वाह…. रिटायर हो गई शिक्षिका, फिर भी मिलता रहा वेतन

शिवपुरी। शहर के उमावि क्रमांक 2 संकुल में गंभीर वित्तीय अनियमितता का चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है। इस संकुल के अंतर्गत आने वाले प्रावि नौहरीकलां में पदस्थ सहायक शिक्षिका संतोष सेंगर पिछले साल अगस्त महीने में सेवानिवृत्त हो गई थीं। बावजूद इसके संकुल केंद्र द्वारा शिक्षिका को सेवानिवृत्ति के एक दो नहीं, बल्कि चार महीने बाद तक वेतन का भुगतान किया जाता रहा।

वाह.... रिटायर हो गई शिक्षिका, फिर भी मिलता रहा वेतन इस बीच शिक्षिका को सेवनिवृत्ति पर दिए जाने वाले देयकों यहां तक कि एनओसी व अंतिम वेतन निर्धारण पत्रक भी जारी कर दिया गया। कई महीने गुजर गए, लेकिन संकुल को अपनी इस कारगुजारी का अहसास एक साल बाद हुआ और उस पर भी उक्त सेवानिवृत्त शिक्षिका को ही इसी साल अक्टूबर महीने में नोटिस जारी कर 4 माह का वेतन वापस मांगा गया। जबकि वित्त विभाग के नियम हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद यदि संबंधित महकमे की गलती से अधिक भुगतान होता है तो उसकी रिकवरी गलती करने वाले कार्यालय और उसके संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों से होनी चाहिए।

वेतन भुगतान, कहां गई कटोत्रे की राशि

इस पूरे मामले में बड़ी बात यह है कि कर्मचारी के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद जो वेतन भुगतान किया गया, उस वेतन में से जीपीएफ, बीमा सहित कई तरह के कटोत्रे भी होते हैं। ऐसे में शिक्षिका के रिटायर होने के बाद किए गए भुगतान में से यह कटोत्रे की राशि कहां गई और यदि यह गलती थी तो संबंधित बाबू व प्राचार्य ने इस पर गौर क्यों नहीं किया।

1 हजार से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं संकुल में

उमावि क्रमांक 2 जिले के सबसे बड़े संकुल केंद्रों में शुमार हैं जिसके अंतर्गत करीब 100 स्कूलों में कार्यरत एक हजार से अधिक शिक्षक व अध्यापक आते हैं। एक साल बाद संकुल को इस मामले में होश आया कि चार महीने का वेतन रिटायरमेंट के बाद भुगतान कर दिया गया। ऐसे में यहां यदि जांच की जाए तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं।

यह होती है प्रक्रिया

किसी भी विभाग के कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के करीब 6 माह पहले से उसके वेतन निर्धारण सहित अन्य दस्तावेजों का परीक्षण होता है और उसके बाद पेंशन प्रकरण पेंशन कार्यालय भेजा जाता है। इसके बाद पेंशन कार्यालय पीपीओ जारी करता है लेकिन इस पीपीओ के जारी होने के बाद भी कर्मचारी के देयकों को भुगतान तब होता है जब संबंधित कार्यालय विभिन्न प्रकार की एनओसी के साथ साथ अंतिम वेतन निर्धारण पत्रक जारी करता है। इस मामले में संकुल द्वारा यह एनओसी व पत्रक भी जारी कर दिया गया और इसके आधार पर एजी आफिस द्वारा जीपीएफ के भुगतान आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

शिक्षिका बोली, वेतन निर्धारण भी गलत किया है

संकुल की इस लापरवाही का शिकार हुई शिक्षिका संतोष सेंगर का कहना है कि रिटायरमेंट के समय उनका वेतन निर्धारण भी गलत किया गया, जिससे उन्हें तत्समय भी रिकवरी का सामना करना पड़ा था और इसके बाद उन्होंने कई बार सही वेतन निर्धारण का आवेदन दिया, लेकिन कोई गौर नहीं किया गया। एक साल बाद सीधे नोटिस भेजा है कि चार माह की वेतन गलत ढंग से आपके खाते में जारी हो गई है, जबकि तत्समय इस बारे में कोई सूचना नहीं दी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन होना चाहिए और इस मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होना चाहिए।

यह है सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन

वर्ष 2014-15 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे गलत भुगतान को लेकर गाइड लाइन जारी की थी, जिसके बाद वित्त विभाग ने 31 मार्च 2016 को आदेश जारी किया कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मामले में गलत भुगतान होने पर उनसे रिकवरी न की जाए, बल्कि इस गलत भुगतान के लिए दोषी अधिकारी व कर्मचारियों से रिकवरी हो।

अध्यापकों के वेतन निर्धारण का मामला भी एक साल से पेंडिंग

क्रमांक दो संकुल में लापरवाही का एक और बड़ा मामला अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों का है। सरकार ने इन्हें एक साल पहले छठवां वेतनमान दे दिया था, लेकिन तत्समय भी गलत निर्धारण के आरोप सामने आए थे और चार माह पहले संशोधित गणना पत्रक के अनुसार भी अब तक वेतन निर्धारण नहीं किया गया है।

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