यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में भारत की टॉप 13 जगहें शामिल है

हर साल 18 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व धरोहर दिवस (वर्ल्ड हेरिटेज डे) का मकसद लोगों को दुनिया की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के प्रति जागरूक करना होता है। दुनिया में ऐसी कई सारी जगहें हैं जो अपनी खास बनावट के साथ ही और भी कई विविधताएं समेटे हुए हैं जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं लेकिन यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में शामिल होने के बाद इन्हें एक अलग ही पहचान मिली। यूनेस्को के हेरिटेज लिस्ट में कुल 878 जगहें शामिल हैं। लेकिन आज हम यहां भारत की खास 15 जगहों और उनकी खासियत के बारे में जानेंगे।

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कितनी जगहें हैं वर्ल्ड हेरिटेज़ की लिस्ट में शामिल

खूबसूरत ताजमहल से लेकर शानदार हम्पी तक, इंडिया में कुल 37 ऐसी जगहें हैं जिन्हें यूनेस्को ने अपने वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया है।  

ताज महल

भारत की नायाब धरोहरों में शामिल है आगरा का ताज महल। इसकी खूबसूरती को देखने दुनियाभर से लोग आते हैं। मुगल शासक शाहजहां द्वारा बेगम मुमताज की याद में बनावाया गया सफेद संगमरमर का यह मकबरा दुनिया के सात अजूबों में भी शामिल है। पत्थरों पर बारीकी से किया गया नक्काशी का काम इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है। आगरा खासतौर से ताज महल के लिए ही पूरी दुनिया में मशहूर है।

खजुराहो

खजुराहो में मंदिरों की तीन श्रेणी वेस्टर्न, ईस्टर्न और सदर्न हैं, जिनमें कुल 25 मंदिर हैं। हर मंदिर पर इंसान के जन्म से लेकर मरण तक की कलाकृतियां पत्थरों पर अंकित हैं। परिसर की दीवारों, मंदिर के अंदर-बाहर और गुंबद तक में महीन नक्काशी है। पत्थर पर उकेरी गई यही कलाकृतियां खजुराहो की पहचान हैं, जिसे देखने सात समंदर पार से विदेशी भी आते हैं। 

हम्पी

कर्नाटक के बेल्लारी जिले में स्थित ‘हंपी’ को दुनियाभर के सबसे बेहतरीन पर्यटन स्थलों की इस साल की सूची में दूसरा स्थान दिया गया है। यूनेस्को की ‘वैश्विक धरोहर सूची’ में शामिल हंपी 1336 से 1646 के बीच के विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था। तुंगभद्रा नदी के तट पर कई मील तक फैला यह प्राचीन नगर 16वीं शताब्दी के दौरान विश्व के सबसे बड़े और समृद्ध नगरों में से एक था। हंपी ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहरों का कुंभ है। यहां 1,600 से भी अधिक हिंदू मंदिर, महल, किले और संरक्षित पत्थरों के स्मारक हैं। वास्तुकला के लिहाज से ये सारे स्मारक अनोखे हैं। यहां हिंदू देवी-देवताओं के कई मंदिर भी हैं जिनमें विरुपक्षा, विजय वित्तला, हेमाकुता मंदिर आदि प्रमुख हैं। यहां भगवान गणेश के साथ नरसिंह देव के भी मंदिर हैं। 

अजंता गुफा

अजंता-एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के समीप स्थित‍ हैं। ये गुफाएँ बड़ी-बड़ी चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं। ये बौद्ध स्मारक गुफाएँ हैं। औरंगाबाद शहर से लगभग 107 किलो मीटर की दूरी पर अजंता की ये गुफाएं पहाड़ को काट कर विशाल घोड़े की नाल के आकार में बनाई गई हैं। इन गुफाओं को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के रूप में संरक्षित किया जा रहा है।

काजीरंगा नेशनल पार्क

साल 1905 में ब्रिटिश वायसराय लार्ड कर्जन की पत्नी के रिक्वेस्ट के बाद इसे बनाया गया। काजीरंगा नेशनल पार्क असम की एक बहुत ही बड़ी वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी है। यह खास तौर पर दरियाई घोड़ों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यह टाइगर, हाथी, सांभर, हिरन, भैंस, भालुओं सहित और भी कई प्रकार के पक्षियों के लिए भी फेमस है।

महाबोधि मंदिर

बिहार के बोधगया में स्थित इसी मंदिर के पास पीपल के पेड़ के नीचे महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। अब यहीं से बौद्ध भिक्षुओं की शिक्षा-दीक्षा की शुरुआत होती है। द्रविड़ आर्किटेक्चर के हिसाब से इस मंदिर का निर्माण किया गया है। इस मंदिर की ऊंचाई 180 फीट है। वर्ष 2002 में यूनेस्को द्वारा इस शहर को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया।

फतेहपुर सीकरी

आगरा से महज 39 किमी की दूरी पर बसे फतेहपुर सीकरी की खूबसूरती का अंदाजा यहां आने के बाद ही पता चलता है। 1569 में अकबर द्वारा बनाए गए फतेहपुर सीकरी को 1571 से लेकर 1585 तक मुगलों की राजधानी के तौर पर जाना जाता था। लाल पत्थरों से बनी हुआ फतेहपुर सीकरी हिंदू और इस्लामिक आर्किटेक्चर का एक अनूठा उदाहरण है। पहले इस जगह का नाम फतेहाबाद था जिसे बाद में बदलकर फतेहपुर सीकरी कर दिया गया।

