मुख्‍यमंत्री जी ! बिना पैसा खर्च किये जो खुशी दे सकते हैं, वह तो दे दीजिये…

-राज्‍य कर्मचारी संयुक्‍त परिषद ने सहमति बन चुकी मांगों को पूरा करने का किया अनुरोध

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने उत्तर प्रदेश शासन से मांग की है कि कोविड संक्रमण काल में कोरोना योद्धाओं की जिन मांगों पर सहमति बन चुकी है, उन मांगों का निस्तारण कर उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए। परिषद ने इस बाबत मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को पत्र भेज कर अनुरोध किया है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री अतुल मिश्रा ने बताया कि‍ परिषद द्वारा चौथे वेतन आयोग के समय सन 1986 में केंद्र और राज्य कर्मियों के वेतन की समानता की मांग को लेकर एक बहुत बड़ा आंदोलन कर्मचारियों को करना पड़ा था। इसमें पूरे प्रदेश के कर्मचारी 19 दिन तक हड़ताल पर थे उसके उपरांत तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के साथ परिषद के पदाधिकारियों की बैठक संपन्न हुई जिसमें यह समझौता हुआ था की केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को जो वेतनमान देगी वही वेतनमान उत्तर प्रदेश सरकार भी देगी। समझौते के उपरांत जितने भी वेतन आयोग का गठन हुआ उसमें केंद्र से वेतन की समानता की संस्तुति वेतन आयोग द्वारा की गई।

उन्‍होंने बताया कि सातवें वेतन आयोग द्वारा केन्द्र के कुछ कर्मचारियों के वेतनमान को उनके कार्य एवं दायित्वों को देखते हुए उच्चीकृत किया गया, जो प्रदेश सरकार को भी करना था। उ प्र में सातवें वेतन समिति द्वारा केंद्र के पद से पद के वेतनमान की समानता के आधार पर अपनी संस्तुति करते हुए रिपोर्ट मुख्यमंत्री को विगत दो वर्ष पूर्व प्रेषित कर दी गई।

उन्‍होंने बताया कि काफी समय व्यतीत हो जाने के उपरांत रिपोर्ट जब मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई तो परिषद ने बड़े आंदोलन की घोषणा की, जिसमें तत्कालीन मुख्य सचिव डॉ अनूप चन्द्र पाण्डेय के साथ परिषद के प्रतिनिधिमंडल की 11 अक्टूबर 2018 को वार्ता सम्पन्न हुई और सहमति बनी कि 3 माह के अंदर वेतन विसंगति की रिपोर्ट मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत कर निस्तारण करा दिया जायेगा, जो लगभग 2 साल से लंबित है।

उनका कहना है कि आज इस वैश्विक महामारी कोविड 19 में प्रदेश का लाखों कर्मचारी अपनी जान व परिवार की परवाह किये बगैर कोरोना योद्धा के रूप में जनता की सेवा कर रहा है, जिसकी सराहना देश की जनता, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व अन्य विशिष्ट महानुभावों ने सार्वजनिक रूप से की भी है । प्रदेश में सैकड़ों की संख्या में कोरोना योद्धा दिवंगत भी हो गए।

अतुल मिश्रा ने कहा कि आज ऐसी परिस्थितियों में चिकित्सा विभाग के कर्मचारी जो अग्रिम पंक्ति में कोरोना योद्धा के रूप में कार्य कर रहे हैं उनकी जायज़ मांग जिसमे कोई वित्तीय भार सरकार को वहन नहीं करना है जैसे नर्सेज जिनका पदनाम केन्द्र में परिवर्तित हो चुका है प्रदेश में लंबित है, लैब टेक्नीशियन और फार्मेसिस्ट संवर्ग का पदनाम परिवर्तन और वेतन उच्चीकरण, ऑप्टोमेट्रिस्ट, प्रयोगशाला सहायक का वेतन उच्चीकरण व पदनाम परिवर्तन केन्द्र सरकार द्वारा किया जा चुका है, सहित अन्य संवर्गों की वेतन विसंगति भी केन्द्र सरकार निस्तारित कर चुकी है, परन्तु समझौतो के बावजूद प्रदेश में अभी वेतन विसंगति व पदनाम परिवर्तन लम्बित है।

उन्‍होंने कहा कि अन्य विभागों के कर्मचारी जैसे रोडवेज, स्थानीय निकाय, गन्ना पर्यवेक्षक, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, अधीनस्थ कृषि सेवा आदि की वेतन विसंगति पर वेतन समिति की संस्तुतियों पर अक्टूबर 2018 में ही मंत्रिपरिषद से निर्णय कराने का निर्णय लिया गया था जो दो वर्ष बाद भी अभी तक लम्बित है। उन्‍होंने कहा कि इस प्रकार समझौतों पर कार्यवाही तो नहीं हो सकी बल्कि उसके स्थान पर राज्य कर्मचारियों को अभी तक प्राप्त हो रहे छह भत्ते समाप्त कर जले पर नमक छिड़कने जैसा कार्य किया गया।

परिषद के उपाध्यक्ष सुनील यादव ने बताया कि प्रदेश के एलोपैथिक, होम्योपैथिक, आयूर्वेदिक, यूनानी एवं वेटनरी फार्मासिस्ट चिकित्सालयों की रीढ़ के रूप में कार्य कर रहे हैं, महत्वपूर्ण कार्य एवं दायित्व तथा शैक्षिक एवं तकनीकी योग्यता को देखते हुए वेतन समिति द्वारा वेतन उच्चीकरण कर राज्य में कार्यरत अन्य डिप्लोमा धारकों के बराबर करने का निर्णय लिया गया था, मुख्य सचिव द्वारा उक्त विसंगति को एक माह के अन्दर मंत्रिपरिषद से पारित कराकर लागू कराने का निर्णय बैठक में लिया गया था, परन्तु अभी तक उक्त समझौता शासन की फाइलों में दर्ज है। उन्‍होंने कहा कि इसी प्रकार फार्मेसिस्ट का पदनाम फार्मेसी अधिकारी, लैब टेक्नीशियन का पदनाम मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट किया जाना चाहिये।

अतुल मिश्रा ने कहा कि आज इस वैश्विक महामारी में जहां देश के कई राज्य अपने कोरोना योद्धाओं को सम्मानित करने व प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उन्हें एक माह का अतिरिक्त वेतन, कोई दुर्घटना होने पर परिवार को एक करोड़ अतिरिक्त राशि, सेवानिवृत्त आयु बढ़ा रहे हैं जिससे उनका मनोबल मजबूत रहे हैं तो ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश सरकार को जो वित्तविहीन प्रकरण है उनका निस्तारण तो कम से कम कर देना चाहिए और सरकार इन जायज़ मांगों को देने के लिए पूर्व से वचनबद्ध है।

परिषद ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि कोरोना योद्धाओं की वेतन विसंगति, पदनाम परिवर्तन, कैडर पुनर्गठन जैसे प्रकरण जिसमें सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ना है, पर आपके नेतृत्व वाली सरकार में हुए समझौतो का क्रियान्वयन कराने का निर्देश जारी करें, जिससे इनका मनोबल मजबूत हो।

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