे ले लिया है। राजधानी मे आज भी 992 नए केस सामने आए है। जबतक मरने वालो मे सिर्फ 524 लोग हैं। प्रदेशभर में 5 हजार से अधिक केस सामने आए हैं। इससे संक्रमितों की संखया 3,17,195 हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कलयाण सिंह भी इसकी चपेट मे आ गए हैं। इन सबके बीच एक बुरी खबर यह है कि इस साल के अंत तक कोविद -19 की वैक्सीन सभी के लिए उपलबध करवाने की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी के प्रमुख का मानना है कि 2024 के अंत से पहले सभी को मिलने वाली वैक्सीन का निर्माण असंभव है। जबकि एक दिन पहले ही हमारे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि 2021 की पहली तिमाही तक कोरोना वैक्सीन के उपलब्ध होने की पूरी उम्मीद है। इसके उलट दवा कंपनी के प्रमुख केदार पूनावाला का कहना है कि दवा कंपनियों ने उत्पादन में तेजी से वृदि नही की है, इसलिए दुनिया की पूरी आबादी को इतनी जल्दी वैक्सीन उपलबध हो पाना बेहद मुश्किल ही नही, नामुमकिन है। वैकसीन मिलने में लगभग 4 से 5 साल लग जाएंगे।
फिलहाल, देशवासियों को इस प्रकोप से बचने के लिए तैयार रहना होगा। जिस तरह की लापरवाही देशभर मे बरती जा रही है उस पर लगाम लगाना होगा। कोरोना के अनुसार ही हमे अपने खानपान पर ध्यान देना पडेगा। तभी हम इससे जंग जीत पाएंगे। यही नही लगभग 50 संसद कर्मियों कीरिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। ऐसे मे संसद के अंदर माहौल कैसा होगा यह कहने की जरूरत नही है। नजारा पूरी तरह से बदला बदला था। हालात यह थे कि सोशल डिस्टेंसिंग के कारण लोकसभा के सांसद राज्य सभा मे बैठाए गए। इतिहास में पहली बार हुआ कि सदनो की अलग-अलग शिफ्ट में बैठके हुई। सांसदो के लिए मोबाइल ऐप से हाजिरी लगाने की व्यवस्था की गई थी। ऐसे मे यह बात तो साफ है कि इस बीमारी से कोई भी बचा नही है। क्योंकि माननीय लोगो के पास हर तरह के इंतिजाम होते है। इससे दूसरो को सीख मिलती है। हमे इस महामारी के साथ ही अभी कुछ दिन बिताने होंगे जबतक कि वैक्सीन नही उपलब्ध हो जाती। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कल संसद के सत्र के पहले ही दिन 25 से ज्यादा सांसद कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ऐसे मे संसद सत्र चलाना एक एक बडा चैलेंज है।
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