कोणार्क सूर्य मंदिर

ओडिशा में पुरी जिले से लगभग 23 मील की दूरी पर चंद्रभागा नदी के तट पर कोणार्क का सूर्य मंदिर स्थित है। इसकी कल्पना सूर्य के रथ के रूप में की गई है। इसकी संरचना इस प्रकार है कि रथ में 12 जोड़े विशाल पहिए लगे हैं और इसे 7 शक्तिशाली घोड़े खींच रहे हैं। सूर्य का उदयकाल, मंदिर के शिखर के ठीक ऊपर से दिखाई देता है, ऐसा लगता है कि कोई लाल-नारंगी रंग का बड़ा सा गोला शिखर के चारों ओर अपनी किरणें बिखेर रहा है। यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए दुनियाभर में मशहूर है और ऊंचे प्रवेश द्वारों से घिरा है।

रानी की वाव

रानी– की– वाव (रानी की बावड़ी) गुजरात राज्य के पाटण में स्थित है। इसका निर्माण 11वीं सदी में एक राजा की याद के तौर पर करवाया गया था। भारतीय उपमहाद्वीप में बावड़ियों को पानी के भंडारण की प्रणाली माना जाता है। रानी– की– वाव ‘वास्तुशिल्पियों’ की क्षमता को दर्शाता है। यह कुंआ संपत्ति के पश्चिमी किनारे पर बना है और इसमें शाफ्ट बने हैं, इसका व्यास 10 मीटर और गहराई 30 मीटर है। भारतीय उपमहाद्वीप में बावड़ियों को पानी के संसाधन और भंडारण प्रणाली माना जाता है। रानी– की– वाव ‘वास्तुशिल्पियों’ की क्षमता को दर्शाता है। इसका व्यास 10 मीटर और गहराई 30 मीटर है। 

चांपानेर पावागढ़ पुरातात्विक उद्यान

इंडो-सारसानिक वास्तुकला के अभूतपूर्व समागम का बेजोड़ नमूना है चांपानेर पावागढ़ पुरातात्विक उद्यान। इंडो सरसानिक वास्तुकला स्थापत्य की एक ऐसी कला है, जिसमें भारतीय इस्लामिक आर्किटेक्चर और हिंदू आर्किटेक्चर को मिलाकर कुछ नया तैयार किया जाता है। इसमें विक्टोरियन वास्तुकला की छाप भी देखने को मिलती है।

भीमबेटका, मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश के भोपाल से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भीमबेटका में आज सैकड़ों अद्भुत गुफाएं हैं, जो आदि-मानव द्वारा बनाए गए शैल चित्रों और शैलाश्रयों के लिए के लिए प्रसिद्ध हैं। कहा जाता है कि इनका संबंध ‘मध्य पाषाण’ काल से है। यहां की दीवार, लघुस्तूप, भवन, शुंग-गुप्त कालीन अभिलेख, शंख अभिलेख और परमार कालीन मंदिर हजारों साल पुराने हैं। भीमबेटका का संबंध महाभारत के भीम से माना गया है। यहां की अधिकतर गुफाएं पांडव पुत्र भीम से संबंधित हैं। विंध्य पर्वतमालाओं से घिरी हुई भीमबेटका गुफाओं में प्राकृतिक लाल और सफेद रंगों (कहीं-कहीं पीला और हरा रंग भी प्रयोग हुआ है) से वन्यप्राणियों के शिकार दृश्यों के अलावा घोड़े, हाथी, बाघ आदि के चित्र उकेरे गए हैं। 

केवलादेव नेशनल पार्क

राजस्‍थान के भरतपुर जिले में स्‍थ‍ित केवलादेव बेहद खूबसूरत बर्ड सेंचुरी है। इसे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जानते हैं। यहां पर रंगबिरंगे पक्षियों का कलरव पर्यटकों को बहुत भाता है। सर्दी शुरू होते ही यहां पर प्रवासी पक्षि‍यों का आगमन शुरू हो जाता है। इस बर्ड सेंचुरी में अफगानिस्तान, तुर्की, चीन से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके पक्षी इस पार्क की शोभा बढ़ाने आते हैं। यहां पर करीब 300 से भी ज्यादा प्रजाति‍यों के पक्षी देखने को मिलते हैं। जिनमें छोटी बतख, जंगली बतख, वेगंस, शोवेलेर्स, पिनटेल बतख, सामान्य बत्तख, लाल कलगी वाली बत्तख शामिल हैं। यह भारत का सबसे बड़ा पक्षी अभयारण्य है। जिसे 1982 में राष्ट्रीय उद्यान और 1985 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्‍थल में शामिल किया गया। 

नंदा देवी नेशनल पार्क

शानदार पहाड़, चारों ओर फैली हरियाली और उनमें टहलते हुए जीव-जंतु कुछ ऐसा होता है नंदा देवी नेशनल पार्क का नज़ारा। ब्रम्ह कमल और भरल (पहाड़ी बकरी) यहां पार्क की शोभा बढ़ाते हुए मिल जाएंगे। समुद्रतल से 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क, उत्तराखंड में स्थित है। लगभग 630.33 वर्ग किमी में फैला ये उत्तर भारत का सबसे बड़ा पार्क है।

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