रणथम्भौर नेशनल पार्क से गायब हुए 4 बाघ, वन विभाग ने शुरू की खोज

सवाई माधोपुर: बाघों की अठखेलियों को लेकर विश्‍व प्रसिद्ध सवाई माधोपुर के रणथम्भौर नेशनल पार्क को जैसे पिछले कुछ समय से ग्रहण सा लग गया है. एक तरफ जहां बाघों के दीदार के लिये कोसों मिल का सफर तय कर रणथम्भौर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों को वन विभाग की बुकिंग विंडो पर आसानी से टिकट नहीं मिल पा रहे है वहीं दुसरी तरफ रणथम्भौर के जंगलों से बाघों के लापता होने का सिलसिला थमनें का नाम नहीं ले रहा.रणथम्भौर नेशनल पार्क से गायब हुए 4 बाघ, वन विभाग ने शुरू की खोज

खबरो के मुताबिक नेशनल पार्क में एक के बाद एक बाघ लापता हो रहा है. जिनका कहीं कोई सुराग नही लग पा रहा है. हालात ये है की वन विभाग लापता बाघों की गिनती बतानें से भी परहेज कर रहा है और विभागीय अधिकारी दबी जुबान एक दो बाघों के लापता होने की बात स्वीकार भी कर रहे है. हालांकि अन्य अधिकारी बाघों के रणथम्भौर में होने की बात कह रहे है लेकिन सूत्रों की मानें तो दो बाघों का भी कहीं कोई अता पता नहीं है. 

वन विभाग के सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रणथम्भौर में विचरण करनें वाली टाइगर टी 83 लाईटनिंग के दो शावक मई माह से लापता है. जिनका आज तक कोई सुराग नहीं लग पाया है. वहीं टाईगर टी 61 के भी दो शावकों के लापता होने की खबर है. जिन्हें वन विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से ढुंढने का प्रयास किया जा रहा है. टाईगर टी 61 के लापता दो बाघों में से एक के बुंन्दी के रामगढ विषधारी अभ्यारण में होने की जानकारी मिल रही है. मगर वन विभाग के अधिकारी टाईगर टी 61 के दो बाघों के लापता होने की बात स्वीकार नहीं कर रहे है.  

वन विभाक के अधिकारियों की मानें तो उनका कहना है की टाइगर टी 61 के दोनों बाघ रणथम्भौर में ही है. जबकी पिछले कई समय से दोनों बाघ कहीं दिखाई नहीं दिए. वहीं वन विभाग के अधिकारीयों की माने तो रणथम्भौर की लाईटिग नामक टाईगर टी 83 के दो शावक मई से लापता है. जिनकी तलाश के लिये विशेष टीम बनाई गई है जो लगातार लापता बाघों की तलाश में जुटी हुई है मगर अभी तक उनका कहीं कोई पता नहीं चल पाया है. 

वहीं बाघों के गायब होने की बात वन विभाग के अधिकारी खुलकर नहीं कर रहे है. सुत्रों की मानें तो रणथम्भौर से करीब 4 बाघ गायब हैं जिनकी वन विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से तलाश की जा रही है. रणथम्भौर से बाघों के गायब होना कोई नहीं बात नहीं है पहले भी इसी तरह कई बाघ रणथम्भौर के जंगलों से लापता हो चुके है. जिनपर बाद में वन विभाग द्वारा पर्दा डाल दिया गया. रणथम्भौर वन प्रशासन का बाघों के संरक्षण पर कम बल्कि पर्यटन पर अधिक ध्यान है. यही कारण है की रणथम्भौर से एक के बाद एक टाईगर गायब हो रहा है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दुर नहीं जब रणथम्भौर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों को बाघों का दीदार होना भी संभव नहीं हो पायेगा.

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