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राजस्थान: टिकट न मिलने के डर से फूट-फूट कर रोए बीजेपी विधायक, दी बगावत की धमकी

अक्सर अपने बयानों को लेकर विवादों में रहने वाले विधायक भवानी सिंह राजावत फूट-फूट कर रो पड़े दरअसल बीजेपी की तरफ से ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा हो चुकी है. लेकिन लालपुरा सीट से 3 बार भाजपा के विधायक रहे भवानी सिंह राजावत का जब टिकट कटने की नौबत आई तो अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ विधायक की आंखों से आंसू झलक आए विधायक का दर्द आंखों के जरिए फूट पड़ा.राजस्थान: टिकट न मिलने के डर से फूट-फूट कर रोए बीजेपी विधायक, दी बगावत की धमकी

बता दें कि बीजेपी सीएम निवास पर अपने बाकी बचे 30 उम्मीदवारों के नामों पर बैठक कर रही है. पर जैसे विधायक भवानी सिंह राजावत को यह अंदाजा हुआ कि बीजेपी इस बार उन्हें इन चुनावों में मौका नहीं देने की सोच रही है वैसे ही वह भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू झलक गए. यहां तक की कार्यकर्ताओं के बीच वह खड़े होकर बातें तो की लेकिन लेकिन आवाज में दर्द साफ नजर आ रहा था.

बता दें कि विधायक भवानी सिंह राजावत बीजेपी से तीन बार विधायक रहे हैं. जब पार्टी की तरफ से उनके टिकट पर तलवार लटकी तो फिर तो विधायक भवानी सिंह राजावत के कार्यालय के बाहर से निकल कर बाहर आ गए. जहां उन्हें हजारों की तादाद में कार्यकर्ताओं की बढ़ी भीड़ ने घेर लिया. यहां तक कि सभी कार्यकर्ताओं ने भवानी सिंह राजावत को दुखी देखकर अपने पदों से इस्तीफा देने की बात भी कह डाली.

वहीं विधायक भवानी सिंह राजावत मीडिया से बात करते कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की है, अगर पार्टी इस बात का ध्यान करने के बाद उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाती है तो बड़ी संख्या में पार्टी के अलग-अलग पदाधिकारी अपने अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. वहीं नेताओं का यह विरोध बीजेपी के लिए मुसीबत बन गया है. क्योकि अगर बीजेपी से तीन बार विधायक रह चुके भवानी सिंह राजावत का टिकट कटता है तो यहां पर बीजेपी के सामने बड़ी समस्या पेश आ सकती है.

हालांकि प्रदेश की दूसरी बड़ी पार्टी में भी टिकट बंटवारे को लेकर हो रहे विवाद अपने चरम पर हैं. गौरतलब है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबूलाल नागर ने टिकट को लेकर ही पार्टी से इस्तीफा देते हुए प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी है. साथ ही अपने फेसबुक पर बाबूलाल नागर ने एक पोस्ट लिखा है जिसमे उन्होने कहा है कि कांग्रेस पार्टी है मेरी मां. लेकिन कुछ स्वार्थी तत्वों ने मुझे मेरी मां से दूर करने का प्रयास किया है. मेरे लिए सर्वोपरि है दूदू विधानसभा क्षेत्र की जनता. कई बार राक्षसों का नाश करने के लिए कठोर निर्णय लेना पड़ता है. कांग्रेस पार्टी ने मुझ दलित नेता पर 25 साल तक इन्वेस्टमेंट किया. मैं चमड़ी उतार कर दे दूं तो भी कांग्रेस का कर्ज़ नहीं उतार सकता.

वहीं जानकारों की मानें तो बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की बगावत को अगर दोनों ही पार्टियों ने शांत नहीं किया तो यह चुनावों में पार्टी के लिए मुसीबत बन सकता है. यहां तक की प्रदेश में दोनों पार्टियों के जीत का गणित बिगड़ सकता है.

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