महसूस कर सकेंगे स्वाद अब वर्चुअल रियलिटी में भी इस तरह किया प्रयोग

‘वर्चुअल रियलिटी’ एक ऐसा अनुभव जो बिल्कुल वास्तविक लगता है पर होता नहीं। वर्चुअल रियलिटी का उपयोग ज्यादातर गेम और सिनेमा की दुनिया में होता है। लेकिन वैज्ञानिकों ने अब नई ‘वर्चुअल टेस्ट (स्वाद)’ भी विकसित कर लिया। यानी ऐसा स्वाद जो हकीकत में नहीं होगा, लेकिन हमें महसूस होगा।

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वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक सिस्टम विकसित किया है, जिसमें प्रकाश के माध्यम से न्यूरांस को नियंत्रित कर आभाषी (वर्चुअल) स्वाद का अहसास दिलाया जाता है। इस नई तकनीक का मक्खियों पर सफलता पूर्वक परीक्षण भी कर लिया गया है। वर्चुअल स्वाद का अहसास दिलाने के लिए नया टूल ऑप्टोपैड विकसित किया है। इसे बनाने में दो हाईटेक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें पहली तकनीक ऑप्टोजेनेटिक्स है। यह एक पॉवरफुल मैथड है जिसमें प्रकाश का उपयोग करके मस्तिष्क के न्यूरांस को नियंत्रित किया जाता है। प्रयोग के दौरान पाया गया कि मक्खियों को सादा भोजन ज्यादा स्वादिष्ट महसूस हुआ। क्योंकि नई तकनीक से उनको मीठे का अहसास दिलाने वाले न्यूरांस सक्रिय कर दिए गए थे। इसके लिए हरे रंग के प्रकाश की जरूरत पड़ती है। दूसरी तकनीक फ्लाईपैड है। यह टच स्क्रीन जैसी तकनीक है। जिस तरह से फोन स्क्रीन पर हमारी अंगुली के स्पर्श का पता लगाने में सक्षम है। ठीक वैसे ही मक्खी जब भोजन को छूती है तो उसके स्पर्श का पता लगाने में फ्लाईपैड सक्षम है। इन दोनों तकनीकों फ्लाईपैड और ऑप्टोजेनेटिक्स को मिलाकर ही ऑप्टोपैड का आविष्कार किया गया है।

इस तरह किया प्रयोग-   ऑप्टोपैड का उपयोग मक्खियों पर किया। उन्होंने देखा कि मक्खियों को जब बेस्वाद भोजन दिया गया और स्वीट सेंसिंग (मीठा अहसास) न्यूरांससक्रिय किए गए तो मक्खियां भोजन खाती रहीं। जैसे ही बिटर सेंसिंग (कड़वा अहसास) न्यूरांस सक्रिय किए गए मक्खियों ने खाना छोड़ दिया। बहुत से आहार ऐसे हैं जो पोषण तत्वों से भरपूर हैं, लेकिन स्वाद में अच्छे नहीं हैं। ऐसे में इस तकनीक का उपयोग करते अच्छे पोषण युक्त आहार लेने में मदद मिल सकती है। 

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