राजद की अहम बैठक होने वाली है जिसमें तेजस्वी यादव के भी शामिल होने की कही बात….

राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) की आज हो रही महत्वपूर्ण बैठक में विधानमंडल दल के सदस्‍य और जिलाध्यक्ष शामिल हो रहे हैं। साथ ही ये उम्मीद की जा रही है कि लंबे अरसे बाद तेजस्वी यादव बैठक का नेतृत्व करेंगे। बैठक को ले महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी को किस तरह से मजबूती दी जा सकती है, इसपर राय ली जाएगी। बता दें कि आरजेडी (RJD) अभी कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, जिसे लेकर खुद पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव भी चिंतित हैं।

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कठिन दौर से गुजर रही है लालू की राजद

आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने भी माना है कि पार्टी अभी कठिन दौर से गुजर रही है। लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि जल्द ही हमारे नेता तेजस्वी यादव (tejashwi yadav) आएंगे और पार्टी को संभालेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे नेता तेजस्वी हैं और उनके नेतृत्व में पार्टी फिर से अपना खोया जनादेश वापस ला पाएंगे। उन्‍होंने माना कि पार्टी की स्थिति को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव (lalu prasad yadav) भी चिंतित हैं।

बैठ क में आ सकते हैं तेजस्वी, हो रहा इंतजार
आरजेडी की यह बैठक पूर्व सीएम राबड़ी देवी (rabri devi) के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर आयोजित है। बैठक का नेतृत्व राबड़ी देवी करेंगी। इसमें पार्टी के सभी 79 विधायक, 2015 के सारे प्रत्याशी, सभी जिलों के जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी शामिल होंगे। इसमें नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के भी शामिल होने की बात कही जा रही है। लेकिन वे आते हैं या नहीं, ये भी देखना होगा, क्योंकि तेजस्वी लोकसभा चुनाव में राजद को मिली करारी हार के बाद राजनीति से दूर-दूर रह रहे हैं।

हो सकती है बहुत बड़ी उलटफेर
इधर, कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि पार्टी में आने वाले समय में कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर भी हो सकता है। कहा जा रहा है कि आरजेडी ने आनन-फानन में यह बैठक बुलाई है, जिसमें उस कयासबाजी को दूर किया जाएगा जिसमें कांग्रेस के विधायक मुन्ना तिवारी ने अपनी कांग्रेस के अलावा आरजेडी में भी बड़ी टूट का दावा किया है।

कांग्रेस विधायक ने किया था दावा
बता दें कि दो दिन पहले ही बक्सर से कांग्रेस विधायक मुन्ना तिवारी ने दावा किया था कि जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार आने वाला विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस (Congress) और आरजेडी के कुछ विधायक अपनी-अपनी पार्टी छोड़कर नीतीश कुमार के साथ जाएंगे और उन्हें ही मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाएंगे। नीतीश (nitish kumar) भी बीजेपी को छोड़कर इन विधायकों को जेडीयू में शामिल करते हुए उनके ही साथ विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे।

तेजस्वी के सामने है बड़ी चुनौती
अब एेसी स्थिति में RJD की कमजोर हो रही साख के बीच अब लालू के लाल तेजस्वी के लिए बड़ी चुनौती है कि वे अपनी पार्टी को मजबूती कैसे दें। सवाल यह भी है कि वे पार्टी के सदस्यों का फिर से आत्मविश्वास जगा पाएंगे? तेजस्वी की नेतृत्व क्षमता को लेकर उनकी पार्टी में ही कई सवाल उठे हैं। लालू यादव के करीबी विधायक और वरिष्ठ नेताओं ने भी तेजस्वी की नेतृत्व शैली पर सवाल खड़े किए हैं।

अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं तेजस्वी
तेजस्वी ने लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद राजनीति से पूरी तरह दूरी बना ली है। ऐसे में वे अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं। तेजस्वी को कमबैक करने के साथ ही विपक्ष से सामना बाद में करना पड़ेगा। फिलहाल उन्हें पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को दूर करना होगा। लालू यादव की पार्टी और परिवार दोनों ही कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं और तेजस्वी पर परिवार औऱ पार्टी दोनों को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी आ पड़ी है।

तेजस्वी की राजनीति से दूरी, लग रहे कई कयास
बता दें कि बीते ढाई महीने के बाद तेजस्वी के एक बार फिर राजनीति में सक्रिय होने के बाद इस बैठक में उनके तथा बड़े भाई तेजप्रताप यादव और बड़ी बहन मीसा भारती की मौजूदगी या गैरमौजूदगी पर सबकी नजर रहेगी। तेजप्रताप यादव और मीसा भारती की मौजूदगी या गैर मौजूदगी कई मायनों में अहम रहने वाली है, क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान पारिवारिक संबंधों को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आयीं थीं और तेजप्रताप ने अपना अलग मोर्चा खोल दिया था।

तेजप्रताप भी तेजस्वी के लिए बने परेशानी का सबब
हालांकि, तेजप्रताप छोटे भाई तेजस्वी को अपना अर्जुन बताते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उनपर उन्होंने उनकी बात नहीं मानने और उनके उम्मीदवार को टिकट नहीं देने के आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं, तेजप्रताप ने अपने ससुर चंद्रिका यादव को भी छपरा से टिकट देने पर नाराजगी जताई थी। परिवार में तब से ही तनाव बढ़ा और लोकसभा में पार्टी को मिली हार ने तेजस्वी के नेतृत्व पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए।

आरजेडी में नेतृत्व को लेकर पार्टी के कार्यकर्ता और नेता भी असमंजस में हैं और अपने नेता का इंतजार कर रहे हैं कि वो आएं और पार्टी को विषम परिस्थिति से उबार लें।

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