यूपी सरकार ने दी 24 चीनी मिलों को हैंड सैनिटाइजर बनाने की अनुमति

लखनऊ: कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए देश में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इस संक्रमण को रोकने के लिए लगातार लोगों से घरों के अंदर रहने और बार-बार हाथों को अच्छी तरह से साफ करने की अपील की जा रही है. लोगों से हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने को कहा जा रहा है. जिसके बाद से ही बाजारों में इसकी तेजी से मांग बढ़ी है. पूरे भारत में फैल रहे घातक कोरोनावायरस के मद्देनजर उत्पाद की बड़ी कमी आई है. लिहाजा अब उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में अब हैंड सैनिटाइजर का भी निर्माण किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 चीनी मिलों को हैंड सैनिटाइजर बनाने की अनुमति दी है. ये 24 मिलें रविवार से सैनिटाइजर का उत्पादन शुरू कर देंगी. सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, जिन 25 मिलों को अनुमति मिली है, उनमें से पांच बिजनौर जिले की हैं. इस पहल से चीनी उद्योगों के राजस्व को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. गन्ने के रस से चीनी निकाले जाने के बाद गुड़ से शराब का उत्पादन किया जाता है. इसलिए इन मिलों में सैनिटाइजर का उत्पादन करने के लिए कच्चा माल होगा.
अतिरिक्त गन्ना आयुक्त वी. के. शुक्ला ने कहा, ‘कोरोनावायरस ने देश को दहला दिया है जिसके बाद से सैनिटाइजर की मांग आसमान छू गई है. बाजार में मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है, जो इस निर्णय के बाद कम हो जाएगा.’ अधिकारियों ने कहा कि अकेले बिजनौर में बरकतपुर मिल से प्रतिदिन लगभग 5,000 लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन होने की उम्मीद है.
आबकारी एवं चीनी विभाग के प्रमुख सचिव संजय भुसरेड्डी ने बताया कि रायबरेली के निजी डीलरों ने 20,000 सैनिटाइजर 200 मिलीलीटर की बोतलों का अनुरोध किया है. 2000 को कल और बाकी को लखनऊ की मेघदूत फर्म से कुछ दिनों में भेजा जाएगा. उन्होंने कहा कि चित्रकूट के लिए 500 लीटर Gproxon लखनऊ से भेजे जाएंगे. महराजगंज के लिए IGL से 270 लीटर आज भेजा है.
उन्होंने आज 12 से ज्यादा सैनिटाइजर FL 41 लाइसेंस जारी किए गए हैं. कुल Sanitizers लाइसेंस 41 जारी किए गए हैं. बस्ती, आजमगढ़, मिर्जापुर, चित्रकूट, आगरा और कानपुर डिवीजन को छोड़कर 11 डिवीजनों में न्यूनतम एक लाइसेंस दिया गया है. आगरा में एक यूनिट ड्रग लाइसेंस प्रक्रिया में है.

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