यूपी-अब खाकी रंग की ‘खादी’ में नजर आएगी पुलिस

अब अपनी पुलिस भी खाकी रंग की खादी में नजर आएगी। सप्ताह में एक दिन पुलिस कर्मियों को खादी पहनना अनिवार्य होगा। भारत सरकार के खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार से ये आदेश जारी करने का सुझाव दिया है। जिस पर सभी जोनल अपर पुलिस महानिदेशक से सुझाव भी मांगा गया है।

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यूपी-अब खाकी रंग की ‘खादी’ में नजर आएगी पुलिस

अब तक प्रदेश पुलिस की पहचान खाकी रंग से जुड़ी है। पहले पुलिस जवान व अफसर खाकी रंग की सूती वर्दी में नजर आते थे। महकमा भी सूती वर्दी देता था। जैसे-जैसे समय बदला पुलिस भी आधुनिक होती चली गई। सूती वर्दी धीरे-धीरे टेरीकाट से बदलने लगी। अब पुलिस को ‘खादी’ पहनाने की पहल शुरू की गई है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष के सुझाव को मुख्यमंत्री ने संज्ञान में लिया है। इस बाबत मुख्यमंत्री के विशेष सचिव डॉ. आदर्श सिंह ने पत्र जारी कर पुलिस उच्चाधिकारियों से 24 जुलाई तक उनके सुझाव मांगे हैं।

खादी है देश का गौरव

भारतीय संस्कृति का प्रतीक मानी जाने वाली खादी पहनने मात्र से ही लोग गौरवान्वित महसूस करते हैं। सर्वप्रथम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देशवासियों को हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए खादी का महत्व समझाने की मुहिम छेड़ी थी। देश के गौरव खादी को पुलिस कर्मियों को पहनाने में भी गहरी सोच नजर आ रही है।

क्या है खादी और सूती कपड़ों में अंतर

कपास को प्रसंस्करण कर औद्योगिक रूप में सूत के धागों का निर्माण किया जाता है। अधिकांश निर्माता कम्पनी धागों को मजबूती प्रदान करने के लिए टेरीलीन या अन्य सेन्थेटिक धागों का कुछ अंश सम्मिश्रित करती है। तब सूती कपड़ों का निर्माण होता है। वहीं खादी ग्रामोद्योग एवं हथकरघा उद्योग द्वारा कपास से सीधे सूत काता जाता है। जिसकी मदद से हस्तनिर्मित (हैण्डलूम) खादी कपड़ों का निर्माण होता है। इसमें कोई मिलावट नहीं होती है।

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