यदि नहीं है संतान ‘तो न हों परेशान’, क्योंकि…

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भारत ही नहीं दुनिया भर में ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्‍हें किसी न किसी कारण से मां बनने का सौभाग्य नहीं मिला। लेकिन ऐसे में परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं हैं। यह सोच ही गलत है कि मां बनने के बाद आपका जीवन परिपूर्ण होगा।आपको बस आपके हारमोन संबंधी स्रावों ने धोखा दिया है। आप अपनी बुद्धि से काम नहीं ले रही हैं। अगर संतान पैदा करने से संतुष्टि होती, तो अब तक दुनिया परिपूर्ण हो गई होती?

यदि नहीं है संतान

इस बारे में आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव जी कहते हैं, बच्चे को जन्म दिए बिना एक स्त्री का जीवन अधूरा होता है, यह समाज की बनाई हुई एक पक्षपातपूर्ण धारणा है। भारत में एक समय ऐसा भी था जब एक संतानहीन स्त्री को हर किसी के लिए अपशकुनी माना जाता था।

यदि कोई सिर्फ संतान पैदा न कर पाने पर अपशकुनी होता है, तो जो लोग अध्यात्म की राह पर चले और ऐसी चीजों के बारे में कभी परवाह ही नहीं की, क्या वे सभी अपशकुनी थे? सारे साधु-संन्यासी, विवेकानन्द, ईसा मसीह ऐसे ही लोग थे। इनकी तो आज पूजा की जाती है।

यदि बच्चे नहीं है तो ऐसे कई अनाथ बच्चे हैं, जिन्हें वह स्त्रियां अपना सकती हैं। यह मनोविज्ञान है, जीवविज्ञान नहीं। इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह बच्चा आपसे पैदा हुआ है या किसी और से?

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आप उस बच्चे को कितनी गहराई से स्वीकार करते हैं और अपना हिस्सा मानते हैं, इस पर वह अनुभव निर्भर करता है। इसलिए बच्चा न होने को इतना बड़ा मुद्दा न बनाएं और समाज के दबावों के आगे सिर न झुकाएं। यदि वाकई एक बच्चे को पालना चाहती हैं, तो ऐसे बहुत से बच्चे हैं, जिन्हें पालने की जरूरत है।

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